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Dengue fever: डेंगू में बुखार होना जरूरी नहीं, इसके हल्के और गंभीर लक्षणों के बारे में जानिए

Fri, 04 Nov 2022 06:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेंगू का प्रकोप - फोटो : istock
राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में डेंगू के मामले बढ़ने की खबर है। दिल्ली में अक्तूबर के महीने में 1200 से अधिक केस दर्ज किए गए। इस बीच यहां एक मौत भी हुई है। इसी तरह लखनऊ में भी डेंगू के केस चिंता बढ़ाने वाले हैं। कई स्थानों पर लोगों को बेड के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। मच्छर जनित इस रोग के कारण कई रोगियों में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं भी देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी  लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

डॉक्टर कहते हैं, डेंगू में तेज बुखार के साथ त्वचा पर चकत्ते, शरीर में दर्द जैसी दिक्कतें काफी सामान्य देखी जाती रही है, पर हर बार डेंगू में बुखार हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ रोगियों को बिना बुखार के भी खून की जांच में डेंगू से संक्रमित पाया गया है।

डेंगू के एसिम्पटोमेटिक मामलों को और भी गंभीर माना जाता है क्योंकि इसमें समय पर रोग का पता नहीं चल पाता है और यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। इस तरह के खतरे को देखते हुए सभी लोगों को इसके हल्के और गंभीर लक्षणों के बारे में जानते हुए उनसे बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। 
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डेंगू बुखार का जोखिम और लक्षण - फोटो : istock
डेंगू के खतरे के बारे में जानिए

इंटेसिव केयर विशेषज्ञ डॉ अवनीश पांडे बताते हैं, अस्पतालों में कई ऐसे रोगी भी आ रहे हैं जिनमें हल्के बुखार के साथ पेट की कुछ दिक्कतें थी, खून की जांच में उनमें डेंगू का पता चला। कुछ रोगियों में बुखार के बिना भी डेंगू का निदान किया गया है, ऐसे में इस तरह के जोखिमों का ध्यान रखना सभी के लिए और भी आवश्यक हो गया है।

डेंगू का संक्रमण एक व्यक्ति में एक से अधिक बार भी हो सकता है। डेंगू बुखार से बचाव के लिए फिलहाल कोई टीका नहीं है। मच्छरों के काटने से बचाव के लिए सभी आवश्यक सावधानियों का पालन करना महत्वपूर्ण है। कुछ मामलों में डेंगू बुखार हल्का होता है, तो कुछ रोगियों में बुखार भी नहीं हो रहा है।
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डेंगू के लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
डेंगू के हल्के मामले और इसके लक्षण

डेंगू बुखार के लक्षण संक्रमित मच्छर के काटने के चार से सात दिनों के भीतर नजर आ सकते हैं। कुछ लोगों में इसके लक्षण काफी हल्के होते हैं, उन्हें फ्लू समस्याएं हो सकती हैं। वैसे तो हल्के मामले आसानी से घर पर ही ठीक हो जाते हैं, फिर भी इसको लेकर लापरवाही नहीं की जानी चाहिए।

हल्के डेंगू में 104-106 डिग्री फारेनहाइट तक बुखार के साथ, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सुस्ती-थकान, खड़े होना या चलने में मुश्किल हो सकती है। कुछ रोगियों में बुखार बहुत हल्का भी हो सकता है। बुखार शुरू होने के कुछ दिनों में त्वचा पर रैशेज होने को डेंगू का संकेत माना जाता है। डॉक्टर कहते हैं, हल्के डेंगू में कुछ रोगियों में बिना बुखार के भी ये दिक्कतें देखी गई हैं।

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डेंगू के गंभीर मामले - फोटो : iStock
गंभीर लक्षणों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत

वहीं डेंगू के कुछ मामले गंभीर लक्षणों वाले भी हो सकते हैं। इस स्थिति में  तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए ताकि समय पर इलाज के माध्यम से रोग की गंभीरता को कम किया जा सके। डेंगू के गंभीर लक्षणों में अचानक तेज बुखार (106 फारेनहाइट तक) के साथ, प्लेटलेट काउंट में भारी गिरावट, शरीर मुंह या नाक से खून आने की दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा पेट में तेज दर्द और शौच के साथ भी खून आ सकता है। इन लक्षणों वाले रोगियों को तत्काल अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत होती है। 
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दिल्ली में डेंगू संक्रमण का कहर - फोटो : istock
डेंगू हो जाए तो क्या करें?

डॉ अवनीश बताते हैं, यदि आपको डेंगू के लक्षण महसूस हो रहे हैं या सामान्य दवाओं से ठीक नहीं हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह पर खून की जांच जरूर करा लें। यदि आपमें डेंगू का पता चलता है और लक्षण हल्के हैं तो डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं के साथ घर पर ही आराम करें, शरीर को हाइड्रेटेड रखें। समय-समय पर पानी, नारियल पानी, फलों के जूस आदि का सेवन जरूर करते रहें, पौष्टिक आहार का सेवन करें।

यदि लक्षण ठीक नहीं हो रहे या यह बढ़ता हुआ नजर आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह पर आगे के उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हो जाएं। डेंगू से सुरक्षित रहने के लिए मच्छरों के काटने से बचाव करते रहना सबसे आवश्यक है।



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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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