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यह भी जान लें: कोरोना टेस्ट में सीटी वैल्यू का क्या मतलब, कैसे पता चलता है रिपोर्ट निगेटिव है या पॉजिटिव?

Mon, 03 May 2021 04:39 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

डॉ. राजन गांधी

जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष


देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर बेकाबू है। अब तो गांव-गांव में भी संक्रमण फैल गया है। पिछले साल हालात इतने खराब नहीं थे, जितने आज हैं। हालांकि अभी भी टेस्टिंग पर काफी जोर दिया जा रहा है और हर दिन लाखों की संख्या में कोरोना टेस्ट किए जा रहे हैं, क्योंकि संक्रमण को ज्यादा से ज्यादा फैलने से रोका जा सके। इस समय आरटी-पीसीआर टेस्ट को संक्रमण का पता लगाने का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जा रहा है। इसी टेस्ट की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है, जिसे सीटी वैल्यू कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
सीटी वैल्यू के बारे में समझने से पहले ये जान लेते हैं कि आरटी-पीसीआर टेस्ट क्या है? विशेषज्ञ कहते हैं कि आरटी-पीसीआर का मतलब होता है रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज चेन रिएक्शन। चूंकि कोरोना एक आरएनए वायरस है, इसलिए टेस्ट के लिए पहले मरीज का स्वाब सैंपल लिया जाता है और फिर उसे डीएनए में बदला जाता है। फिर उस डीएनए में चेन रिएक्शन करवाई जाती है, ताकि यह पता किया जा सके कि सैंपल में वायरस मौजूद है या नहीं। अब आइए जानते हैं कि सीटी वैल्यू क्या होती है? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या है सीटी वैल्यू?  
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि सैंपल में वायरस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए चेन रिएक्शन की साइकिल बार-बार दोहरानी पड़ती है। इसी को सीटी वैल्यू कहा जाता है। सीटी वैल्यू का मतलब होता है साइकिल थ्रेशोल्ड वैल्यू, जो एक नंबर होता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कैसे निकाली जाती है सीटी वैल्यू? 
  • इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर ने टेस्ट सैंपल में कोरोना वायरस की पुष्टि के लिए सीटी वैल्यू 35 निर्धारित कर रखी है। इसका मतलब ये है कि अधिकतम 35 बार चेन रिएक्शन की साइकिल दोहराई जाती है। अगर इन 35 साइकिल के अंदर कोरोना वायरस का पता चल जाता है, तो इसका मतलब कि आप कोरोना पॉजिटिव हैं और अगर 35 साइकिल तक भी वायरस ना मिले तो समझ लीजिए कि आपकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • अब आप सोच रहे होंगे कि क्या सभी टेस्ट सैंपल में 35 बार चेन रिएक्शन करवाई जाती है? तो इसका जवाब है नहीं, क्योंकि कई सैंपल में आठ से दस साइकिल के बाद ही वायरस का पता चल जाता है, जबकि कई लोगों में 30-32 साइकिल के बाद वायरस की मौजूदगी का पता चलता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
सीटी वैल्यू कम होना अच्छा या ज्यादा? 
  • सैंपल में अगर जल्दी वायरस का पता चल जाता है, यानी 8-10 साइकिल के बाद ही, तो इसका मतलब है कि वायरल लोड ज्यादा है और अगर ज्यादा साइकिल के बाद वायरस का पता चलता है, तो इसका सीधा-सीधा मतलब है कि उस व्यक्ति में वायरल लोड ज्यादा है। अगर 10 साइकिल में वायरस मिला, तो इसका मतलब होता है कि सीटी वैल्यू 10 है और अगर 35 साइकिल में मिला तो सीटी वैल्यू 35 होती है। 
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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