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प्रदूषण का खतरा: सुबह-सुबह पार्क में एक्सरसाइज करने वालों के लिए जरूरी खबर, लापरवाही बढ़ा देगी ये दिक्कतें

Mon, 26 Oct 2026 05:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Workout In Poor AQI: प्रदूषण के दौरान एक्सरसाइज करने से पहले एक्यूआई जरूर चेक करें। खराब की गुणवत्ता खराब होने पर तेज दौड़ने और आउटडोर वर्कआउट से बचें। घर के अंदर हल्की एक्सरसाइज करें, ट्रैफिक वाली जगहों से दूर रहें और सांस फूलने या सीने में जकड़न होने पर तुरंत रुकें।
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वायु प्रदूषण के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Amarujala.com/AI
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर टेंशन फिर से शुरू हो गई है। दिवाली से पहले ही यहां हवा की गुणवत्ता खराब होनी शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्रदूषण का सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है। यही कारण है कि इससे बचाव को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी जाती है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण आपकी हड्डियों से लेकर ब्रेन हेल्थ तक पर असर हो सकता है? प्रदूषण के कारण सांस लेने में दिक्कतों और गले में खराश से लेकर हृदय की समस्याओं और कई प्रकार के कैंसर तक का जोखिम बढ़ जाता है।
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिल्ली-एनसीआर सहित जिन राज्यों में प्रदूषण का स्तर लगातार ज्यादा रहता है वहां सभी लोगों को अपनी सेहत को लेकर सावधानी बरतते रहना चाहिए। प्रदूषण के दिनों में बाहरी शारीरिक गतिविधियों को भी कम करना जरूरी है, आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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सांस और फेफड़ों की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
प्रदूषण के दिनों में बाहरी गतिविधियों पर दें ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ सांस की बीमारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारी रोजमर्रा की फिटनेस पर भी असर डाल रहा है। खासकर सुबह पार्क में दौड़ने, वॉक करने, साइकिल चलाने या खुले में योग करने वालों को इन दिनों विशेष सावधान रहने की जरूरत है। 
 
  • अक्सर माना जाता रहा है कि सुबह की ताजी हवा सेहत के लिए अच्छी होती है, लेकिन प्रदूषण ज्यादा होने पर यही हवा शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है। 
  • हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम10 जैसे बारीक कण सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। एक्सरसाइज के दौरान सांस तेज चलती है और ज्यादा हवा फेफड़ों तक पहुंचती है। ऐसे में प्रदूषण के के दिनों में बाहरी गतिविधियों को लेकर अलर्ट रहना चाहिए।
  • बाहर में शारीरिक गतिविधियां न करने का मतलब ये नहीं है कि आप अपनी फिटनेस छोड़ दें। जरूरत है सही समय, सही जगह और सुरक्षित तरीके से एक्सरसाइज करें।
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प्रदूषण और इससे होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
एयर क्वालिटी इंडेक्स का रखें ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्रदूषण के दिनों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। अगर आपके क्षेत्र में एक्यूआई लगातार खराब स्तर का रहता है तो ज्यादा बाहर जाने और बाहरी गतिविधियों को कम करें। अब सवाल ये है कि कैसे समझा जाए तो कितना एक्यूआई लेवल आपके लिए नुकसानदायक है और कब अलर्ट हो जाना चाहिए।

बाहर की गतिविधियां करते समय अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) जरूर देखें। इससे पता चलता है कि हवा की गुणवत्ता कैसी है और प्रदूषण का स्तर कितना है? अगर एक्यूआई खराब या उससे ऊपर है, तो  बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा की बीमारी से जूझ रहे लोगों को बाहर भारी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए। 
  • 0-50 एक्यूआई : अच्छा
  • 51-100 एक्यूआई: संतोषजनक
  • 101-200 एक्यूआई: मध्यम
  • 201-300 एक्यूआई: खराब श्रेणी
  • 301-400: बहुत खराब
  • 401-500: गंभीर
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प्रदूषण के दौरान शारीरिक गतिविधियां - फोटो : adobe stock images
खराब एक्यूआई में बाहर की गतिविधिया करने से क्या होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, खराब एक्यूआई में बाहर की गतिविधियां और व्यायाम कई प्रकार से सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
  • व्यायाम के दौरान हमारा 'मिनट वेंटिलेशन' (प्रति मिनट सांस के जरिए अंदर ली जाने वाली हवा की मात्रा) में काफी वृद्धि हो जाती है। इससे आपके शरीर में जाने वाले बारीक कणों (पार्टिकुलेट मैटर), ओजोन और विषाक्त पदार्थों की कुल मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। 
  • व्यायाम करते समय, हम स्वाभाविक रूप से नाक की जगह मुंह से सांस लेने लगते हैं। आपकी नाक एक प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करती है; इसलिए, मुंह से सांस लेने पर हानिकारक कण नाक की सुरक्षा प्रणाली को पार करके फेफड़ों के नाजुक ऊतकों (टिश्यू) में गहराई तक चले जाते हैं। 
  • व्यायाम से शरीर में प्राकृतिक रूप से सूजन कम करने वाले (एंटी-इन्फ्लेमेटरी) संकेत मिलते हैं, लेकिन वायु प्रदूषण बहुत अधिक होने पर शरीर में गंभीर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा हो सकती है। 
  • प्रदूषक तत्व आराम की स्थिति में और व्यायाम के दौरान आपका हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ा देते हैं। आपके फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है और शरीर में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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