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Coronavirus Vaccine: जिन बुजुर्गों को वैक्सीन अभी तक नहीं लगी है उन्हें कब लगेगी? विशेषज्ञ से जानें सबकुछ

Sun, 07 Mar 2021 10:32 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : pixabay
भारत में कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत अब तक दो करोड़ नौ लाख से अधिक लोगों को कोरोना की वैक्सीन दी जा चुकी है। एक मार्च से शुरू हुए टीकाकरण अभियान के दूसरे चरण में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई नेता भी टीका लगवा चुके हैं और देश के अन्य लोगों से भी टीका लगवाने की अपील की है। देश में पूर्व सैनिकों और सेवारत सैनिकों के परिजनों को टीका लगाने का काम अगले हफ्ते से शुरू होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सुविधा सेना के अस्पतालों में उपलब्ध होगी और स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी मंजूरी भी दे दी है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना वायरस और वैक्सीन से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब... 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
जिन बुजुर्गों को वैक्सीन अभी तक नहीं लगी है उन्हें कब लगेगी? 
  • दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल की डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, '60 साल से ऊपर के बुजुर्गों का टीकाकरण शुरू हो चुका है। इसलिए थोड़ा धैर्य रखें और किसी भी दिन सेंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराएं। इसके बाद दी गई तारीख पर जाकर वैक्सीन लगवा सकते हैं। वैसे किसी को घबराने की जरूरत नहीं है, वैक्सीन केवल कुछ दिन के लिए नहीं है, यह देश के सभी नागरिकों को दी जाएगी। इसलिए आज नहीं तो कल आपको वैक्सीन लग जाएगी। जो बुजुर्ग चल नहीं सकते हैं, सेंटर तक नहीं जा सकते हैं, उनके लिए भी सरकार व्यवस्था कर रही है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
आप कब वुहान गईं और वहां फंसे लोगों को कैसे रेस्क्यू किया गया? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'जब मैं वुहान गई थी, उस वक्त भारत में कोरोना को लेकर इतना डर नहीं था। मैं एक फरवरी को वुहान पहुंची, वहां जो बच्चे थे सभी काफी भयभीत थे। हमें देखते ही बच्चों ने भारत माता की जय और ग्रेट इंडिया के नारे लगाए। ये हमारे लिए गर्व का क्षण था। तब लगा कि इस ऑपरेशन पर आना बहुत सही फैसला है। फ्लाइट में जो भी लोग थे, सभी कोरोना नेगेटिव थे। लेकिन इसमें सरकार द्वारा उठाए गए कदम की तारीफ करनी होगी, वहां उस वक्त स्थिति खराब हो चुकी थी और सरकार ने उन्हें उसी वक्त भारत वापस बुलाने और टेस्ट करवाने का सही निर्णय लिया।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना काल में वुहान से भारतीय छात्रों को लाने में आपकी अहम भूमिका थी, कैसा अनुभव रहा? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'मेरी कोरोना के खिलाफ लड़ाई बाकी लोगों से पहले शुरू हुई थी। पिछले साल जनवरी 2020 की बात है, मैंने अपनी सर्दियों की छुट्टियां बिताने के बाद 27 जनवरी को अस्पताल ज्वाइन किया। उस वक्त चर्चा हो रही थी कि चीन के वुहान में कुछ इस तरह की बीमारी आई है और लॉकडाउन जैसी स्थिति हो रही है। ऐसे में वहां फंसे भारतीय लोगों को वापस लाने के लिए भारत सरकार कुछ विमान भेजेगी। लेकिन तब मैंने नहीं सोचा था कि मैं भी उस टीम का हिस्सा रहूंगी। ज्वाइन करने के बाद मेरे सीनियर ने मुझे जानकारी दी कि मुझे ही जाना है। उस वक्त मेरे दिमाग में कई बातें घूम रही थीं, मेरा दो साल का बच्चा था, पति अमेरिका में थे और मुझे वुहान जाना था। लेकिन पूरे परिवार ने मेरा साथ दिया और मैं अपने दूध पीते बच्चे को छोड़कर वुहान मिशन पर गई। जब मैं वहां गई तो सभी वायुसेना के अधिकारियों ने काफी हौसला बढ़ाया।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
लॉकडाउन में आप वुहान भी गई थीं, जिसके बाद अस्पताल भी जाना हुआ, तब आपने क्या अनुभव किया? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'महिलाओं को इसमें थोड़ी ज्यादा परेशानी हुई, क्योंकि कई लोगों के दूध पीने वाले बच्चे थे। ऐसा नहीं है कि पुरुषों को कोरोना से भय नहीं था, लेकिन एक महिला के लिए कोरोना काल काफी कठिन रहा। बावजूद इसके महिलाओं ने काफी हिम्मत दिखाई। मैं दो हफ्ते तक वुहान में रही, लेकिन मेरे परिवार ने मेरा काफी साथ दिया।' 
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