फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus Vaccine: कोरोना की किस वैक्सीन को भारत में जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद और क्यों? जानिए सबकुछ

Thu, 31 Dec 2020 12:19 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
भारत में कोरोना वैक्सीन - फोटो : Pixabay/Amarujala
ब्रिटेन ने बुधवार को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दे दी, जिसके बाद भारत में भी इस वैक्सीन को मंजूरी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। भारत का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इस वैक्सीन (कोविशील्ड) का उत्पादन कर रहा है और उसने शुरू में ही 50 फीसदी वैक्सीन भारत को देने का वादा किया था। ब्रिटेन पहला देश है जिसने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दी है। उम्मीद की जा रही है कि ब्रिटेन की सरकार के इस निर्णय के बाद भारतीय दवा नियामक भी इस पर कोई निर्णय ले सकता है। 
विज्ञापन

2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • द टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) ने इस संबंध में बुधवार को एक बैठक की। इस बैठक में कमेटी के सदस्यों ने वैक्सीन से संबंधित कुछ और डेटा मांगा है, जिसकी वजह से इस वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिलने में कुछ और वक्त लग सकता है। 
विज्ञापन

3 of 6
Covishield, Vaccine - फोटो : Twitter@AdarPoonawala
  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को यह डेटा उपलब्ध कराना है जिसके जरिए कमेटी इस बात की समीक्षा करेगी कि वैक्सीन कितनी कारगर और सुरक्षित है। एसईसी की अगली बैठक शुक्रवार (एक जनवरी) को होने वाली है और यह उम्मीद की जा रही है कि जनवरी के शुरुआती हफ्तों में ही इस वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिल सकती है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की इस वैक्सीन को 'वैक्सीन फॉर द वर्ल्ड' भी कहा जा रहा है, क्योंकि यह सस्ती है और इस वैक्सीन की देखरेख, फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन की तुलना में आसान है। 

4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
  • ब्रिटेन ने दो दिसंबर को फाइजर-बायोएनटेक द्वारा विकसित वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। तब ब्रिटेन पहला देश था जिसने किसी कोविड वैक्सीन को मंजूरी दी थी। उसके बाद 18 दिसंबर को अमेरिका ने मॉडर्ना की वैक्सीन को मंजूरी दी। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिलने पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि यह ब्रिटेन के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि है। ब्रिटेन में कोरोना के केस एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं। साथ ही कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर भी दुनियाभर में चिंता बढ़ी है, जिसकी पहचान पहले ब्रिटेन में ही की गई। 
विज्ञापन

5 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिलने के बाद, ब्रिटेन की सरकार ने यह उम्मीद जताई है कि इससे उनके वैक्सीन प्रोग्राम को तेजी मिलेगी। वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने इसे भारत के लिए भी उतनी ही बड़ी खबर बताया है। उन्होंने कहा है कि यह वाकई एक महत्वपूर्ण प्रगति है और उन्हें भारतीय नियामकों से इस वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी मिलने का इंतजार है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
  • गावी और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के बीच हुए समझौते के तहत भारत को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के 100 मिलियन डोज मिलने हैं, लेकिन इस वैक्सीन को अभी मंजूरी मिलने का इंतजार करना होगा। फाइजर-बायोएनटेक और भारत बायोटेक (कोवैक्सिन) भी अपनी वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दिलाने के लिए भारतीय नियामक के समक्ष आवेदन कर चुके हैं। भारत सरकार इन दोनों टीकों के इस्तेमाल को मंजूरी देने पर भी विचार कर रही है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि वो अगले वर्ष जुलाई तक कम से कम 300 मिलियन यानी 30 करोड़ लोगों को कोविड वैक्सीन लगाना चाहती है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें