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International Women's Day: महिलाओं में इन चार बीमारियों का जोखिम होता है अधिक, इनमें से दो हो सकती हैं जानलेवा

Thu, 07 Mar 2024 09:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महिलाओं की स्वास्थ्य समस्या - फोटो : iStock
तमाम मीडिया रिपोर्ट्स भारतीय महिलाओं में स्वास्थ्य देखभाल की महत्वपूर्ण चुनौतियों को लेकर अलर्ट करते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारतीय महिलाओं में कई प्रकार की बीमारियों का खतरा देखा जाता रहा है। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी को इनका प्रमुख कारक माना जाता रहा है। कई रिपोर्ट्स बताते हैं, खासकर ग्रामीण भारतीय महिलाओं को आहार से शरीर के लिए जरूरी पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं, जो उनमें कुपोषण और एनीमिया के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।

हर साल 8 मार्च को महिला अधिकारों, समानता और महिलाओं के खिलाफ हिंसा-दुर्व्यवहार जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने, महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, भारतीय महिलाओं में कुछ बीमारियों का जोखिम अधिक हो सकता है, जिनको लेकर कम उम्र से ही अलर्ट रहना और बचाव करते रहना जरूरी हो जाता है।
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महिलाओं में हार्ट की समस्या - फोटो : iStock
हृदय रोग और इसकी गंभीरता का खतरा

हृदय रोग, दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारकों में से एक है, भारतीय महिलाओं में भी इसका जोखिम देखा जाता रहा है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि हृदय रोग पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अलग तरह से भी प्रभावित करते हैं। महिलाओं में गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, गर्भकालीन मधुमेह और गर्भावस्था की अन्य जटिलताएं भी बाद में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।
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आर्थराइटिस के जोखिम कारक - फोटो : istock
हड्डियों की बीमारी

महिलाओं में पोषण की कमी और लाइफस्टाइल से संबंधित समस्याओं के कारण हड्डियों से संबंधित दिक्कतें भी बढ़ती हुई देखी जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र की महिलाएं भी हड्डियों में दर्द और कमजोरी की शिकार देखी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं महिलाओं में पुरुषों की तुलना में हड्डियों के घनत्व में तेजी से कमी आने की जोखिम रहता है। विशेषतौर पर मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन के स्तर में कमी के कारण हड्डियों में पतलापन, इसकी संरचना की दिक्कत और ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम काफी बढ़ जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस से हड्डियों में फ्रैक्चर होने और गंभीर जोड़ों के दर्द का खतरा भी बढ़ सकता है।

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मूत्र पथ का संक्रमण - फोटो : Pixabay
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की हो सकती हैं शिकार

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) भी महिलाओं की सेहत के लिए बड़ी चुनौती रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 90 फीसदी महिलाओं को कभी न कभी यूटीआई होने का खतरा रहता है। बैक्टीरियल संक्रमण को यूटीआई का सबसे आम कारण माना जाता है। महिलाओं की शारीरिक संरचना उन्हें यूटीआई से संक्रमित होने के लिए और जोखिम कारक बनी देती है। यूटीआई पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इससे किडनी में क्षति का भी जोखिम रहता है।
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स्तन कैंसर के जोखिम को कैसे कम करें? - फोटो : istock
ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर का जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के जोखिम अधिक देखे जाते रहे हैं। सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स में होने वाला कैंसर है जो मृत्यु के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीनेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ये टीके इस कैंसर के कारक एचपीवी वायरस के प्रसार और इसके कारण होने वाले जोखिमों से बचाने में मददगार हो सकते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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