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बजट 2024-25: सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण बढ़ाने पर जोर, इससे महिलाओं को जानलेवा कैंसर से बचाव की उम्मीद

Thu, 01 Feb 2024 09:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सर्वाइकल कैंसर वैक्सीनेशन - फोटो : सोशल मीडिया
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार (1 फरवरी) को अंतरिम बजट 2024-25 पेश करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने पर ध्यान दिया। इस बजट में सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण को बढ़ाने की घोषणा की गई है। इसके तहत 9-14 साल की लड़कियों का टीकाकरण करके कैंसर के जोखिमों को कम करने पर ध्यान दिया जाएगा।

सर्वाइकल कैंसर, महिलाओं में वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ता कैंसर है, जिसके कारण हर साल लाखों महिलाओं की मौत हो जाती है। भारत में, सर्वाइकल कैंसर 18.3% (123,907 मामले) की दर के साथ तीसरा सबसे आम कैंसर है। रिपोर्ट के अनुसार 9.1% की मृत्यु दर के साथ ये महिलाओं में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण भी है।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन की मदद से इस कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। आइए सर्वाइकल कैंसर के जोखिम और इससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन के बारे में जानते हैं।
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सर्वाइकल कैंसर का खतरा - फोटो : istock
सर्वाइकल कैंसर और वैक्सीनेशन

सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स में होने वाला गंभीर प्रकार का कैंसर माना जाता है। सर्विक्स गर्भाशय का सबसे निचला भाग होता है, जो योनि से जुड़ता है। सर्वाइकल कैंसर के अधिकतर मामले ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण के कारण होते हैं। एचपीवी एक आम वायरस है, जो संभोग के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। यौन रूप से सक्रिय कम से कम आधे लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी एचपीवी संक्रमण हो सकता है हालांकि हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इस संक्रमण को कम कर देती है।

जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें संक्रमण बढ़ने और इसके गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक हो सकता है।
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सर्वाइकल कैंसर के लिए वैक्सीनेशन - फोटो : Pixabay
एचपीवी वैक्सीन हो सकती है कारगर

अध्ययनकर्ताओं ने बताया, एचपीवी वैक्सीनेशन सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है। शोध में पाया गया है कि एचपीवी वैक्सीन 90% से अधिक एचपीवी संक्रमण और कैंसर को कम करने में मददगार हो सकती है। साल 2006 में पहली बार एचपीवी टीकाकरण की सिफारिश की गई थी।  सीडीसी (रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र) 12 वर्ष की आयु में नियमित एचपीवी टीकाकरण का सुझाव देता है। ये टीका सिर्फ सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, कई और गंभीर प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में भी कारगर हो सकता है।

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एचपीवी टीकाकरण - फोटो : Pixabay
एचपीवी वैक्सीन से होने वाले फायदे

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 9 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को ये टीका दिया जा सकता है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) 11 या 12 साल की उम्र में नियमित एचपीवी टीकाकरण का सुझाव देता है। टीकाकरण के लिए आदर्श उम्र किसी व्यक्ति के यौन सक्रिय होने से पहले है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि ये वैक्सीन न सिर्फ सर्वाइकल कैंसर से बचाने में मददगार हो सकती है साथ ही इससे लिंग और गुदा कैंसर से भी बचाव किया जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन एचपीवी वायरस के कारण होने वाले मुंह, गले, सिर और गर्दन के कैंसर से भी बचाने में मददगर हो सकती है।
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एचपीवी टीकाकरण से संबंधित ध्यान देने वाली बात - फोटो : Pixabay
वैक्सीनेशन की डोज और सावधानियां

मायोक्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार 15 वर्ष से कम उम्र के लोगों को 6 से 12 महीने के अंतर पर दो डोज का टीका लगाया जा सकता है। जो लोग 15 से 26 वर्ष की उम्र में टीका लगवाना शुरू करते हैं, उन्हें टीके की तीन खुराकें लेनी चाहिए। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ लोगों को ये टीके नहीं लेने चाहिए। एचपीवी टीका गर्भावस्था के दौरान नहीं दिया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले एचपीवी शॉट के बाद एलर्जी की प्रतिक्रिया हुई हो या जिसे गंभीर एलर्जी की समस्या है उन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही टीकाकरण कराना चाहिए। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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