राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पिछले एक सप्ताह से वायु प्रदूषण का स्तर काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। सोमवार सुबह यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 436 दर्ज किया गया, यह प्रदूषण का 'सीवियर' स्तर माना जाता है। हवा की इस तरह की गुणवत्ता सेहत के लिए कई प्रकार से गंभीर समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।
वायु प्रदूषण को सबसे ज्यादा फेफड़ों-श्वसन समस्याओं का कारक माना जाता रहा है, हालिया अध्ययन में
इसके कारण डायबिटीज की बढ़ती समस्याओं को लेकर भी अलर्ट किया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बढ़ते प्रदूषण के दुष्प्रभाव यहीं तक सीमित नहीं हैं, प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना आपको मूड को भी गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला हो सकता है। प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना, मूड स्विंग, स्ट्रेस और चिड़चिड़ापन से लेकर डिप्रेशन की जटिलताओं को भी बढ़ाने वाला हो सकता है। आइए जानते हैं कि प्रदूषण का हमारे मूड पर किस प्रकार से नकारात्मक असर देखा जाता है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।