प्रतीकात्मक तस्वीर
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जर्मनी में जस्टस लिबिग विश्वविद्यालय के शोधकर्ता बेहजाद हाजीजादे मालेकी ने कहा, 'शुक्राणु कोशिकाओं पर ये प्रभाव कम शुक्राणु की गुणवत्ता और कम प्रजनन क्षमता से जुड़े हैं। हालांकि इन प्रभावों में समय के साथ सुधार हुआ, लेकिन वे कोविड-19 से जूझ रहे मरीजों में महत्वपूर्ण और असामान्य रूप से उच्च बने रहे।' उन्होंने कहा कि यह बीमारी जितनी अधिक गंभीर होती है, परिवर्तन उतने ही बड़े होते हैं।