फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विशेषज्ञ से जानें: कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी स्वाद और गंध महसूस नहीं हो रहा, क्या करें?

Sun, 27 Jun 2021 09:04 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में अब काफी हद तक कमी आ गई है, लेकिन अभी भी सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि कोरोना के एक नए स्वरूप डेल्टा प्लस का खतरा बना हुआ है। हालांकि इसके खिलाफ टीकाकरण अभियान तो तेजी से चल रहा है और रत ने 32 करोड़ से अधिक कोविडरोधी टीके लगाकर एक बड़ी उपलब्धि भी हासिल कर ली है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, हर रोज 50 लाख से अधिक टीके लगाए जा रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना रोधी टीका ही महामारी से लड़ने में एक प्रभावशाली उपाय है। इससे संक्रमण का मुकाबला करने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हालांकि इस बीच कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोग पूरी तरह से ठीक नहीं हो पा रहे हैं, जो एक बड़ी दिक्कत बनी हुई है। कुछ लोगों को तो स्वाद और गंध भी महसूस नहीं हो रहा, ऐसे में क्या करें? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब... 
विज्ञापन

2 of 6
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वायरस की दूसरी लहर जिस तेजी से आई, उसी तेजी से चली भी गई, ऐसा कैसे संभव हुआ?
  • जयपुर स्थित एसएमएस मेडिकल कॉलेज के डॉ. रमन शर्मा कहते हैं, 'इसके कई कारण हो सकते हैं। पहला, वैक्सीनेशन का असर हो सकता है। दूसरा, फियर फैक्टर भी हो सकता है। लोगों ने देखा कि संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है, लॉकडाउन लगा और लोगों ने नियमों का पालन किया। इसके अलावा ये भी कह सकते हैं कि वायरस से ठीक होने के बाद जो इफेक्ट आया, वो भी हो सकता है, म्यूकरमाइकोसिस होने लगा और भी कई कारण रहे। लोग जिम्मेदार बने और खुद को घर में कैद कर लिया, जिसकी वजह से वायरस सर्वाइव नहीं कर पाया और वैरिएंट कमजोर पड़ने लगा।' 
विज्ञापन

3 of 6
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना का एक नया स्वरूप डेल्टा प्लस का खतरा बना हुआ है, क्या कुछ जानकारी देंगे? 
  • डॉ. रमन शर्मा कहते हैं, 'कोरोना एक रेस्पिरेटरी वायरस है और इसने अब तक करीब 5-6 बार अपना रूप बदल लिया है यानी यह एंटीजेनिक स्ट्रक्चर (संरचना) को चेंज (बदलाव) कर रहा है। जब वायरस खुद को बदलता है, तो वो सिग्निफिकेंट हो जाता है और उस रूप से लोगों के पास लड़ने की क्षमता कम होती है। अगर बात करें दूसरे वायरस की, जिनमें इंफ्लुएंजा का उदाहरण देखें तो 1918 में पहली बार सामने आया, लेकिन 2009 में उसका चौथा वायरस आया। इस तरह करीब 90 साल में इसके चार म्यूटेशन सामने आए, जबकि कोरोना के केस में डेढ़ साल में ही 5-6 वैरिएंट आ गए हैं, जो संक्रमण काफी तेजी से फैला रहे हैं। अब डेल्टा प्लस जो भारत में आया है, अपने स्पाइक प्रोटीन को बदल रहा है। इससे 60 प्रतिशत ज्यादा संक्रमण का खतरा रहता है। खासतौर पर जो अभी वैक्सीनेटेड नहीं हैं, उनमें संक्रमण का ज्यादा खतरा है। ये भी माना जा रहा है कि अगर ये संक्रमण ज्यादा फैला तो जो शुरू में अल्फा वैरिएंट था, उससे डबल हॉस्पिटलाइजेशन होगा। हालांकि कितना फैलेगा या नहीं, उसे दरकिनार कर कोविड नियमों का पालन करें और वैक्सीन लगवाएं।' 

4 of 6
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
निगेटिव आने के बाद भी टेस्ट वापस नहीं आया, क्या करें? 
  • डॉ. रमन शर्मा कहते हैं, 'अगर किसी का कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी टेस्ट और स्मेल (स्वाद और गंध की क्षमता) नहीं आया, तो परेशान न हों। यह कोई बड़ी परेशानी नहीं है। इसमें कुछ दिन से लेकर कुछ महीने तक का समय लग सकता है। चूंकि जब वायरस हमारे नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को प्रभावित करता है तो टेस्ट और स्मेल चले जाते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह सामान्य हो जाएगा। अपनी दिनचर्या जिस तरह से है, उसी तरह रखें यानी हेल्दी खाना खाएं, हल्की एक्सरसाइज (व्यायाम) करें, पानी खूब पीएं।' 
विज्ञापन

5 of 6
कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
प्रेग्नेंट को अगर वैक्सीन लगती है तो क्या शिशुओं में एंटीबाडी रहेगी? 
  • डॉ. रमन शर्मा कहते हैं, 'अगर प्रेग्नेंट को वैक्सीन लगती है तो शुरू में कुछ समय तक नवजात में एंटीबॉडीज रह सकती हैं, लेकिन अभी तक पूरे रिजल्ट (परिणाम) नहीं आए हैं, तो कुछ भी कहना मुश्किल है।' 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
जिन देशों में 50 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लग चुकी है या हर्ड इम्यूनिटी आ चुकी है, वहां भी इसका खतरा है? 
  • डॉ. रमन शर्मा कहते हैं, 'जी हां, अभी तक डेल्टा वैरिएंट का खतरा बना हुआ है। हालांकि अमेरिका में फाइजर, मॉडर्ना वैक्सीन लगी है और वहां माना गया है कि ये नए वैरिएंट के खिलाफ भी कारगर हैं। लेकिन आने वाले समय में अगर कोरोना स्वरूप बदल लेता है, तो भविष्य में क्या होगा, कुछ भी कहना संभव नहीं है।' 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें