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बड़ी राहत: कोरोना से सुरक्षा देने के साथ इन स्थितियों में भी फायदेमंद हो सकती है वैक्सीन, अध्ययन में दावा

Sun, 18 Jul 2021 05:25 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है कोरोना की वैक्सीन - फोटो : Social media
दुनियाभर में कोरोना के मामले एक बार फिर से तेजी से बढ़ने लगे हैं। कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के कारण कई देशों में संक्रमण के दैनिक मामलों में उछाल देखने को मिल रहा है। तेजी से बढ़ते मामलों को विशेषज्ञ कोरोना की तीसरी लहर के संकेत के रूप में देख रहे हैं। कई अध्ययनों में बताया जा रहा है कि वैक्सीन की दोनों डोज कोरोना के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा देने के साथ लॉन्ग कोविड के लक्षणों को कम करने में भी फायदेमंद हो सकती है। कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण के मामलों के साथ लॉन्ग कोविड भी डॉक्टरों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं।
लॉन्ग कोविड का मतलब, कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आ जाने के बाद भी लोगों में कुछ दिनों से लेकर महीनों तक लक्षणों का बना रहना है। हालांकि कोरोना के हर संक्रमित में लॉन्ग कोविड के लक्षण दिखें, ऐसा आवश्यक नहीं है। हालिया अध्ययनों में बताया जा रहा है कि लॉन्ग कोविड के 200 से अधिक लक्षण भी हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली हैं उनमें कोरोना के साथ लॉन्ग कोविड का खतरा भी कम हो सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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लॉन्ग कोविड समस्याएं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड समस्याएं क्यों होती हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से मुकाबले के दौरान हमारे शरीर में मौजूद मायक्रोन्यूट्रिएंट की काफी खपत हो जाती है, यही कारण है कि लोगों को ठीक होने के बाद भी काफी कमजोरी महसूस होती है। इस कमजोरी को ठीक होने में एक से दो महीने का वक्त लग सकता है। लॉन्ग कोविड समस्याओं के रूप में लोगों को गंभीर थकान, कमजोरी और पैरों में दर्द की समस्या का अनुभव होना सामान्य है। ऐसे में लोगों को पूरा आराम करने और खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। कोरोना के दौरान शरीर में हुई मायक्रोन्यूट्रिएंट की कमी को जल्द से जल्द दूर करने के प्रयास करने चाहिए। 
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लॉन्ग कोविड से भी सुरक्षा देती है वैक्सीन - फोटो : pixabay
लॉन्ग कोविड में कारगर साबित हो सकती हैं वैक्सीन
कोरोना संक्रमण को लेकर हाल में हुए कई अध्ययनों में वैक्सीन को लॉन्ग कोविड में भी फायदेमंद पाया गया है। इस संबंध में वैज्ञानिकों ने कोरोना के ऐसे 66 रोगियों पर अध्ययन किया गया जो संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती रह चुके थे। इनमें से 44 ने टीकाकरण करा लिया था जबकि 22 का टीकाकरण नहीं हुआ था। अध्ययन की समीक्षा में शोधकर्ताओं ने वैक्सीन ले चुके लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षणों में कमी और तेजी से सुधार देखा। इस आधार पर कोरोना की वैक्सीन को लॉन्ग कोविड में भी फायदेमंद माना जा रहा है।
यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार लॉन्ग कोविड की समस्या किसी को भी हो सकती है, चाहे उसमें कोविड-19 के हल्के लक्षण रहे हों या कोई भी लक्षण न रहे हों।

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मोटापा ग्रस्त लोगों में लॉन्ग कोविड का खतरा अधिक - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड का खतरा किन्हें ज्यादा होता है
हाल ही में डायबिटीज, ओबेसिटी और मेटाबॉलिज्म नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मोटापा ग्रस्त लोगों में लॉन्ग कोविड-19 जटिलताएं ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक में कोविड-19 से ठीक हो चुके 2,839 रोगियों पर किए गए अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। प्रमुख शोधकर्ता अली अमीनियन बताते हैं कि अध्ययन के दौरान हमने मोटापा से ग्रसित लोगों में कोविड-19 के कारण होने वाली जटिलताएं, अन्य लोगों की तुलना में अधिक देखी हैं।
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लॉन्ग कोविड के लक्षणों को पहचानें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड के हो सकते हैं 200 से ज्यादा लक्षण
लैंसेट जर्नल ईक्लिनिकल मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार कोरोना से ठीक हो चुके रोगियों में लॉन्ग कोविड के 200 से अधिक प्रकार के लक्षण हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि लॉन्ग कोविड के कारण लोगों में सामान्य रूप से थकान और कमजोरी के साथ कंपकंपी और कानों के बजने की समस्या हो सकती है। वहीं कुछ रोगियों को त्वचा में खुजली,  मासिक धर्म चक्र में बदलाव, यौन रोग, दिल की धड़कन में अनियमितता, याददाश्त की कमी, धुंधला दिखाई देने और दस्त की समस्या भी हो सकती है।

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नोट: यह लेख ब्रिटेन में हुए एक प्रीप्रिंट अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इस अध्ययन का फिलहाल पीर रिव्यू नहीं किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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