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Health Tips: विशेषज्ञों ने चेताया- बच्चों में मोटापे का खतरा बहुत गंभीर, इन बीमारियों के हो सकते हैं शिकार

Mon, 17 Oct 2022 12:19 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों में मोटापे के खतरे को जानिए - फोटो : iStock
मोटापे को दुनियाभर में तेजी से बढ़ती कई स्वास्थ्य समस्याओं के प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर देखा जा रहा है। डायबिटीज से लेकर हृदय रोगों तक के लिए मोटापे को एक खतरा माना जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो सभी उम्र के लोगों को मोटापे के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए इससे बचाव के उपाय करते रहने चाहिए, पर इसमें बच्चों के लिए और भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। बच्चों में मोटापे का खतरा न सिर्फ कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है साथ ही इसका जीवन की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर देखा गया है। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को बच्चों में बढ़ते मोटापे के खतरे के लिए प्रमुख माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र में ही औसत से अधिक वजन के कारण डायबिटीज का जोखिम सबसे अधिक हो सकता है। इसके अलावा बचपन में मोटापे की समस्या जोड़ों और सांस की भी दिक्कतों का भी कारण बन सकती है, इस तरह के खतरे को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

आहार संबंधी गड़बड़ी को भी वजन बढ़ने के कारकों में से एक माना जाता रहा है, विशेषकर जंक और फास्ट फूड्स बच्चों में वजन बढ़ने की समस्या को बढ़ा सकते हैं।  डॉक्टर्स कहते हैं, सभी माता-पिता को बच्चों के वजन को स्वस्थ रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आइए बच्चों में वजन बढ़ने का कारण और इससे होने वाली समस्याओं के बारे में समझते हैं।
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वजन को कैसे कंट्रोल में रखें? - फोटो : iStock
बच्चों में वजन बढ़ाने वाले कारक

बच्चे हों या वयस्क, लाइफस्टाइल की गड़बड़ी को वजन बढ़ाने वाले प्रमख कारक के तौर पर देखा जाता रहा है। जिन बच्चों के माता-पिता का वजन अधिक होता है उनमें मोटापे का खतरा अधिक देखा गया है। डॉक्टर्स कहते हैं, नियमित रूप से उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ, जैसे फास्ट फूड, स्नैक्स और मीठी चीजों का अधिक सेवन करने वाले बच्चों में अधिक वजन होने का खतरा देखा गया है। जिन बच्चों का ज्यादा से ज्यादा समय घर के भीतर स्क्रीन के सामने अधिक बीतता है ऐसे बच्चों में भी मोटापे का जोखिम अधिक पाया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी माता-पिता को प्राथमिकता से बच्चों के वजन को कंट्रोल में रखने वाले तरीकों पर ध्यान देना चाहिए। आइए जानते हैं कि अधिक वजन के शिकार बच्चों में समय से पहले किन बीमारियों के विकसित होने का खतरा हो सकता है?
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बच्चों को हो सकती है डायबिटीज की समस्या - फोटो : istock
मधुमेह का शिकार हो सकते हैं बच्चे

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि जिन बच्चों का वजन अधिक होता है उनमें बचपन में ही या आगे चलकर डायबिटीज रोग होने का खतरा अधिक पाया गया है। डायबिटीज की स्थिति को शरीर के कई अन्य अंगों के लिए काफी हानिकारक माना जाता है। यह किडनी और लिवर के लिए भी समस्याएं बढ़ा सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं, मोटापा के साथ यदि बच्चा गतिहीन जीवनशैली का शिकार है तो इससे टाइप-2 डायबिटीज होने का जोखिम और भी बढ़ जाता है।

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हृदय रोग के लक्षणों को न करें अनदेखा - फोटो : istock
बच्चों में हृदय रोगों का खतरा

सामान्य से अधिक वजन वाले बच्चों में हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या का भी जोखिम अधिक पाया गया है, ये दोनों स्थितियां हृदय रोगों के जोखिम को कई गुना तक बढ़ा देती है। इतना ही नहीं इससे कम उम्र में ही हृदय से संबंधित रोगों की समस्या बढ़ने का खतरा हो सकता है। बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति धमनियों को कमजोर कर देती है जिसके कारण हृदय रोगों के गंभीर जोखिम, जैसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का भी खतरा हो सकता है।
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बच्चों में लिवर की समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock
लिवर की समस्याओं का खतरा

बच्चों में मोटापे की समस्या लिवर के गंभीर रोगों का भी कारण बन सकती है, इससे नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा हो सकता है। इस समस्या में लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है जिसके कारण लिवर का कार्य प्रभावित हो जाता है और यह शरीर के अन्य अंगों को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। लिवर की बीमारियों के कारण पाचन की समस्याओं के साथ शरीर में विषाक्तता बढ़ने का भी खतरा रहता है, यही कारण है कि बच्चों में मोटापे के जोखिमों को कम करने की सलाह दी जाती है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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