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कोरोनरी आर्टरी डिजीज: फिट लोगों को भी हो सकती है दिल की बीमारियां, जानिए इसके कारण और बचाव के तरीके

Sun, 02 Jan 2022 02:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या - फोटो : iStock
कई बार आपने भी सुना होगा कि नियमित व्यायाम, हेल्दी डाइट और अच्छे रूटीन के बाद भी
लोग दिल की बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं। अक्सर ऐसा कुछ सुनने या देखने के बाद लोग दो तरह के निष्कर्षों पर पहुंचते हैं। पहला यह कि जब इतने सावधान और फिट रहने वाले को समस्या हो सकती है तो फिटनेस पर ध्यान देने की जरूरत ही क्या? और दूसरा यह कि जब इतने सावधान और फिट रहने वाले को समस्या हो सकती है तो फिर इससे ज्यादा हम क्या करें? इन दोनों ही सवालों के चक्कर में या तो लोग फिटनेस के लिए कोई भी प्रयत्न करना छोड़ देते हैं या फिर जरूरत से ज्यादा प्रयत्न करने लगते हैं। पर ध्यान दें, यह दोनों ही तरीके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हैं। 

कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी सीएडी दिल की एक स्थिति है जिसमें कोरोनरी आर्टरीज यानी ह्रदय की उन धमनियों में प्लाक जम जाता है जो ऑक्सीजन युक्त खून दिल तक लेकर आती हैं। सामान्यतौर पर ये धमनियां लचीली और मुलायम होती हैं लेकिन प्लाक के जमने के बाद ये कड़क और संकरी हो जाती हैं। दिल को पर्याप्त मात्रा में खून मिलना बंद होने लगता है और बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाती है। कोलेस्ट्रॉल, बीपी का स्तर बढ़ सकता है।  यूं सामान्य रूटीन, एक्सरसाइज और सही खान-पान शरीर के बाकी अंगों सहित दिल को भी स्वस्थ रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है लेकिन कई और भी कारण हैं जो दिल को खतरे में डालने में भूमिका निभा सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं।
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हृदय रोग के मामले - फोटो : Pixabay
कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण
फिटनेस और खान-पान के प्रति सतर्क रहने के बावजूद कई तरह की मेडिकल कंडीशन के कारण भी हृदय रोगों के मामले बढ़ सकते हैं। अधिक स्ट्रेस, बीमारी की कोई फैमिली हिस्ट्री, आदि वजहें भी दिल के लिए खतरा बन सकते हैं। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को बचपन में रही ऐसी बीमारी, जिसमें धमनियों में सूजन बढ़ जाती है, वयस्क होने पर मुश्किलें खड़ी कर सकती है।  
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आहार का रखें ख्याल - फोटो : iStock
कोरोनरी आर्टरी डिजीज से बचने के लिए क्या करें?

फिटनेस, सही रूटीन और पोषक भोजन के बावजूद दिल को होने वाली समस्याएं आम नहीं हैं। लेकिन जरूरी यह है कि कुछ बातों को हमेशा ध्यान में रखा जाए, ताकि समस्या को समय रहते ही सुलझाया जा सके। यदि आप फिटनेस, खान-पान और सही रूटीन को लेकर सजग हैं तो आपको होने वाली किसी भी स्वास्थ्य समस्या को मैनेज करना और उससे रिकवर होना अधिक आसान होगा। इसके लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

यदि आपने एक हेल्दी रूटीन, पोषक और संतुलित खान-पान और व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाया है तो उसके साथ कभी समझौता न करें। डॉक्टर आपको कुछ समय के लिए हल्की एक्सरसाइज करने और रूटीन में कुछ बदलाव करने को कह सकते हैं। यदि बचपन में आपके साथ कोई ऐसी समस्या रही है जिसका असर दिल पर पड़ सकता है तो वयस्क होने पर भी अपने नियमित चेकअप को लेकर सतर्क रहें। यदि परिवार में किसी ऐसी बीमारी की हिस्ट्री है तो भी यही तरीका अपनाएं। इससे अगर समस्या होगी भी तुरंत पकड़ में आएगी और जल्दी उसका इलाज हो सकेगा। 

40 की उम्र के बाद अपने बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच नियमित करवाएं, कोई लक्षण नहीं हो फिर भी। अक्सर 40 के बाद महिला-पुरुष दोनों के शरीर में कुछ बदलाव होते ही हैं। इनकी वजह से हार्मोनल असंतुलन और अन्य परेशानियां उभर सकती हैं। नियमित जांच में यह सामने आ जाती हैं और समय पर इलाज  मिलने से नियंत्रण में आ सकती हैं। 
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हृदय का रखें ख्याल - फोटो : iStock
इन बातों का भी रखें ध्यान
  • यदि डॉक्टर आपको कोई नियमित दवाई प्रिस्क्राइब करते हैं तो घबराएं नहीं। दवाइयां शरीर के असंतुलन को दूर करने के लिए सहायक होती हैं।  
  • खुद को मोटिवेट करते रहें। मेडिटेशन, योग, किसी भी क्रिएटिव काम से जुड़ना आदि ऐसी गतिविधियां हैं जो सकारात्मक असर देती हैं। इनका पालन खुद को आगे बढ़ाने और चिंतामुक्त रखने के लिए कीजिए। 
  • सबसे महत्वपूर्ण बात है परिवार और मित्रों का साथ। स्वस्थ या अस्वस्थ किसी भी स्थिति में अपने प्रियजनों के साथ क्वालिटी समय बिताइए। इससे आपको जीवन को भरपूर जीने का उत्साह मिलेगा। आप किसी ऐसी संस्था से जुड़ सकते हैं जो जरूतमंद लोगों की मदद करती हो। कोई भी ऐसा तरीका जो आपको अपने मन की बातें कहने का मौका दे, अपनाइये। इसका स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा असर होता है।


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अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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