प्रतीकात्मक तस्वीर
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सर्दियां और प्रदूषण बने चुनौती
लेकिन, भारत में अब त्योहारों का मौसम है जब लोग एक-दूसरे से खुलकर मिलते-जुलते हैं। ऐसे में एक भी सुपरस्प्रेडर और लोगों के मिलने-जुलने में तेजी दो हफ्ते में पूरी सूरत बदल सकते हैं। उदाहरण के लिए केरल में त्योहार के बाद सितंबर में बहुत तेजी से मामले बढ़े थे। वैज्ञानिकों ने मामलों में अचानक तेजी आने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर लोग कोरोना वायरस से सुरक्षा के उपाय अपनाने छोड़ देंगे तो अक्तूबर में 26 लाख मामलों के साथ पीक आ सकता है।
प्रोफेसर विद्यासागर कहते हैं, 'अगर लोग सुरक्षा के उपायों का पालन करते हैं तो हमारे सभी अनुमान ठीक बैठेंगे। हमारा मानना है कि भारत में सितंबर में ही पीक आ गया था। हमें ढिलाई नहीं करनी चाहिए। ये सोचना इंसानी प्रवृति है कि जो बुरा होना था वो हो चुका, आगे ऐसा नहीं होगा।'