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आयुर्वेद विशेषज्ञ ने बताया: इन दो औषधियों का सेवन कोरोना में है बेहद फायदेमंद, अध्ययनों में भी पुष्टि

Sat, 19 Jun 2021 08:07 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना और आयुर्वेदिक चिकित्सा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में आयुर्वेद ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ जड़ी-बूटियों की मदद से कोरोना के कई रोगियों के लक्षण और संक्रमण को ठीक किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 3000 वर्षों से आयुर्वेद हमारे सेहत की देखभाल कर रहा है। कोरोना महामारी के दौरान आयुर्वेदिक चिकित्सा एक बार फिर से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। दूसरी लहर के दौरान एक समय इलाज के लिए अपर्याप्त मालूम पड़ रही स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच आयुर्वेद जैसी वैकल्पिक उपचार पद्धतियों ने लोगों को नई उम्मीद दी है। यह चिकित्सा पद्धति न सिर्फ कोरोना के खिलाफ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक है, साथ ही कोरोना के रोगियों के लक्षणों को भी इससे काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कोरोना के उपचार में दो औषधियों का विशेष जिक्र मिलता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अध्ययन में भी इसकी पुष्टि हो चुकी है कि यह औषधियां न सिर्फ कोरोना में फायदेमंद हो सकती हैं, साथ ही इनका सेवन लोगों को संक्रमण से सुरक्षा देने में  भी सहायक है। आइए इस बारे में जानते हैं।
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आयुर्वेदिक औषधियों के लाभ - फोटो : पेक्सेल्स
कई औषधियां हैं बेहद लाभदायक
अमर उजाला ने आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के संग मिलकर आयुर्वेद को लेकर लोगों को जागरूक करने की पहल की। 'सेहत है संग तो जीतेंगे हर जंग' ध्येय वाक्य से आयोजित इस वेबिनार कार्यक्रम में आयुर्वेद विशेषज्ञों ने तमाम औषधियों के लाभ और आयुर्वेद के महत्व को लेकर लोगों को जागरूक किया। इसी क्रम में सीसीआरएएस के निदेशक जनरल डॉ एन श्रीकांत ने बताया कि कोरोना महामारी में अश्वगंधा और गिलोय के सेवन से तमाम तरह के लाभ देखने को मिले हैं।
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अश्वगंधा के साथ गिलोय का सेवन फायदेमंद - फोटो : Social media
अश्वगंधा और गिलोय
डॉ एन. श्रीकांत ने कोरोना में अश्वगंधा और गिलोय की उपयोगिता का जिक्र करते हुए बताया कि कई अध्ययन भी इससे होने वाले लाभ की पुष्टि करते हैं। वैज्ञानिकों ने अश्वगंधा को लेकर करीब 78 अध्ययन किए हैं। इसमें पाया गया कि अश्वगंधा के साथ गिलोय का सेवन करने वाले लोग कोरोना संक्रमण से 95 फीसदी तक सुरक्षित हो सकते हैं। इसके बाद भी जिनको संक्रमण हुआ उनमें गंभीर मामले नहीं देखे गए।

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गिलोय के हैं तमाम फायदे - फोटो : Social media
क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल में मिली जगह
अध्ययन के दौरान 20 संस्थानों द्वारा 90 हजार लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि आयुष मंत्रालय का आयुष रक्षा किट भी कोरोना में काफी अधिक सुरक्षा दे सकता है । इसी आधार पर भारत सरकार ने प्रोफेसर बीएम कटौच के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया जिसने आयुष-64 के अलावा अश्वगंधा और गिलोय को कोविड-19 के क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल में शामिल किया। इसे कोविड-19 के उपचार के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सकों की सलाह पर लिया जा सकता है। 
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प्रमाण आधारित चिकित्सा पर जोर - फोटो : Social media
प्रमाण आधारित चिकित्सा पर जोर
डॉ एन श्रीकांत बताते हैं कि आयुर्वेद लगातार अध्ययन और प्रमाण के साथ लोगों तक अपनी बातों को पहुंचाने के प्रयास में है। आयुष मंत्रालय, इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है जिससे लोगों तक प्रमाण आधारित आयुर्वेदिक चिकित्सा पहुंचाई जा सके। गुडू़ची और पिप्पली से होने वाले लाभ को जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटेड मेडिसिन में प्रकाशित कराया गया है। अश्वगंधा और गिलोय को लेकर किए गए अध्ययनों का डाटा रिव्यू किया जा रहा है। आयुर्वेदिक चिकित्सा निरंतर अध्ययनों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने की दिशा में काम कर रही है।

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नोट:
यह लेख सीसीआरएएस के निदेशक जनरल डॉ एन श्रीकांत द्वारा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ के साथ मिलकर  किए गए पहल के क्रम में आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों का पैनल शामिल हुआ। इस लेख उसी चर्चा का अंश है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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