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Pseudobulbar Affect: इस दुर्लभ बीमारी की शिकार हैं बाहुबली की 'देवसेना', 15-20 मिनट तक रुकती ही नहीं है हंसी

Mon, 24 Jun 2024 12:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अनुष्का शेट्टी - फोटो : Twitter@MsAnushkaShetty
फिल्म बाहुबली में देवसेना का किरदार निभाने वाली मशहूर अनुष्का शेट्टी एक दुर्लभ बीमारी की चपेट में हैं। एक साक्षात्कारक में उन्होंने बताया, मुझे हंसी की बीमारी है। आप सोच सकते हैं, 'हंसना भी कोई समस्या हो सकती है?' मेरे लिए, यह समस्या है। अगर मैं हंसना शुरू करती हूं, तो मैं 15 से 20 मिनट तक नहीं रुक पाती। कॉमेडी सीन देखते या शूट करते समय, मैं सचमुच हंसते हुए फर्श पर लोट जाती हूं। कई बार तो शूटिंग रोकनी पड़ी है।

यह एक दुर्लभ बीमारी है, इसे मेडिकल की भाषा में स्यूडोबुलबार एफेक्ट (पीबीए) के रूप में जाना जाता है जिसके कारण व्यक्ति रोने, हंसने या अन्य प्रकार से अनियंत्रित भावनात्मक प्रदर्शनों का अनुभव करता है। आमतौर पर, स्यूडोबुलबार एफेक्ट अन्य कई प्रकार की न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के बाद होता है। पीबीए का अक्सर सही निदान नहीं हो पाता है और इसे इसे मूड विकारों के रूप में जान लिया जाता है। आइए इस स्वास्थ्य समस्या के बारे में जानते हैं।
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हंसने की बीमारी (सांकेतिक) - फोटो : Freepik
स्यूडोबुलबार इफेक्ट की समस्या 

स्यूडोबुलबार एफेक्ट नामक ये समस्या आम तौर पर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों या किसी प्रकार की चोट के कारण होती है। मस्तिष्क की चोट, अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसे रोग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या स्ट्रोक के बाद व्यक्ति में इसका खतरा बढ़ जाता है। इस तरह की स्थिति के कारण भावनाओं को नियंत्रित कर पाना कठिन हो जाता है। रोगी को शर्मिंदगी, आइसोलेशन, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं का भी जोखिम रहता है।

रोने-हंसने जैसी भावनाओं पर नियंत्रण न रहने के कारण दैनिक कार्यों में भी बाधा आ सकती है। 
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स्यूडोबुलबार एफेक्ट के संकेतों के बारे में जानिए - फोटो : Pexel
कैसे करें इसकी पहचान?

बार-बार और अनैच्छिक रूप से रोना या हंसना स्यूडोबुलबार एफेक्ट का प्राथमिक संकेत माना जाता है। हालांकि हंसी की तुलना में रोने की भावना इस रोग में अधिक देखी जाती रही है। रोने या हंसने के एपिसोड कई मिनट तक जारी रह सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप किसी हल्की-फुल्की मनोरंजक टिप्पणी पर भी बेकाबू होकर हंसने लगते हैं या फिर आप ऐसी स्थितियों में बहुत हंसने या रोने लग जाते हैं जो दूसरों को मजेदार या दुखद नहीं लगती। 

इसके अलावा, इस रोग के शिकार लोगों में अक्सर अवसाद के लक्षण देखे जा सकते हैं।
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स्यूडोबुलबार एफेक्ट का इलाज - फोटो : istock
इस रोग को कैसे किया जाता है ठीक?

स्यूडोबुलबार एफेक्ट का कोई इलाज नहीं है, लेकिन कुछ दवाएं इसे प्रबंधित करने में मदद कर सकती हैं। उपचार का लक्ष्य हंसने या रोने की आवृत्ति और गंभीरता को कम करना है। रोगी के लक्षणों के आधार पर उन्हें कुछ स्थितियों में एंटीडिप्रेसेंट दवाओं की भी जरूरत हो सकती है। 

चूंकि यह रोग मस्तिष्क क्षति और तंत्रिका संबंधी स्थितियों के कारण होता है, इसलिए इस रोकना भी आसान नहीं है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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