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मुद्दा: क्या कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज में लंबे अंतराल के नहीं हैं कोई फायदे? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

Fri, 20 Aug 2021 07:55 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन शॉट (फाइल फोटो) - फोटो : Social media
कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में फिलहाल 53.61 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है। वैक्सीन की प्रभाविकता को बढ़ाने के लिए समय-समय पर नियमों में आवश्यक बदलाव किया जाता रहा है। टीकाकरण को लेकर बनाए गए सरकारी पैनल के सुझावों के आधार पर मई माह में केंद्र सरकार ने कोवीशील्ड वैक्सीन के दो डोज के अंतराल को छह से आठ हफ्तों से बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया गया था। विशेषज्ञों का कहना था कि डोज के अंतराल को बढ़ाकर वैक्सीन की प्रभाविकता में भी इजाफा किया जा सकता है। हालांकि अब इस बदलाव को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। 
हाल ही में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के संस्थापक साइरस पूनावाला कोविशील्ड वैक्सीन के दो डोज के अंतराल को बढ़ाने पर सवालिया निशान लगाए हैं। पूनावाला ने कहा कि मुझे लगता है कि वैक्सीन के दो खुराक के बीच का अंतराल दो माह से अधिक का नहीं होना चाहिए, हालांकि संभवत: केंद्र सरकार ने खुराक की कमी के कारण इसे तीन महीने तक बढ़ा दिया।
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कोविशील्ड वैक्सीनेशन की डोज में है लंबा अतराल - फोटो : PTI
कोविशील्ड की दो डोज में अंतराल
गौरतलब है कि टीकाकरण को लेकर बनाए गए सरकारी पैनल राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) ने कोवीशील्ड वैक्सीनेशन की डोज के अंतराल को बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने का सुझाव दिया था, जिसे 13 मई को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया था। इससे पहले कोविशील्ड वैक्सीन के दो डोज में अंतराल छह से आठ हफ्तों का था।
इस निर्णय को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला भी प्रभावकारिता और प्रतिरक्षात्मकता, दोनों ही दृष्टिकोणों से फायदेमंद बताया था। इसके अलावा तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन इस फैसले को बेहतर बताया था। हालांकि अब एसआईआई के संस्थापक इसे महज खुराक की कमी के कारण लिया गया फैसला बता रहे हैं। 
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तीसरी खुराक की पड़ेगा आवश्यकता - फोटो : पीटीआई
तीसरी डोज की आवश्यता
एसआईआई के संस्थापक कहते हैं, वैक्सीन की दो डोज को ही कोरोना से मुकाबले के लिए काफी नहीं माना जा सकता है। सामान्यतौर पर छह महीने के बाद शरीर में एंटीबॉडीज कम हो जाती हैं, ऐसे में तीसरी खुराक की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैंने और कंपनी के सात से आठ हजार कर्मचारियों ने वैक्सीन की बूस्टर डोज ले ली है। जिन लोगों ने वैक्सीन की दो डीज ले लीं हैं, उन्हें बूस्टर डोज की रूप में तीसरी खुराक भी ले लेनी चाहिए। संक्रमण से पूर्ण सुरक्षा के लिए यह जरूरी माना जा रहा है।

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वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत - फोटो : पीटीआई
क्या साल के अंत तक सभी वयस्कों का हो सकता है टीकाकरण?
गौरतलब है कि सरकार ने इस साल के अंत तक देश के 18 से ऊपर के सभी लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा है, हालांकि इस लक्ष्य को लेकर एसआईआई के संस्थापक ने संदेह जताया है। पूनावाला कहते हैं, यह लक्ष्य कैसे पूरा किया जाएगा इसपर मुझे संदेह है। एक महीने में 10 करोड़ खुराक का उत्पादन करना आसान काम नहीं है। भारत बड़ा देश है, सरकार का यह लक्ष्य कैसे पूरा होगा, यह बड़ा सवाल है।
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मिक्स एंड मैच वैक्सीनेशन के क्या लाभ हैं? - फोटो : iStock
वैक्सीन कॉकटेल को बताया बैड आइडिया
साइरस पूनावाला ने वैक्सीन के मिक्स-एंड-मैच को लेकर अस्वीकृति व्यक्त करते हुए इसे बैड आइडिया करार दिया है। साइरस पूनावाला का कहना है कि वैक्सीन कॉकटेल की प्रभाविकता को लेकर फिलहाल ज्यादा साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में मैं इसका समर्थन नहीं करता हूं। पूनावाला कहते हैं, अगर कॉकटेल वैक्सीनेशन के बाद किसी के साथ कुछ गलत होता है तो दो वैक्सीन निर्माताओं के बीच एक दूसरे के टीके में दोष खोजने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो सकती है। ऐसे में किसी भी नजरिए से मिक्स-एंड-मैच वैक्सीन के आइडिया को फायदेमंद नहीं माना जा सकता है। 


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नोट: यह लेख सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के संस्थापक साइरस पूनावाला के हालिया बयान के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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