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आयुर्वेद: कोविड रिकवरी में कितनी कारगर है अश्वगंधा? यूके के तीन शहरों में अध्ययन

Mon, 02 Aug 2021 04:40 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दल्ली
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कोरोना में अश्वगंधा के फायदे (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामलों को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान लोगों को संक्रमण की गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा। एक समय देश में अपर्याप्त मालूम हो रही चिकित्सा सुविधाओं के बीच सदियों पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा ने लोगों का ध्यान न सिर्फ अपनी ओर आकर्षित किया, साथ ही इससे लोगों को लाभ भी मिला। विशेषकर कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लोगों ने कोविड-19 संक्रमण से छुटकारा पाने या सुरक्षित रहने के लिए तमाम तरह की औषधियों का उपयोग किया, अश्वगंधा उन्हीं औषधियों में से एक है।
कोरोना काल में आयुर्वेद विशेषज्ञों ने अनुसंधान और तमाम अध्ययनों के आधार पारंपरिक चिकित्सा के माध्यम से रोग का इलाज ढूंढने का प्रयास किया। इसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए अब यूके के लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन ने आयुष मंत्रालय मिलकर आयुर्वेद के माध्यम से कोरोना का उपचार ढूंढने की पहल की है। इसी दिशा में वैज्ञानिकों ने कोविड-19 से रिकवरी में अश्वगंधा कितना महत्वपूर्ण हो सकता है, वैज्ञानिक इस बात के पता लगाएंगे। आइए आगे की स्लाइडों में जानते आयुर्वेद के नजरिए से यह अध्ययन कितना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है?
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अश्वगंधा के लाभ जानने के लिए किया जाएगा अध्ययन - फोटो : Pixabay
2000 लोगों पर किया जाएगा अध्ययन
भारत में अश्वगंधा के औषधीय गुणों पर कई शोध हुए हैं, लेकिन यह पहली बार है जब कोविड-19 में इस औषधि के फायदों के बारे में जानने के लिए आयुष मंत्रालय ने किसी  विदेशी संस्थान के साथ करार किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक लीसेस्टर, बर्मिंघम और लंदन में 2000 लोगों पर यह अध्ययन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य यह जानना है कि क्या यह जड़ी-बूटी (अश्वगंधा) कोविड-19 से तेजी से रिकवरी करने में मदद कर सकती है?
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कोविड रिकवरी में अशवगंधा के फायदे जानने के लिए अध्ययन - फोटो : Social media
अश्वगंधा के फायदों को जानने के लिए किया जाएगा अध्ययन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो भारत में अश्वगंधा जूस, टैबलेट और पाउडर कई फॉर्मेट में भी उपलब्ध है, हालांकि शोध में भाग लेने वालों को अश्वगंधा की गोलियां दी जाएंगी। उन्हें दिन में दो बार 500 मिलीग्राम की गोलियां लेनी होंगी। सभी प्रतिभागियों में एक महीने तक जीवन की गुणवत्ता, मानसिक स्वास्थ्य, प्रतिकूल प्रभाव (यदि कोई हो) सहित विभिन्न पहलुओं पर निगरानी की जाएगी।

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डॉ. तनुजा नेसरी - फोटो : यूट्यूब स्क्रीनग्रैब
महत्वपूर्ण होगा यह अध्ययन
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशक डॉ तनुजा नेसारी बताती हैं, तीन महीने के लिए, 1,000 प्रतिभागियों के एक समूह को अश्वगंधा की गोलियां दी जाएंगी, जबकि 1,000 प्रतिभागियों के दूसरे समूह को प्लेसबो दिया जाएगा। प्लेसबो की गोलियां और स्वाद भी बिल्कुल अश्वगंधा की तरह ही होगा। हालांकि रोगी और डॉक्टर, इस बात से बात से अनजान होंगे कि किस समूह को प्लेसबो दी जा रही है और किस समूह को अश्वगंधा की गोलियां? इस अध्ययन के आधार पर कोविड-19 की रिकवरी में अश्वगंधा के फायदों के बारे में जानने की कोशिश की जाएगी।
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आयुष 64 कोरोना की दवा - फोटो : Agency
आयुष-64 दवा के देखे गए हैं तमाम फायदे
आयुर्वेद में शोध पर फिलहाल विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी से संबंधित हाल ही में आयुष राज्यमंत्री महेंद्रभाई मुंजापारा ने राज्यसभा को बताया कि मंत्रालय कोविड-19 के प्रकोप को रोकने के लिए आयुष दवाओं की प्रभावशीलता पर व्यापक शोध कर रहा है। आयुष मंत्रालय द्वारा पेश की गई कोरोना की दवा आयुष-64 को पहले ही कोरोना के एसिम्टोमैटिक, हल्के और मध्यम लक्षण वाले संक्रमण में काफी उपयोगी पाया गया है। मंत्रालय लगातार नए शोध के माध्यम से आयुर्वेद की विश्वसनीयता को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।



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नोट:
यह लेख मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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