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सीरम इंस्टीट्यूट ने भारत में नोवावैक्स वैक्सीन के परीक्षण के लिए मांगी अनुमति, कोरोना के नए स्ट्रेन पर भी है प्रभावी

Fri, 29 Jan 2021 01:28 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से नोवावैक्स कोरोना वायरस वैक्सीन का एक छोटा घरेलू परीक्षण करने की अनुमति मांगी है। यह दूसरी कोविड-19 वैक्सीन होगी, जिसका निर्माण कंपनी स्थानीय स्तर पर करेगी। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया वीजी सोमानी और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के विषय विशेषज्ञों की समिति आवेदन प्रक्रिया की जांच कर रही है। दरअसल, सीरम इंस्टीट्यूट ने अमेरिकी दवा कंपनी नोवावैक्स इंक के साथ इस वैक्सीन के उत्पादन और वितरण के लिए करार किया है। करार के मुताबिक, सीरम इंस्टीट्यूट हर साल इस वैक्सीन की दो अरब खुराक तैयार करेगा।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्रिटेन में हुए एक ट्रायल में नोवावैक्स वैक्सीन को कोरोना वायरस के खिलाफ 89 फीसदी प्रभावी पाया गया है। ब्रिटेन के ही वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि यह वैक्सीन देश में पाए गए कोरोना के नए स्ट्रेन के खिलाफ भी प्रभावी है। वहीं ब्रिटेन की सरकार का कहना है कि अगर मेडिसिंस एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी इस वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दे देती है तो इस साल के मध्य तक यह वैक्सीन लोगों को मिल जाएगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ब्रिटेन में नोवावैक्स वैक्सीन का ट्रायल 15 हजार से अधिक लोगों पर किया गया है, जिसमें 27 फीसदी लोग 65 साल से अधिक उम्र के हैं। शोधकर्ताओं ने इसके शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर कहा है कि यह वैक्सीन दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए स्ट्रेन पर भी प्रभावी पाई गई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
नोवावैक्स की वैक्सीन प्रोटीन यूनिट प्लेटफार्म पर आधारित वैक्सीन है। इसमें वायरस के टुकड़ों का प्रयोग किया गया है। यह वैक्सीन शरीर को कोरोना वायरस से बचाव के लिए प्रशिक्षित करेगी न कि प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगी। भारत के लिए इस वैक्सीन को उपयुक्त बताया गया है, क्योंकि इसके भंडारण के लिए अन्य कई वैक्सीन की अपेक्षा उतने कम तापमान की जरूरत नहीं है।
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