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Air Pollution: 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गई है दिल्ली की हवा, जानिए बच्चों की सेहत के लिए ये कितना खतरनाक

Tue, 22 Oct 2024 01:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वायु प्रदूषण - फोटो : Amarujala.com
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता समय के साथ खराब होती जा रही है, दीपावली से पहले ही हवा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को प्रदूषण से बचाव करते रहने की सलाह देते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण फेफड़े-श्वसन संबंधी बीमारियों के साथ मस्तिष्क से संबंधित कई तरह की दिक्कतों को खतरा हो सकता है। मंगलावर को दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी दर्ज की गई है।

खबरों के मुताबिक दिल्ली और आस-पास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता मंगलवार को लगातार दूसरे दिन 'बहुत खराब' श्रेणी में दर्ज की गई है, सुबह 8 बजे के आसपास एक्यूआई 317 रही। आनंद विहार इलाके में प्रदूषण का स्तर और भी खराब रहा, यहां की एक्यूआई 378 दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस स्तर के प्रदूषण का नकारात्मक असर संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। विशेषतौर पर बच्चों की सेहत के लिए प्रदूषित हवा काफी चिंताजनक हो सकती है। इतना ही नहीं इसका गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी असर हो सकता है।
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वायु प्रदूषण के नुकसान - फोटो : Adobe stock
बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है बढ़ता प्रदूषण

यूरोपियन एनवायरमेंट एजेंसी (ईईए) की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों और किशोरों के लिए वायु प्रदूषण उसी तरह से खतरनाक माना जाता है जैसा कि वयस्कों के लिए। इतना ही नहीं जो बच्चे गर्भावस्था के दौरान वायु प्रदूषण के संपर्क में आ जाते हैं, उनमें भी कई प्रकार की स्वास्थ्य जटिलताओं के विकसित होने का खतरा रहता है। 

बच्चे वायु प्रदूषण के प्रति विशेषरूप से संवेदनशील होते हैं। ईईए के विशेषज्ञों का मानना है कि हर साल वायु प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं के चलते 18 वर्ष से कम आयु के 1,200 से अधिक लोगों की मृत्यु हो जाती है। 
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बच्चों के लिए खतरनाक है प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
वायु प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं

वायु प्रदूषण बच्चों और किशोरों में कम वजन, अस्थमा, फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी, श्वसन संक्रमण और एलर्जी जैसी समस्याओं का कारण बनता है। इसके साथ वयस्कों में यह क्रोनिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ाने वाला माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं बच्चों की सांस लेने की दर वयस्कों की तुलना में अधिक होती है और वे शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम अधिक हवा भी लेते हैं। हवा के माध्यम से प्रदूषकों के शरीर में प्रवेश के कारण स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने का अधिक जोखिम देखा जाता रहा है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 90% से ज़्यादा बच्चे हर रोज जहरीली हवा में सांस लेते हैं, ये भविष्य में कई प्रकार की बीमारियों के बोझ को बढ़ाने वाला हो सकता है।

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प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
भ्रूण और नवजात की सेहत पर असर

अध्ययनों से पता चलता है कि वायु प्रदूषण के कारण नवजात शिशुओं में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं वायु प्रदूषण के कारण जन्म के समय कम वजन और यहां तक कि समय से पहले जन्म का खतरा भी बढ़ाने वाला हो सकता है। कुछ अध्ययन बताते हैं कि जिन स्थानों पर वायु प्रदूषण का जोखिम अधिक होता है वहां पर जन्म के समय बच्चों की मृत्यु और सडेन इंन्फेंट डेथ सिंड्रोम (एसआईडीएस) का खतरा अधिक देखा जाता है। प्रदूषण बच्चों के विकास को भी प्रभावित करने वाली समस्या मानी जाती है।
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बच्चों के लिए प्रदूषण के नुकसान - फोटो : Freepik.com
सेहत पर हो सकते हैं इसके कई दुष्प्रभाव

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक वायु प्रदूषण से बच्चों के स्वास्थ्य पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। ये श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया और अन्य श्वसन संक्रमण को भी बढ़ाने वाली समस्या हो सकती है। बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता और तंत्रिका विकास पर भी वायु प्रदूषण का असर देखा जाता रहा है। कुछ शोध ये भी बताते हैं कि बच्चों में बढ़ते कुछ प्रकार के कैंसर के लिए भी बढ़ता प्रदूषण एक कारक हो सकता है।

वायु प्रदूषण के कारण फौरी तौर पर बच्चों में  सिरदर्द, थकान, आंखों में सूखापन, एलर्जी और कई तरह की श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।



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स्रोत और संदर्भ
More than 90% of the world’s children breathe toxic air every day

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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