लैंगिक भेदभाव (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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यूएनएफपीए की कार्यकारी निदेशक नतालिया कानेम ने मंगलवार को कहा कि ये आंकडे़ पूरी दुनिया में महिलाओं और लड़कियों पर पड़ने वाले भयावह प्रभावों की ओर इशारा करते हैं। वह कहती हैं कि यह महामारी समाज के बीच भेदभाव को गहरा कर रही है। अध्ययन के मुताबिक, छह माह का लॉकडाउन लैंगिक भेदभाव के 3.10 करोड़ अतिरिक्त मामले सामने ला सकता है।वहीं, लाखों महिलाएं परिवार नियोजन के लिए अपनी जरूरतों को पूरा कर पाने के साथ ही अपनी देह और सेहत की सुरक्षा कर पाने में नाकाम हो सकती हैं।