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सलाह: सोने की स्थिति का सेहत पर पड़ता है प्रभाव, ऐसे सोने से ठीक हो सकते हैं खर्राटे और पीठ का दर्द

Tue, 31 Aug 2021 05:55 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेहत के लिए बहुत आवश्यक है पर्याप्त नींद - फोटो : Pexels.com
शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में नींद लेना बेहद आवश्यक माना जाता है। नींद पूरी न होना या फिर नींद आने में समस्या महसूस होना, स्वास्थ्य संबंधी कई सारी दिक्कतों का कारण बन सकता है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि नींद पूरी न होने के कारण लोगों को ब्लड-प्रेशर की दिक्कत हो सकती हैं जो कई तरह के हृदय रोगों का कारण बन सकती है। इतना ही नहीं नींद की कमी प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ कामेच्छा की दिक्कतों को भी बढ़ा सकती है, यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को रोजाना 6-8 घंटे की अच्छी नींद जरूर लेने की सलाह देते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना की विपरीत परिस्थितयों के कारण लोगों के नींद की गुणवत्ता काफी प्रभावित हुई है। इसके अलावा यह जीवनशैली और आहार जैसे कारकों पर भी निर्भर करती है। जितना आवश्यक रोजाना पर्याप्त मात्रा में नींद लेना है, उतना ही आवश्यक है सोने की सही स्थिति को सुनिश्चित करना। आइए आगे की स्लाइडों में सोने की कुछ स्थितियों के बारे में और जानते हैं कि हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करती हैं?
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स्लिपिंग पैटर्न को करें ठीक - फोटो : Social media
पर्याप्त नींद लेना क्यों आवश्यक है? 
स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। नींद पूरी न होने से आपकी इम्युनिटी भी प्रभावित हो सकती है। जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार रात की नींद अच्छी लेने वालों में टी-कोशिकाएं को काफी सक्रिय पाया गया। टी कोशिकाएं शरीर में संक्रमण को कम करने और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग बेहतर नींद लेते हैं उनकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, नींद पूरी न कर पाने वाले लोगों की तुलना में बेहतर होती है। कोरोना के ऐसे विकट समय में जब लोग अपनी इम्यूनिटी को मजबूत करने के प्रयास में लगे हुए हैं, ऐसे में नींद की महत्ता समझना सभी के लिए आवश्यक है।
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सीधे सोने के लाभ - फोटो : pixabay
पीठ के बल सोना
पीठ के बल सोना सबसे आम स्लीपिंग पोजीशन में से एक है। इस तरह से सोने से कई तरह के फायदे हो सकते हैं। यह स्थिति शरीर की संरचना में सुधार कर सकती है जिससे रीढ़, जोड़ और मांसपेशियां स्वस्थ बनी रहती हैं। हालांकि जिन लोगों को पीठ दर्द, स्लीप एपनिया और खर्राटों की समस्या है वह इस स्थिति में सोने से असहज महसूस कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की यह स्थिति घुटने और कूल्हे के दर्द को कम करने में सहायक मानी जाती है।

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पेट के बल लेटने के हैं कई फायदे - फोटो : Social media
पेट के बल सोना
ज्यादातर लोग पेट के बल सोना पसंद करते हैं जबकि कुछ लोगों को ऐसे सोने में असहजता महसूस हो सकती है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पेट के बल सोने से खर्राटों की समस्या पर काबू पाया जा सकता है। इसके अलावा स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगों को भी इस पोजीशन में सोने से फायदा मिल सकता है। सोते समय सहजता बहुत आवश्यक होती है, किसी भी प्रकार का असहजता की स्थिति से गर्दन और पीठ में दर्द हो सकता है। जिन लोगों को कमर दर्द की समस्या रहती हो उन्हें पेट के निचले हिस्से पर तकिया रखकर पेट के बल सोने से लाभ मिल सकता है।
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कमर की तरफ से लेटने की आदत है फायदेमंद - फोटो : Social media
कमर की तरफ से घुमावदार स्थिति में सोना
अक्सर बच्चों और बूढ़ों को इस तरह से सोते हुए देखा जा सकता है। स्वाभाविक रूप से इस तरह की स्थिति को पीठ के निचले हिस्से के दर्द में मददगार माना जा सकता है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी इस तरह से सोना फायदेमंद हो सकता है। जिन लोगों को खर्राटे की समस्या है उन्हें भी इस पोजीशन से लाभ मिल सकता है। हालांकि इस स्थिति में आप तभी सोएं जब पूरी तरह से सहजता का अनुभव हो। कमर की तरफ से सोने में यदि आपको असहजता महसूस हो रही है तो स्थिति बदल लें, वरना इससे शरीर में दर्द हो सकता है और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं का कारक बन सकती है। 

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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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