जानसेन की वैक्सीन इसमें कॉमन कोल्ड वायरस का उपयोग कर रही है, जिसमें अनुवांशिक बदलाव किए गए हैं ताकि यह इंसानी शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाए और मॉलिक्यूलर स्तर पर ये कोरोना वायरस से मिलते जुलते हैं। इसे कोरोना वायरस को पहचानने और उससे लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम को प्रशिक्षित करना चाहिए। इसी तरह, ऑक्सफोर्ड और रूस की वैक्सीन ने भी नुकसान नहीं पहुंचाने वाले वायरस लिए हैं, जिससे चिम्पैंजी संक्रमित होते हैं और इनमें अनुवांशिक बदलाव करके इसे कोरोना वायरस जैसा बनाया गया है, ताकि शरीर पर इसकी प्रतिक्रिया देखने का प्रयास किया जाए।
चीन में बने दो वैक्सीन वास्तविक वायरस का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसमें उसके दुर्बल अवस्था का उपयोग किया गया है, इसलिए इससे कोरोना वायरस संक्रमण नहीं हो सकता है। यहां यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि इनमें से कौन सी वैक्सीन सबसे बेहतरीन नतीजा देगी। लिहाजा, चल रहे परीक्षणों में जो लोग सोच-समझकर इससे संक्रमित हो रहे हैं वो इन सवालों का जवाब देने में मदद कर सकते हैं।