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डायबिटीज को जड़ से खत्म कर देंगे ये उपाय, जानिए क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य

Tue, 06 Apr 2021 04:21 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
मधुमेह, मौजूदा समय में आम सी समस्या हो गई है। बुजुर्गों से लेकर कम उम्र तक के लोग इस गंभीर बीमारी के शिकार होते जा रहे हैं। लोगों को तरह-तरह के उपचार के बाद भी कोई लाभ नहीं मिल पाता है। मधुमेह का असर ज्यादा बढ़ जाने पर इंसुलिन की रोजाना सूई तक लगानी पड़ती हैं। इतनी कोशिशों के बाद भी अगर डायबिटीज में लाभ नहीं मिल रहा है तो आपको आयुर्वेद का सहारा लेना चाहिए। आयुर्वेद के विशेषज्ञों के मुताबिक कई ऐसी जड़ी बूटियां हैं जिनका उपयोग मधुमेह को जड़ से खत्म कर सकता है। 
आइए विशेषज्ञों से जानते हैं कि मधुमेह के उपचार में आयुर्वेदिक पद्धति कैसे कारगर हो सकती है?
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में डायबिटीज (प्रमेहा के रूप में वर्णित) का उल्लेख अमीरों को प्रभावित करने वाली बीमारियों के रूप में मिलता है। ऐसी बीमारी जो शारीरिक निष्क्रियता और आलस्य से जुड़ी हुई है। जीवनशैली में बदलाव ने अब ज्यादार लोगों को इस रोग के गिरफ्त में ले लिया है। आयुर्वेदाचार्य आचार्य मनीष बताते हैं कि आयुर्वेद में प्रमेह मूत्र संबंधी असामान्यता को संदर्भित करता है। आयुर्वेद में बीस प्रकार का प्रमेह और मधुमेह होता है, आमतौर पर लोगों को होने वाला मधुमेह मेलेटस उसी का एक हिस्सा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आयुर्वेद में डायबिटीज का उपचार 
आचार्य मनीष के अनुसार आयुर्वेद में जड़ी-बू़टियों से लेकर स्थिति की गंभीरता के आधार पर पंचकर्म प्रक्रियाओं जैसे वामन, विरेचन, वस्ति आदि को शुद्ध करने की क्रिया होती है। इन प्राकृतिक उपचारों के माध्यम से शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाने की कोशिश की जाती है। डायबिटीज के रोगियों के लिए कई जड़ी-बूटियां लाभकारी हो सकती हैं।

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गिलोय - फोटो : Pixabay
गिलोय
गिलोय को टाइप 2 डायबिटीज के लिए बेहद ही उपयोगी माना जाता है। गिलोय हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट की तरह काम करता है जो इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाकर रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा गिलोय अतिरिक्त ग्लूकोज को बर्न करने में भी मदद करता है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार गिलोय, मधुमेह के उपचार में बेहद प्रभावी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मेथी
मेथी रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मददगार है। मेथी में मौजूद फाइबर आंत में मोटी-जेली की तरह परत बना लेता है जिससे शर्करा के अवशोषण में अवरोध पैदा हो जाता है। जिन लोगों को हाई शुगर की समस्या है उनके लिए भी मेथी का सेवन बेहद फायदेमंद है। 
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जामुन - फोटो : iStock
जामुन
जामुन में 82 फीसदी पानी होता है जबकि इसमें शुक्रोज बिल्कुल भी नहीं होता है। इसका हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव रक्त और मूत्र में शर्करा के स्तर को कम करता है। जामुन में अल्कलाइड भी उच्च मात्रा में पाई जाती हैं जो हाई शुगर को कम करने में बेहद प्रभावी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तुलसी
टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों के लिए तुलसी वरदान है। नियमित रूप से  तुलसी का सेवन प्रसव के बाद और सामान्य रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक है। तुलसी के पत्तों में एंटीऑक्सिडेंट की भी मात्रा होती हैं जो कैरोफिलीन, यूजेनॉल और मिथाइल यूजेनॉल का उत्पादन करते हैं। ये सभी अग्नाशयी कोशिकाओं में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद करते हैं। 

नोट: यह लेख आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने हेतु दिल्ली स्थित शुद्धि क्लीनिक के आयुर्वेदाचार्य आचार्य मनीष से बातचीत के आधार पर बनाया गया है। संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं। 
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