प्रतीकात्मक तस्वीर
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म्यूटेशन से फैलना महज संयोग?
अब सवाल ये उठता है कि इस म्यूटेशन के कारण ही ये वायरस इतना फैला है या फिर ये मात्र संयोग है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की ल्यूसी वैन ड्रॉप के मुताबिक, 'वायरस के फैलने का कोई एक तरीका नहीं होता, वह लगातार बदलते रहते हैं, कुछ बदलाव उन्हें फैलने में मदद करते हैं, तो कुछ उन्हें फैलने से रोकते हैं। बाकियों का कोई असर नहीं होता।'
किसी एक म्यूटेशन के इतना फैलने के पीछे ये भी कारण हो सकता है कि ये महामारी के शुरुआती दौर में ही फैल गया। इसे फाउंडर इफेक्ट कहते हैं। डॉ वैन ड्रॉप की टीम का मानना है कि इस म्यूटेशन के इतना फैलने के पीछे यही कारण है, लेकिन इसे लेकर विवाद भी बढ़ा है।
कई जानकार शेफिल्ड विश्वविद्यालय के डॉ थूशान डी सिल्वा से सहमत दिखाई देते हैं। डी सिल्वा के मुताबिक ये बताने के लिए पर्याप्त डाटा है कि वायरस के इस वर्जन के पास एक 'सेलेक्टिव एडवांटेज' है और इसमें पिछले वर्जन से ज्यादा तेजी से फैलने की क्षमता है। वो कहते है कि, फिलहाल ये पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता कि ये वायरस पहले से ज्यादा फैलने वाला है, लेकिन ये निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि ये न्यूट्रल नहीं है।