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Air Pollution: मूड स्विंग से लेकर स्ट्रेस-चिड़चिड़ापन तक, आपके मूड को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है प्रदूषण

Mon, 06 Nov 2023 06:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वायु प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Pixabay/Pearvideo.com
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पिछले एक सप्ताह से वायु प्रदूषण का स्तर काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। सोमवार सुबह यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 436 दर्ज किया गया, यह प्रदूषण का 'सीवियर' स्तर माना जाता है। हवा की इस तरह की गुणवत्ता सेहत के लिए कई प्रकार से गंभीर समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।

वायु प्रदूषण को सबसे ज्यादा फेफड़ों-श्वसन समस्याओं का कारक माना जाता रहा है, हालिया अध्ययन में इसके कारण डायबिटीज की बढ़ती समस्याओं को लेकर भी अलर्ट किया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बढ़ते प्रदूषण के दुष्प्रभाव यहीं तक सीमित नहीं हैं, प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना आपको मूड को भी गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला हो सकता है। प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना, मूड स्विंग, स्ट्रेस और चिड़चिड़ापन से लेकर डिप्रेशन की जटिलताओं को भी बढ़ाने वाला हो सकता है। आइए जानते हैं कि प्रदूषण का हमारे मूड पर किस प्रकार से नकारात्मक असर देखा जाता है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
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प्रदूषण के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर असर - फोटो : Pixabay
वायु प्रदूषण का मानसिक स्वास्थ्य पर असर

अमेरिकन साइकेट्रिक एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण सेहत पर होने वाले दुष्प्रभावों को जानने के लिए किए गए अध्ययन में पाया गया कि यह आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। अध्ययनों में प्रदूषित हवा को स्ट्रेस-एंग्जाइटी को ट्रिगर करने के साथ डिमेंशिया-अल्जाइमर रोग और अवसाद के जोखिमों को भी बढ़ाने वाला पाया गया है। इसके अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : istock
ट्रिगर हो सकती है स्ट्रेस और एंग्जाइटी

प्रदूषित हवा में रहना कुछ समय के लिए आपमें स्ट्रेस और एंग्जाइटी की समस्या को बढ़ाने वाला हो सकता है। यदि आप पहले से ही इस तरह की समस्याओं के शिकार रहे हैं तो वायु प्रदूषण के संपर्क के कारण ये दिक्कतें ट्रिगर भी हो सकती हैं।

अध्ययनकर्ता बताते हैं, जब हम लगातार प्रदूषक तत्वों और दूषित हवा के संपर्क में रहते हैं तो इस दौरान स्ट्रेस हार्मोन का रिलीज बढ़ने लगता है, जिसका हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। 

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मूड विकारों की समस्याएं - फोटो : istock
मूड स्विंग से लेकर अवसाद का खतरा

अनुसंधानों में वायु प्रदूषण को मूड संबंधी विकारों और अवसाद के बढ़ते जोखिमों से संबंधित पाया है । प्रदूषकों के कारण मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है, जो मूड और संज्ञानात्मक कार्यों में भी नकारात्मक बदलाव कर सकती है। लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहना आपमें बार-बार मूड स्विंग का समस्या के साथ अवसाद के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। 

डिप्रेशन के रोगियों के लिए वायु प्रदूषण गंभीर समस्याकारक स्थिति मानी जाती है।
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पीएम2.5 का मस्तिष्क पर असर - फोटो : istock
न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों का भी खतरा

प्रदूषण, विशेष रूप से सूक्ष्म कण पदार्थ (पीएम2.5) के संपर्क में आने से दीर्घकालिक रूप से मनोभ्रंश और अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों का जोखिम बढ़ जाता है। ये स्थिति डिमेंशिया के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली मानी जाती है। प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना मस्तिष्क की समस्या को ट्रिगर करने वाला हो सकता है। वायु प्रदूषण से बचाव करते रहना सभी के लिए आवश्यक है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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