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Covid-19: दिल्ली में कोरोना की दस्तक, मई के बाद पहली बार संक्रमण में उछाल, गर्म मौसम में क्यों बढ़ रहे केस?

Fri, 08 Mar 2024 12:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : istock
चार साल बीत जाने के बाद कोरोना अब भी वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। समय-समय पर इसके मामलों में इजाफा देखा जाता रहा है। नवंबर-दिसंबर 2023 के बाद कोरोना की रफ्तार नियंत्रित नजर आ रही थी, हालांकि हालिया रिपोर्ट्स में एक बार फिर से संक्रमण बढ़ने की खबर है।

पिछले दो दिनों से संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी रिपोर्ट की जा रही है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मई 2023 के बाद पहली बार एक दिन में संक्रमण के मामलों में उछाल दर्ज की गई है। गुरुवार की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में कोरोना के 63 नए मामले सामने आए हैं।

दिल्ली के साथ-साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित अन्य उत्तरी राज्यों में भी संक्रमण के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है।  पिछले 15 दिनों में दिल्ली में कोविड-19 के 459 मामले दर्ज किए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में भी संक्रमण में उछाल आया है, पिछले दिनों मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी कोरोना से संक्रमित पाए गए थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को कोरोना से बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है। 
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कोरोना का खतरा - फोटो : pixabay
बढ़ते संक्रमण को लेकर अलर्ट

विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में उतार-चढ़ाव और नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर के कारण फिर से कोरोना के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। कोरोना को लेकर हाल में हुए अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा था, वायरस खुद को जीवित रखने के लिए लगातार म्यूटेट हो रहा है, ऐसे में भविष्य में और नए वैरिएंट्स आने और इसके संक्रमितों की संख्या में उछाल का खतरा हो सकता है।

भले ही आपका वैक्सीनेशन हो गया है, फिर भी कोरोना से बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है।
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कोरोना संक्रमण का जोखिम - फोटो : pixabay
ओमिक्रॉन का JN.1 वैरिएंट प्रमुख कारण 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के नए म्यूटेंट पहले की तुलना में अधिक संक्रामक हो सकते हैं और इसके कारण संक्रमण के मामलों में वृद्धि की भी आशंका है। फिलहाल पिछले एक साल में कोरोना के मामलों में उछाल के लिए मुख्यरूप से ओमिक्रॉन के JN.1 वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जाता रहा है। इस वैरिएंट की संक्रामकता दर अधिक देखी जाती रही है पर ये गंभीर रोगों का कारण नहीं बन रहा है।

हालांकि बड़ा सवाल ये है कि उत्तर भारत में अब गर्मियों की शुरुआत हो रही है, अधिक तापमान वाले माहौल में संक्रमण के उछाल का क्या कारण हो सकता है?

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कोरोना का खतरा - फोटो : Pixabay
तापमान और कोरोना का संबंध

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अब तक मौसम और कोरोना के संबंधों को लेकर कई अध्ययन हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि तापमान में गिरावट की स्थिति अन्य वैरिएंट्स की तरह कोरोना में भी वृद्धि को बढ़ाने वाली हो सकती है, पर पिछले चार साल के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि कोरोना का तापमान से स्पष्ट संबंध नहीं है। गर्मियों में पहले भी संक्रमण में उछाल देखा जाता रहा है। शोधकर्ता कहते हैं, कोरोना हम सभी के बीच बना हुआ है।

समय-समय पर ये कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में संक्रमण का कारण बनता रहता है और उनसे अन्य लोगों को भी संक्रमण हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि कोरोना से बचाव के उपायों को लेकर हम हमेशा अलर्ट रहें।
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कोरोना और इसके जोखिम कारक - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना की टेस्टिंग रेट भी पिछले दिनों लो रही है। कम परीक्षण दर से पता चलता है कि मामलों की वास्तविक संख्या कहीं अधिक हो सकती है। भारत में पिछले चार से साल में विभिन्न वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामले देखे गए हैं।

कोरोना के खतरों को देखते हुए सभी लोगों को निरंतर कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना चाहिए। मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना न सिर्फ आपको कोरोना से बचा सकता है साथ ही इससे फ्लू जैसे अन्य रोगों का भी जोखिम कम होता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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