फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोविशील्ड या कोवाक्सिन: कोरोना की कौन सी वैक्सीन ज्यादा बेहतर? जानिए खासियत और साइड-इफेक्ट्स

Fri, 30 Jul 2021 01:57 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
कोवाक्सिन और कोविशील्ड - फोटो : PTI/twitter@seruminstitute
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)  


भारत में जल्द ही अब 18 साल से कम उम्र के बच्चों को भी कोरोना की वैक्सीन लगनी शुरू हो सकती है। जायडस कैडिला ने ट्रायल से संबंधित डेटा ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीसीजीआई के पास भेज दिया है। अब डीसीजीआई इसके आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी पर फैसला लेगी। अगर इस वैक्सीन को मंजूरी मिल जाती है तो यह भारत में इस्तेमाल होने वाली चौथी वैक्सीन होगी। फिलहाल देश में जिन तीन वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है, उनमें कोविशील्ड, कोवाक्सिन और स्पूतनिक-वी शामिल हैं। सबसे पहले कोविशील्ड और कोवाक्सिन को मंजूरी मिली थी। ऐसे में आइए एक बार फिर विशेषज्ञ से जानते हैं कि इन दोनों में से कौन सी कोरोना वैक्सीन सबसे बेहतर है, इन दोनों में अंतर क्या है, इनकी प्रभावकारिता क्या है और इनके साइड-इफेक्ट्स क्या-क्या हैं? 
विज्ञापन

2 of 6
कोविशील्ड - फोटो : twitter@serum institute
कोविशील्ड वैक्सीन की क्या खासियत है? 
  • इस वैक्सीन का विकास चिंपाजी में सर्दी पैदा करने वाले सामान्य वायरस (एडेनोवायरस) के कमजोर संस्करण से किया गया है। हालांकि जब शरीर में इंजेक्शन के जरिये डाला जाता है तो यह बीमारी पैदा नहीं करता, बल्कि प्रतिरक्षा तंत्र को कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रेरित करता है। 
विज्ञापन

3 of 6
कोवैक्सीन - फोटो : पीटीआई
कोवाक्सिन की क्या खासियत है? 
  • कोवाक्सिन इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है, जिसे बीमारी पैदा करने वाले वायरस को निष्क्रिय करके बनाया गया है, यानी इससे संक्रमण नहीं हो सकता। जब इस वैक्सीन को इंजेक्शन के जरिये शरीर में डाला जाता है तो यह प्रतिरक्षा तंत्र को तैयार करता है कि वह असली वायरस को पहचाने और संक्रमण होने पर उससे लड़कर उसे खत्म करे। 

4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोविशील्ड और कोवाक्सिन की प्रभावकारिता क्या हैं? 
  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुताबिक, कोविशील्ड की प्रभावकारिता 70 फीसदी है, जिसे दूसरी डोज लेने के साथ 90 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं, कोवैक्सीन की प्रभावकारिता कोविशील्ड से थोड़ी ज्यादा यानी 78 फीसदी है। कोरोना के नए वैरिएंट्स पर भी इन दोनों वैक्सीन को प्रभावी बताया गया है।  
विज्ञापन

5 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
कोवाक्सिन से ज्यादा कोविशील्ड में बनी है एंटीबॉडी
  • जून महीने में मेडरिक्सिव नामक प्री-प्रिंट पत्रिका में एक स्टडी प्रकाशित हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि कोवाक्सिन का टीका लेने वाले लोगों की तुलना में कोविशील्ड का टीका लेने वालों में एंटीबॉडी का स्तर अधिक था। दो समूहों में बांटे गए कुल 515 स्वास्थ्य कर्मचारियों पर किए गए अध्ययन के दौरान यह पाया गया था कि दोनों ही समूह में 95 फीसदी तक कर्मचारियों में एंटीबॉडी विकसित हुईं और कोविशील्ड लेने वालों में यह दर 98 और कोवाक्सिन लेने वालों में 80 फीसदी थी। विशेषज्ञ कहते हैं कि भले ही इन दोनों वैक्सीन से एंटीबॉडी बनने का स्तर अलग-अलग हो, लेकिन दोनों ही प्रभावी वैक्सीन हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दोनों वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स क्या हैं? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि कोविशील्ड और कोवाक्सिन, दोनों के ही साइड-इफेक्ट्स लगभग एक जैसे हैं। इन साइड-इफेक्ट्स में इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द और सूजन, हल्का बुखार, सिरदर्द, हाथ-पैर में दर्द जैसी समस्याएं शामिल हैं। हालांकि इन साइड-इफेक्ट्स से घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। ये समस्याएं 1-2 दिन रहती हैं और अपने आप चली जाती हैं, लेकिन अगर ज्यादा दिक्कत होती है तो डॉक्टर से मिल कर दवाइयां ले लें। 
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें