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Coronavirus Vaccine: क्या नाक के जरिए दी जाएगी कोरोना की वैक्सीन? जानें, कहां हो रही है तैयार

Thu, 16 Jul 2020 09:05 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine Update - फोटो : Amar Ujala
कोरोना वायरस संक्रमण से दुनियाभर के 200 से ज्यादा देश प्रभावित हैं। इस महामारी पर काफी हद तक नियंत्रण करने की कोशिश तो हो रही है, लेकिन हर दिन कोरोना संक्रमण और इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए कई देशों में वैक्सीन तैयार की जा रही है। करीब 110 से ज्यादा तरह की वैक्सीन पर काम चल रहा है, जिनमें से करीब डेढ़ दर्जन वैक्सीन आगे चल रही हैं। भारत में भी दो वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के फेज में है। एक बार वैक्सीन तैयार हो जाने के बाद दूसरी चुनौती यह है कि सबसे ज्यादा असरदार होने के लिए इसे किस रूप में लाया जाए। बीसीजी की तरह इंजेक्शन के रूप में, पोलियो की तरह ओरल ड्रॉप के रूप में, इनहेलर की तरह या फिर किसी और रूप में?
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • कोरोना वायरस के लिए भारत बायोटेक कंपनी नाक के जरिए ली जाने वाली एक विशेष वैक्सीन विकसित कर रही है। यूनिवर्सिटी आफ विस्कांसिन मैडिसन (University of Wisconsin Madison)और वैक्सीन निर्माता कंपनी फ्लूजेन (FluGen) के विषाणु वैज्ञानिकों ने भारत बायोटेक के साथ मिलकर कोरोना के खिलाफ कारगर कोरोफ्लू (CoroFlu) नामक इस वैक्सीन को विकसित करने के लिए ट्रायल शुरू कर दिए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
  • इस वैक्सीन के बारे में कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह नाक में लगाई जा सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो कोरोनो वायरस सहित अन्य कई विषाणु या रोगाणु, म्यूकोसा के माध्यम से ही शरीर में प्रवेश करते हैं। ये गीले, स्क्विशी ऊतक जो नाक, मुंह, फेफड़े और पाचन तंत्र में पए जाते हैं, उन्हें प्रभावित करते हैं। 

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Coronavirus - फोटो : Pixabay
श्वसन मार्ग से जाता है वायरस 
  • कोरोना वायरस के बारे में कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह श्वसन के जरिए हमारे शरीर के अंदर जाता है। येल विश्वविद्यालय के एक विशेषज्ञ अकीको इवासाकी ने कहा, "यह जानते हुए कि एक वायरल रोगजनक के खिलाफ शक्तिशाली श्लेष्म प्रतिक्रियाएं किस तरह हो सकती हैं, यह तरीका श्लेष्म संबंधी टीकों के बारे में सोचने के लिए आदर्श होगा।"
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कोरोना का टीका (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
  • आम तौर पर वैक्सीन शरीर के ऊपरी हिस्सों में लगाई जाती है। लेकिन हर वायरस की अपनी अलग प्रवृत्ति होती है और कोरोना वायरस भी पूर्व के वायरसों से बिल्कुल अलग है। इसके बचाव और तुरंत असर के लिए अगर नाक के जरिए वैक्सीन अंदर जाएगी तो सीधे इस वायरस पर अटैक करेगी और उसे खत्म करेगी।
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सांकेतिक - फोटो : social media
पहले भी हो चुके हैं अध्ययन
  • इससे पहले हुए एक अध्ययन में ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने कोरोना की बन रही वैक्सीनों को लेकर यह दावा किया है कि यह इन्हेलर के रूप में या फिर नाक के स्प्रे के रूप में ज्यादा प्रभावी साबित होगी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों का यही मानना है कि इस सांस संबंधी संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए सीधे फेफड़े में दवा डालना सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। 
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
  • मालूम हो कि ब्रिटेन के ये दोनों ही संस्थान फिलहाल अपनी-अपनी कोरोना वैक्सीन का परीक्षण कर रहे हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन फिलहाल इस रेस में आगे चल रही है। वहीं, इंपीरियल कॉलेज लंदन ने भी वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू कर दिया है। दावा है कि जिस प्रतिभागी को यह वैक्सीन दी गई है, उसमें कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
  • ब्रिटेन के इन दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों के मुताबिक, म्यूकस मेमब्रेन ऊतकों का सुरक्षा कवच होता है, जो इंसानी शरीर के श्वसन तंत्र, फेफड़ों आदि सभी अंगों में मौजूद होता है। ये नाक और मुंह में भी मौजूद होता है और अंदर प्रवेश करने वाले वायरसों को जकड़ता है। यह एक शक्तिशाली और चिपचिपा पदार्थ बनाते हैं जो वायरस को जकड़ लेता है।

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Vaccine - फोटो : Pixabay
  • दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों का तर्क है कि नाक से वैक्सीन देने से वह म्यूकस मेमब्रेन को उत्प्रेरित करेगा ताकि वे तुरंत कोरोना वायरस को पहचान लें और उसे अंदर जाने से रोक दें। ऐसी वैक्सीन नाक के स्प्रे के रूप में सुविधाजनक तरीके से दी जा सकती है। शोधकर्ता प्रो. रोबिन शेटॉक के मुताबिक, यह सीधे फेफड़ों में पहुंचेगा और उन ऊतकों में फैल जाएगा जिसे वायरस संक्रमित कर सकता है। 
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : पिक्सा
  • प्रो. शेटॉक के मुताबिक, इनहेलर या स्प्रे से दी जाने वाली वैक्सीन बुजुर्गों के लिए ज्यादा कारगर हो सकती है। उनका तर्क है कि बुजुर्गों में उम्र के साथ इम्यून सिस्टम कमजोर होता जाता है।  ऐसे में इंजेक्शन यानी सुई से पारंपरिक तौर पर दी जाने वाली वैक्सीन की जगह नाक से दी जाने वाली वैक्सीन बुजुर्गों के फेफड़ों को मजबूत करेगी और कारगर साबित होगी। 

यह भी पढ़ें: कौन-सी कोरोना वैक्सीन कब तक आएगी? यहां है पूरी अपडेट

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