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सावधान: कहीं कोरोना के इलाज में ये गलती तो नहीं बन रही ब्लैक फंगस की वजह? विशेषज्ञ से जानें सबकुछ

Sun, 23 May 2021 12:32 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)  


कोरोना की दूसरी लहर में ब्लैक फंगस संक्रमण यानी म्यूकोरमाइकोसिस एक गंभीर बीमारी बनकर उभरा है, जो देश के लिए एक नई चिंता का कारण बन गया है। इसके मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब तक हजारों लोग इसके शिकार हो चुके हैं और कईयों ने तो अपनी जान भी गंवा दी है। हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे डरने की नहीं बंल्कि इसके प्रति जागरूक होने की जरूरत है, तभी इस संक्रमण को रोका जा सकेगा। वैसे तो विशेषज्ञ ब्लैक फंगस संक्रमण के फैलने की कई वजह बताते हैं, लेकिन इस बीच एक सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर कोरोना के इलाज में वो कौन सी गलती है, जो ब्लैक फंगस को जन्म दे रही है? आइए जानते हैं इसके बारे में... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विशेषज्ञ कहते हैं कि ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस कोई नई बीमारी नहीं है बल्कि इसके मामले पहले भी आते थे, लेकिन बहुत ही कम। दरअसल, पहले गंदे पानी से नाक की सफाई करने से ब्लैक फंगस से संक्रमण के मामले सामने आते थे।


 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कोरोना से संक्रमित या फिर ठीक हो चुके मरीजों के लिए ब्लैक फंगस संक्रमण जानलेवा साबित हो रहा है। इससे संक्रमित होने के बाद या तो मरीजों की आंखें निकालनी पड़ रही हैं या फिर अगर संक्रमण अधिक फैल गया है तो मरीज की जान भी जा सकती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्लैक फंगस मिट्टी, हवा, भोजन आदि में हो सकता है। इससे संक्रमित होने का खतरा उनको ज्यादा होता है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिनका शुगर लेवल अनियंत्रित रहता है या फिर कोरोना के इलाज के दौरान जिन्हें अंधाधुंध स्टेरॉयड दिया गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विशेषज्ञ कहते हैं कि जो लोग आईसीयू में लंबे समय तक रहते हैं, उनमें ब्लैक फंगस संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि हाल के दिनों में देश में ऑक्सीजन की भारी कमी देखी गई है, ऐसे में औद्योगिक ऑक्सीजन ने कई मरीजों की जान बचाई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक ऑक्सीजन के साथ मरीजों की नाक में पहुंच रहा प्रदूषण ब्लैक फंगस की वजह भी बन रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि कोरोना संक्रमण की अफरा-तफरी में ऑक्सीजन सिलेंडरों को बिना साफ किए ही उसमें ऑक्सीजन भरकर अस्पतालों को भेजना पड़ रहा है। दरअसल, ऑक्सीजन सिलेंडरों की ठीक से सफाई न होना ब्लैक फंगस संक्रमण का कारण बन सकता है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि ऑक्सीजन सिलेंडरों की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए और ब्लैक फंगस के खतरे को कम किया जाए। 

नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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