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Coronavirus Vaccine: भारत के लिए कोरोना का कौन सा टीका होगा सबसे अच्छा? वैज्ञानिकों से जानें सबकुछ

Wed, 18 Nov 2020 04:36 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कोरोना वैक्सीन - फोटो : Pixabay/Amarujala
कोरोना की वैक्सीन जल्द से जल्द आ जाए, इसके लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक दिन-रात प्रयास में जुटे हुए हैं। वैसे तो दुनियाभर में कई वैक्सीन बनाए जा रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर भारत के लिए कौन सा टीका सबसे अच्छा होगा, क्योंकि अगर वैक्सीन आ भी जाती है तो यहां उसके भंडारण से लेकर वितरण तक कई चुनौतियां होंगी। इस बीच वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत के लिए वे टीके संभवत: कारगर नहीं होंगे, जिनके भंडारण के लिए बेहद कम तापमान की जरूरत है। उनका कहना है कि प्रोटीन आधारित टीका देश के लिए सबसे उपयुक्त हो सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों ने अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स द्वारा विकसित किए जा रहे संभावित टीके को भारत के लिए सबसे उपयुक्त बताया है और कहा है कि कोविड-19 की सही वैक्सीन खरीदने का फैसला इन बातों पर निर्भर करेगा कि टीका कितना सुरक्षित है, उसकी कीमत क्या है और उसे इस्तेमाल करना कितना सुविधाजनक है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हाल ही में फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन को 90 फीसदी, स्पूतनिक-वी को 92 फीसदी और मॉडर्ना की वैक्सीन को 94.5 फीसदी प्रभावी होने का दावा किया गया है, लेकिन चूंकि ये तीनों ही टीके प्रोटीन आधारित नहीं हैं, ऐसे में थोड़ी मुश्किल हो सकती है। हालांकि फिर भी माना जा रहा है कि भारतीय परिस्थितियों के लिहाज से संभवत: मॉडर्ना की वैक्सीन भी उपयुक्त हो सकती है, क्योंकि इसके भंडारण के लिए अन्य संभावित टीकों की अपेक्षा उतने कम तापमान की जरूरत नहीं है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा के अशोका विश्वविद्यालय में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंसेस के निदेशक और वैज्ञानिक शाहिद जमील का कहना है कि मॉडर्ना की वैक्सीन को 30 दिन तक फ्रिज में रखा जा सकता है और कमरे के तापमान में 12 घंटे तक रखा जा सकता है जबकि फाइजर-बायोएनटेक के टीके के भंडारण के लिए शून्य से 70 डिग्री सेल्सियस कम तापमान की जरूरत है। ऐसे में यह टीका भारत के लिए अनुपयुक्त होगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वहीं दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (एनआईआई) से जुड़े वैज्ञानिक सत्यजीत रथ का कहना है कि रूस की पहली वैक्सीन स्पूतनिक-वी के भंडारण के लिए शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान की जरूरत है। इसलिए भारत को नोवावैक्स या सनोफी के प्रोटीन आधारित संभावित टीके पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर राघवन वरदराजन का भी कुछ ऐसा ही कहना है। उनका भी मानना है कि नोवावैक्स की प्रोटीन आधारित वैक्सीन भारत के लिए अभी तक सबसे उपयुक्त लग रही है। 

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