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Covid-19: इस राज्य में 24 घंटे में 200% से अधिक बढ़े केस, JN.1 वैरिएंट को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

Sun, 24 Dec 2023 12:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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देश में कोरोना संक्रमण के मामले - फोटो : iStock
भारत सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण की रफ्तार पिछले कुछ हफ्तों में तेजी से बढ़ती हुई रिपोर्ट की जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि पिछले चार हफ्तों के दौरान नए कोविड-19 के मामलों में 52 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जोकि चिंताजनक है। कई देशों में इसके कारण अस्पतालों में रोगियों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। भारत में कोरोना ने पिछले आठ महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक शनिवार को भी देश में कोरोना के मामलों में इजाफा जारी रहा। कई राज्यों में संक्रमण के मामलों में पिछले एक सप्ताह के भीतर तेजी से उछाल दर्ज किया गया है। देश में एक्टिव मामलों की संख्या भी 3700 के आंकड़े को पार कर गई है।

कोरोना के तेजी से बढ़ते केस के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुख्यरूप से ओमिक्रॉन के नए सब-वैरिएंट JN.1 को प्रमुख कारण मान रहे हैं। क्या जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है उनमें भी संक्रमण का खतरा हो सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं।
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कोरोना का नया वैरिएंट JN.1 (सांकेतिक) - फोटो : istock
इन राज्यों में तेजी से बढ़े संक्रमण के मामले

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के कई राज्यों में कोरोना के मामले पिछले दिनों बढ़े हैं। केरल और कर्नाटक सबसे ज्यादा प्रभावित प्रदेश हैं। कर्नाटक में शुक्रवार को 78 नए मामले सामने आए जो एक दिन पहले के 24 केस के हिसाब से 225 प्रतिशत अधिक है।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, राहत की खबर ये है कि देश में अब भी कोरोना की रिकवरी रेट काफी अच्छी (98.81 फीसदी) है, जिसका मतलब है कि लोग भले ही संक्रमित हो रहे हैं पर आसानी से ठीक भी हो रहे हैं।
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भारत में कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

कोरोना के बढ़ते खतरे को लेकर मेदांता में चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, नया कोविड वैरिएंट JN.1 प्रमुख रूप में उभर रहा है लेकिन अस्पताल में भर्ती होने या मौतों की संख्या में वृद्धि ज्यादा नहीं है, इसे माइल्ड वैरिएंट कहा जा सकता है। इस वैरिएंट के कारण संक्रमण तेजी से फैल रहा है क्योंकि यह अधिक संक्रामक है और इसमें प्रतिरक्षा से बचाव वाले तंत्र हैं।

वहीं,  इंडियन SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम' (INSACOG) के चेयरमैन डॉ. एनके अरोड़ा कहते हैं, कोरोना से घबराने की नहीं हमें सतर्क रहने की जरूरत है। JN.1 के लक्षण पिछले वैरिएंट्स से बहुत समान हैं। इसके कारण लोगों में गंभीर रोग विकसित होने का खतरा भी कम ही है।

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कोरोना का टीकाकरण - फोटो : पिक्साबे
क्या नए वैरिएंट पर असरदार है वैक्सीन?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना की वैक्सीन इस नए वैरिएंट के खतरे से भी सुरक्षित रखने में मददगार है। बूस्टर खुराक कमजोर इम्युनिटी वाले रोगियों को समय के साथ प्रतिरक्षा बनाए रखने में मदद कर सकती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 95 प्रतिशत नागरिकों को कोविड-19 वैक्सीन की पहली दो खुराकें मिल चुकी हैं। लगभग एक चौथाई को तीसरी या बूस्टर खुराक मिल चुकी है। डॉक्टर कहते हैं, तीनों डोज ले चुके लोगों में इस नए वैरिएंट के कारण ज्यादा खतरा नहीं देखा जा रहा है, हालांकि बचाव के उपाय करते रहना सभी के लिए आवश्यक है।
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कोविड के टीके - फोटो : istock
JN.1 के लिए खास टीके लाने की तैयारी

कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच, पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जल्द ही भारत में JN.1 वैरिएंट के खिलाफ टीके लाने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी, वैक्सीन के लाइसेंस के लिए आवेदन करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट में कंपनी के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है कि वैक्सीन की प्रभाविकता की रिपोर्ट नियामकों को सौंपे जाने के बाद दस्तावेजों को जनता के साथ साझा किया जाएगा। 



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स्रोत और संदर्भ
Are COVID-19 symptoms still the same?

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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