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विशेषज्ञ से जानें: कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद अगर मुंह में सूजन आ गई है, तो क्या करें?

Thu, 16 Sep 2021 12:36 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते-घटते मामलों के बीच टीकाकरण का काम बहुत तेजी से चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 76 करोड़ 57 लाख से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं। बीते 24 घंटे में 64 लाख से अधिक टीके लगाए गए हैं। वहीं अगर संक्रमण की बात करें तो बीते 24 घंटे में 30 हजार से अधिक कोरोना के नए मामले सामने आए हैं, जबकि 400 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इन आंकड़ों में उतार-चढ़ाव पिछले कई दिनों से जारी है। यही वजह है कि देश में महामारी की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। इसको देखते हुए ही सभी लोगों से जल्द से जल्द टीका लेने की अपील की जा रही है। वैसे अभी भी बहुत से ऐसे लोग हैं, जो टीका लेने से डर रहे हैं कि कहीं उन्हें कुछ हो न जाए, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर ये कह चुके हैं कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। हां, वैक्सीन लेने के बाद बुखार, बदन दर्द आदि की समस्या हो सकती है, लेकिन ये भी एक-दो दिन में खत्म हो जाती है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं वैक्सीन और टीकाकरण से जुड़े कुछ सवालों के जवाब... 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों को घर-घर जाकर जागरूक कर सकते हैं? 
  • दिल्ली स्थित गंगाराम अस्पताल के डॉ. (लेफ्टिनेंट जनरल) वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'देश को कोरोना से बचाना है, परिवार को बचाना, समाज को बचाना है। जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की ही नहीं है, हमारा भी कर्तव्य है कि हम खुद वैक्सीन लगवाएं और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें और प्रेरित करें। घर-घर जाकर जो लोग जागरूक करेंगे, वे भी हम या आप ही होंगे। सरकार का भी यही कहना है कि हम और आप एक दूसरे को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करें।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
जब तक 100 प्रतिशत वैक्सीन नहीं लग जाती है, क्या उससे पहले ट्रैवल करना सही है? 
  • डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'हम कोरोना को दो तरह से हरा सकते हैं और ये दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, कोविड नियमों का पालन और वैक्सीनेशन (टीकाकरण)। 100 प्रतिशत वैक्सीनेशन करने में अभी वक्त लगेगा, लेकिन जीवन को पटरी पर भी लाना है और काम भी जरूरी है। इसलिए बहुत जरूरी हो, तभी ट्रेवल (यात्रा) करें। वैक्सीन अभी नहीं लगी है तो पहले वैक्सीन लगवा लें, अगर किसी कारणवश बिना वैक्सीन के ट्रेवल करना है, तो कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करें। अगर वैक्सीन लगवा लेंगे तो ट्रेवल करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।' 

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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन लगवाने के बाद मुंह में सूजन आ गई है, क्या करें? 
  • डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'वैक्सीन के इस तरह के साइड इफेक्ट नहीं आते हैं। लेकिन अगर ऐसी परेशानी है, तो डॉक्टर को दिखा सकते हैं। हो सकता है कि ये किसी अन्य एलर्जी की वजह से ही हो। आप देखें तो देश में 76 करोड़ के करीब वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इतने लोगों में अगर किसी को साइड इफेक्ट हुआ है तो हल्का बुखार, शरीर में दर्द या वैक्सीन की जगह पर दर्द, ये भी सिर्फ 24-48 घंटे तक ही रहते हैं।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीनेशन में महिलाओं का क्या आंकड़ा है? 
  • डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'वैक्सीनेशन (टीकाकरण) के डाटा को अगर देखें तो महिलाओं की संख्या कम है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में महिलाएं पीछे हैं, जबकि शहर में आगे हैं। अब गांव में वैक्सीन कम होने के कारण कहीं न कहीं जागरूकता की कमी है। गांव में महिलाएं दिनभर अपने काम में लगी रहती हैं। वैक्सीन कितनी सुरक्षित है, उनके लिए यह कितना जरूरी है, इससे वे अनजान हैं। कई महिलाओं को लगता है कि उनके घर के पुरुष ने लगवा ली है तो बहुत है। लेकिन ऐसा नहीं है, हर एक नागरिक के लिए वैक्सीन जरूरी है। इसलिए हमें विभिन्न स्तर पर उन तक इसके बारे में जानकारी पहुंचानी होगी। अगर किसी अफवाह की वजह से वे नहीं लगवा रही हैं, तो उसे भी दूर करने की जिम्मेदारी हम सभी की है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
स्कूल खुल गए हैं, क्या बच्चों से कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर की उम्मीद कर सकते हैं? 
  • डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'अगर हम विज्ञान के साथ चलते हैं, तो ये बात माननी होगी कि बच्चे जल्दी सीखते हैं। इसलिए ये समझना कि हम बड़े ही नियमों का पालन कर सकते हैं, उचित नहीं है। आज के समय में बच्चे अपने माता-पिता को टोकते हैं, हाथ साफ करने के लिए और मास्क लगाने के लिए। अब तक बच्चे बाहर नहीं जा रहे थे, इसलिए उन्हें इन सबकी आदत नहीं है। लेकिन उन्हें उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराना है और इसके लिए प्रेरित करना होगा। एक और अहम बात ये है कि अब तक देखा गया है कि बच्चों में संक्रमण का प्रभाव बहुत कम रहा है। हमें स्कूल और घर में भी इस तरह का माहौल बनाना होगा कि वे बिना भूले इसे अपनी आदत बना लें।' 
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