फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऐसे पता चल सकेगा कितनी असरदार है आपको लगी कोरोना वैक्सीन, नए शोध में हैरान करने वाला दावा

Sat, 12 Dec 2020 09:59 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
ब्रिटेन और कनाडा में तो कोरोना की वैक्सीन के लिए लोगों का इंतजार खत्म हो गया है और माना जा रहा है कि भारत में भी जल्द ही वैक्सीन आ जाएगी, लेकिन पिछले कई दिनों से लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि आखिर वैक्सीन कितनी असरदार होगी। अगर आपको वैक्सीन लग गई है तो आपके शरीर पर उसका कितना असर होगा, यह बता पाना अभी मुश्किल है। लेकिन प्रतिष्ठित नेचर पत्रिका में छपे एक शोध में वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि अब खून की जांच से पता किया जा सकेगा कि जो वैक्सीन आपको लगी है, वह कितनी असरदार है। 
विज्ञापन

2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, हॉर्वर्ड और एमआईटी संस्थान के वैज्ञानिकों ने मिलकर बंदरों पर एक शोध किया। इसमें सबसे पहले बंदरों को कोरोना की प्रायोगिक वैक्सीन दी गई और उसके कुछ दिनों बाद खून संबंधी एक विशेष प्रकार की जांच की गई। असल में इस जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कोरोना वायरस के हमले से निपटने के लिए बंदरों का प्रतिरक्षा तंत्र कितना तैयार हुआ है। इसके नतीजे उत्साहजनक निकले। 
विज्ञापन

3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अब शोधकर्ताओं का कहना है कि बंदरों की तरह इंसानों में भी कोरोना की वैक्सीन देने के बाद विकसित हुए प्रतिरक्षा तंत्र का पता लगाया जा सकता है। बंदरों पर किए गए ट्रायल के नतीजों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक इंसानों के लिए विशेष रक्त जांच विकसित करने में जुट गए हैं। 

4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं की टीम में शामिल बोस्टन विश्वविद्यालय के वैक्सीन विशेषज्ञ डॉ. डैन बरौच का कहना है कि यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी सफलता है, क्योंकि इससे कोरोना वैक्सीन की प्रभावकारिता का पता लगाया जा सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
माना जा रहा है कि वैज्ञानिक अगर वैक्सीन का असर बताने वाला यह ब्लड टेस्ट विकसित कर लेते हैं तो वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिकों की लंबे समय तक क्लीनिकल ट्रायल करने की जरूरत खत्म हो जाएगी। अमेरिका के जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फाउची कहते हैं कि अगर वैज्ञानिक यह 'खून जांच' विकसित कर लेते हैं तो फ्लू की तरह वैक्सीन तैयार करने की पद्धति अपना सकते हैं। दरअसल, फ्लू की वैक्सीन को तैयार करने के लिए नए सिरे से क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि पिछले नतीजों के आधार पर आगे की वैक्सीन तैयार की जाती है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें