फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टीकाकरण अभियान: क्या इंसानों के जीनोम को भी प्रभावित कर सकती है वैक्सीन? यहां जानिए सबकुछ विस्तार से

Sat, 26 Jun 2021 08:05 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
इंसान के जीनोम पर वैक्सीन का असर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कोरोना संक्रमण से सुरक्षा देने के लिए दुनियाभर में वैक्सीनेशन अभियान को तेज कर दिया गया है। सभी देश वैक्सीनेशन ड्राइव में तेजी लाकर जल्द से जल्द लोगों को कोरोना से बचाव के टीके देने की जुगत में लगे हुए है। हालांकि कई वैक्सीन को लेकर हुए अध्ययनों में इसके साइड-इफेक्ट्स देखने को मिले हैं, जिसके चलते लोगों के मन में अब भी वैक्सीन को लेकर सवाल बना हुआ है। इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्टस में इंसानों के जेनेटिक कोड पर वैक्सीन के प्रभाव को लेकर चिंता जताई जा रही है। आखिर वैक्सीन का जेनेटिक कोड से क्या संबंध हो सकता है, आइए समझते हैं?
जिन दो वैक्सीन के जेनेटिक कोड पर प्रभाव डालने को लेकर चर्चा हो रही है उनमें फाइजर और मॉडर्ना के टीके शामिल हैं। यह दोनों ही वैक्सीन एमआरएन वैक्सीन हैं, जिनमें वायरस के आनुवांशिंक पदार्थ का अंश मिलाया जाता है, इसे ‘मैसेंजर रिबोन्यूक्लिक एसिड’ के नाम से जानते हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या कोरोना के टीके इंसानों के जीनोम को प्रभावित कर सकते हैं?
विज्ञापन

2 of 5
कोरोना टीकाकरण के साइड-इफेक्टस को भी जानिए - फोटो : पीटीआई
क्या है एमआरएन वैक्सीन की कार्यप्रणाली?
क्या वैक्सीन इंसानों के जेनेटिक कोड को प्रभावित कर सकते हैं, यह जानने से पहले एमआरएन वैक्सीन की कार्यप्रणाली को समझना जरूरी है। इस तरह की वैक्सीन को बनाने के लिए कोरोना वायरस स्पाइक प्रोटीन का इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रोटीन सार्स-सीओवी-2 की सतह पर पाया जाता है। ऐसे टीके प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस के हमले से शरीर की रक्षा करना सिखाते हैं। टीके में मौजूद एम-आरएनए इंसानों की शरीर की कोशिकाओं से लिया जाता है। हमारी कोशिकाएं प्राकृतिक रूप से हर वक्त हजारों एम-आरएनए बनाती हैं। 

विज्ञापन

3 of 5
क्या वैक्सीन जीन को प्रभावित कर सकते हैं? - फोटो : iStock
क्या वैक्सीन इंसानों के जीनोम पर डाल सकते हैं असर?
वैज्ञानिकों इस तरह की संभावनाओं से इनकार करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक हमारे शरीर का जेनेटिक कोड (डीएनए) एमआरएन वैक्सीन से अलग जरूर है लेकिन दोनों के अणुओं में समानता होती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक एमआरएन, डीएनए में प्रवेश नहीं कर सकता है। इसके दो कारण हैं, पहला- दोनों अणु अलग-अलग हैं और दूसरा वैक्सीन की एम-आरएनए और डीएनए दोनों, कोशिका के अलग-अलग हिस्से में होते हैं। इसलिए यह माना जा सकता है कि वैक्सीन इंसानों के जीनोम को प्रभावित नहीं कर सकती है।

4 of 5
डीएनए टेस्ट लैब - फोटो : Getty
यह भी जानिए
वैज्ञानिकों का कहना है कि वैसे तो वैक्सीन की एम-आरएनए और इंसानों के डीएनए में प्रवेश नहीं करती है, लेकिन इसके कुछ अपवाद भी हो सकते हैं। एक स्थिति यह हो सकती है कि इंसानों के आनुवांशिक तत्व (जिसे रेट्रो-ट्रांसपोसंस के नाम से जाना जाता है) कोशीकीय एम-आरएनए को हाईजैक कर उसे डीएनए में तब्दील कर दे। इस स्थिति में संभव है कि यह इंसानों की आनुवांशिक संरचना में प्रवेश कर जाए। हालांकि यह अत्यंत दुर्लभ मामला है, जिसकी संभावना बेहद कम होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
इंसानी जीनोम पर वैक्सीन का असर - फोटो : Getty Images
और अध्ययन जरूरी
वैज्ञानिकों के मुताबिक टीकारण करा चुके लोगों के डीएनए में वैक्सीन की एम-आरएनए का क्या प्रभाव हो सकता है, इस बारे में फिलहाल कोई अध्ययन नहीं किया गया है। हाल ही में हुए एक प्रयोगशाला अध्ययन में जीनोम में कोरोनवायरस आरएनए के एकीकृत होने के प्रमाण मिले थे, हालांकि उस अध्ययन में एम-आरएनए टीके को लेकर परीक्षण नहीं किया गया था। ऐसे में इसे समझने के लिए विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है। 

------
नोट: यह लेख तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें तथा किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें