शोध (फाइल फोटो)
परीक्षण में उत्साहवर्धक परिणाम
अमरीकी संस्था नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शस डिजीजेस (NIAID) ने इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल किया था जिसमें दुनिया के कई देशों के हॉस्पिटलों में 1,063 लोगों पर परीक्षण किया गया और जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं।
कुछ रोगियों को दवाएं दी गईं जबकि कुछ का प्लैसीबो या वैकल्पिक इलाज किया गया। NIAID के प्रमुख एंथनी फाउची ने कहा, रेमडेसिविर से स्पष्ट देखा गया कि इससे रोगियों में सुधार का समय घट गया है। उन्होंने कहा कि नतीजों से ये सिद्ध हो गया कि कोई दवा इस वायरस को रोक सकती है और इससे रोगियों के इलाज की संभावना का द्वार खुल गया।
मगर इस दवा से इस बात का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल सका है कि इससे कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। जिन रोगियों को रेमडेसिवर दी गई उनमें मृत्यु दर 8 फीसदी पाई गई। वहीं जिन रोगियों का इलाज प्लेसिबो से किया गया उनमें मृत्यु दर 11.6 फीसदी थी।