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सावधान: कोरोना मरीज कैसे करें जानलेवा हैप्पी हाइपोक्सिया की पहचान? छह से नौ दिन के बीच आते हैं लक्षण

Thu, 20 May 2021 10:15 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
देश में कोरोना वायरस की वजह से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच कोरोना संक्रमितों के लिए हैप्पी हाइपोक्सिया भी जानलेवा बन गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। हाल ही में अमर उजाला से बातचीत में गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोविड वार्ड के इंचार्ज डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि हैप्पी हाइपोक्सिया के मरीजों को बुखार और खांसी की कोई शिकायतें नहीं हैं, लेकिन अचानक उनकी सांस फूलने लगती है और ऑक्सीजन लेवल कम हो जाता है, जिस वजह से उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है और यहां तक कि मौत भी हो जाती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
  • डॉ. राजकिशोर सिंह कहते हैं, 'जिन मरीजों में कोरोना के हल्के लक्षण हैं या जो मरीज बिना लक्षण वाले हैं, उनमें ऑक्सीजन का स्तर नीचे गिर रहा है। खासकर युवाओं में, ऑक्सीजन का स्तर 70 से 80 फीसदी नीचे आ जा रहा है और उन्हें इसका पता भी नहीं चलता और मरीज बेहोशी की हालत में पहुंच जाता है। ऐसे में जब तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता है, तब तक ऑक्सीजन लेवल 50 के आसपास चला आता है, जो जानलेवा बन जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
  • डॉ. राजकिशोर सिंह कहते हैं कि हैप्पी हाइपोक्सिया की वजह से जब कोरोना मरीजों का ऑक्सीजन लेवल काफी नीचे चला जाता है तो उन्हें ब्रेन हैमरेज, कार्डियक अरेस्ट या सिर में थक्के जम जाते हैं और इस वजह से उनकी मौत हो जाती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कैसे करें हाइपोक्सिया की पहचान? 
  • डॉ. राजकिशोर सिंह बताते हैं कि हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण संक्रमण के छह से नौ दिनों के बीच में आते हैं। इसकी पहचान करने का सबसे अच्छा तरीका है कि एक सांस में 30 तक गिनती गिनें। इस दौरान अगर सांस लेने में दिक्कत होती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण 
  • होठों का रंग बदलना 
  • होंठ हल्का नीला होना 
  • त्वचा का रंग लाल या बैंगनी होना 
  • लगातार पसीना आना 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
युवाओं को क्यों पता नहीं चल पाता? 
  • उजाला सिग्नस अस्पताल के डॉ. राजन गांधी कहते हैं कि युवाओं की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है, ऐसे में उन्हें कोरोना के सामान्य लक्षणों का पता नहीं चल पाता और न ही ऑक्सीजन लेवल के कम होने का ही पता चल पाता है। वह कहते हैं कि हैप्पी हाइपोक्सिया की पहचान करने के लिए सबसे जरूरी है कि मरीजों को अपने ऑक्सीजन लेवल की जांच करते रहनी चाहिए। अगर ऑक्सीजन लेवल 94 से कम हो तो सतर्क हो जाना चाहिए, क्योंकि यह हाइपोक्सिया का लक्षण हो सकता है। 
नोट: यह लेख गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोविड वार्ड के इंचार्ज डॉ. राजकिशोर सिंह और उजाला सिग्नस अस्पताल के डॉ. राजन गांधी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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