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विशेषज्ञ से जानें: कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगने पर भी लोग गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं, ऐसा क्यों?

Thu, 27 May 2021 09:49 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में उतार-चढ़ाव लगातार जारी है। पिछले 24 घंटे में दो लाख 11 हजार से अधिक नए कोरोना मरीज मिले हैं और 3,800 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। हालांकि इस बीच थोड़ी राहत की बात ये है कि टीकाकरण अभियान काफी तेजी से चल रहा है। अब तक 20 करोड़ छह लाख से अधिक लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया है, लेकिन इस दौरान यह भी देखने में आया है कि वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने के बाद भी लोग संक्रमित हुए हैं और बीमार पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों है कि कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगने पर भी लोग गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या युवाओं में ज्यादा संक्रमण हो रहा है? 
  • दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'दूसरी लहर में यंगर एज में ज्यादा गंभीर बीमारी देखी गई है, लेकिन अगर प्रतिशत के लिहाज से देखें, तो हायर रिस्क (अधिक जोखिम) में अभी भी कोमोरबिडिटी ग्रुप और जिनकी उम्र ज्यादा है वहीं हैं। चूंकि हमारे यहां केस इतने ज्यादा हो गए हैं, उनमें युवा भी संक्रमित हुए हैं। इसका कारण है कि कई युवाओं को लगा कि उन्हें गंभीर संक्रमण नहीं होगा या वह घर में ही रहकर इलाज कर रहे थे, लक्षण बढ़ने पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इसी लापरवाही से उनमें संक्रमण गंभीर हो गया। इसलिए वायरस को हल्के में न लें, लक्षण बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना की तीसरी लहर में कौन-सा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है? 
  • डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'लहर कब आती है... जब केस कम होते हैं तो लोग समझते हैं कि कोरोना खत्म हो गया और वह लापरवाह हो जाते हैं। पहली लहर में केस कम होने के बाद यही लापरवाही सभी ने की। इसी वजह से केस दोबारा बढ़ते हैं और संक्रमण फिर से पैर पसारने लगता है। इस बार सतर्क रहें। जहां तक तीसरी लहर में बच्चों की बात है, तो अगर पिछले 16 महीने का आंकड़ा देखें तो बच्चे बच के रहे हैं, उनमें गंभीर संक्रमण नहीं हुआ है। गंभीर संक्रमण उन्हें ही हुआ जो कोमोरबिडिटी, मोटापा, कीमोथेरेपी आदि वाले लोग हैं। इसलिए मानते हैं कि आगे भी उनमें कोविड हल्का ही होगा। माना जाता है कि वायरस शरीर में एसेप्टेट के जरिये जाता है, वो बच्चों के नाक और फेफड़ों में कम पाए जाते हैं। इसके अलावा बच्चों के टीकाकरण पर भी ट्रायल हो रहा है, साल के आखिरी क्वार्टर में बच्चों को भी वैक्सीनेट कर पाएंगे।' 

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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगने पर भी लोग गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं, ऐसा क्यों? 
  • डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'जब वैक्सीन की बात करते हैं तो उसकी प्रोटेक्शन (सुरक्षा) 70-80 प्रतिशत है, 100 प्रतिशत नहीं है। ऐसे में कुछ लोग ऐसे होंगे, जिन्हें सुरक्षा नहीं मिलेगी। उनकी बॉडी का इम्यून सिस्टम इतना रिस्पॉन्स नहीं कर पाता है। ऐसे कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर हो सकता है। लेकिन मेजॉरिटी में 80-90 प्रतिशत लोगों में संक्रमण हुआ भी तो ज्यादा गंभीर नहीं होगा। ये भी समझना होगा कि वैक्सीन, बीमारी से सुरक्षा ज्यादा देती है, संक्रमण से कम देती है। अब बीमारी से सुरक्षा का अर्थ है, हमें अस्पताल में जाना जरूरी नहीं होगा, बहुत ज्यादा दवा या वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन कोविड संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर संक्रमण हो सकता है, इस बीच हम दूसरे को भी संक्रमण दे सकते हैं। मगर ऐसे में वैक्सीन हमारा बचाव करेगी।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
लैक्टेटिंग मदर वैक्सीन लगवा सकती हैं? 
  • डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'लैक्टेटिंग मदर यानी दुग्धपान कराने वाली माताएं भी वैक्सीन जरूर लगवाएं। रिसर्च भी दिखाती है कि वैक्सीन से महिला को तो सुरक्षा मिलती ही है और ब्रेस्ट मिल्क के जरिये एंटीबॉडी बच्चे में भी जाती है और उन्हें भी सुरक्षा मिलती है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
बाजार में तरह-तरह के एन 95 मास्क आ रहे हैं, कैसे जानें ओरिजिनल है या नहीं? 
  • डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'अगर मास्क में आईएसआई (ISI) का अप्रूवल होता है तो उसे एन-95 मानते हैं। कई मास्क NIOSH से अप्रूव्ड होते हैं, ये एक एसोसिएशन है जो इसे देखती है। इसके साथ ही एक लॉट नंबर भी होता है, जिससे पता चलता है कि वो निश्चित ही सही मास्क है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
मास्क के गीला होने या बार-बार वही मास्क लगाने से भी म्यूकरमाइकोसिस हो सकता है? 
  • डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'आप कॉटन मास्क लगा रहे हैं तो साफ करके धूप में सुखाकर ही उसका इस्तेमाल करें। इससे म्यूकरमाइकोसिस नहीं होता है। अगर सर्जिकल मास्क इस्तेमाल कर रहे हैं तो एक दिन इस्तेमाल करने के बाद उसे फेंक दें। अगर एन-95 का इस्तेमाल कर रहे हैं और दोबारा इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो चार मास्क रख लें। एक दिन के इस्तेमाल के बाद उसे कागज या लिफाफे में रख दें। दूसरे, तीसरे और चौथे दिन अलग मास्क लगाएं और फिर पांचवें दिन पहले दिन वाला लगाएं। इससे वायरस इतने दिन तक नष्ट हो जाएगा।' 
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