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अल्जाइमर जैसी बीमारी से रहना है दूर तो दिनचर्या में जरूर शामिल करें ये काम

Sat, 21 Sep 2019 03:21 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : pixa
हर साल 21 सितम्बर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे के रूप में मनाया जाता है। अल्जाइमर एक बीमारी है जो डिमेंशिया का एक प्रकार है। जिसके शिकार ज्यादातर बड़ी उम्र के बुजुर्ग होते हैं। इस बीमारी में याददाश्त की क्षमता पर तो असर पड़ता ही है साथ ही सोचने, समझने की शक्ति भी प्रभावित होती है। ज्यादातर ये माना जाता है कि अल्जाइमर की बीमारी 65 साल या उससे ऊपर के बुजु्र्गों में होती है लेकिन अमेरिका में हुए शोध में इस बात का पता चला है कि 65 साल से कम उम्र के बहुत से लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। लेकिन अगर दिनचर्या में कुछ बदलाव किए जाए तो इस बीमारी के प्रभाव से बचा जा सकता है। 
 
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ज्यादातर लोगों का यहीं मानना है कि बूढे होने पर यह बीमारी होना आम बात है लेकिन ऐसा नहीं है। सही दिनचर्या का ख्याल नहीं रखा गया तो किसी भी उम्र में अल्जाइमर जैसी बीमारी हो सकती है। इसमें रोजमर्रा से जुड़े कामों और बोलने में परेशानी हो सकती है। साथ ही चीजों को याद रखना मुश्किल हो जाता है।

 
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- फोटो : pixa
लेकिन अगर दिनचर्या में कुछ सुधार किए जाएं तो इस बीमारी को होने से रोका जा सकता है। जिसमें से पहला कदम है पढ़ना। अगर कोई इंसान रोज कुछ न कुछ पढ़ता रहता है तो इससे दिमाग सक्रिय रहता है।

 

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- फोटो : Pexels
लिखना
दिमाग को हमेशा सक्रिय रखना है तो कुछ  लिखने की आदत डालें। ये कुछ भी हो सकता है जो आपको पसंद हो। चाहे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी बात या फिर कोई कहानी, कविता कुछ भी।

 
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- फोटो : pixa
कोई वाद्ययंत्र बजाएं
अपना शौक पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती है। अगर आपको कोई वाद्ययंत्र बजाना पसंद है तो उसे सीखने का अभ्यास करें। संगीत मस्तिष्क को आराम दिलाने के साथ ही याददाश्त बढ़ाने में भी मदद करता है।


 
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- फोटो : pixa
स्पोर्टस में हो रूचि
घर से बाहर निकलिए और कोई गेम खेलिए। किसी भी तरह का खेल खेलने से शरीर और दिमाग दोनों को ऊर्जा मिलती है और आप स्वस्थ महसूस करते हैं।
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- फोटो : pixa
योग करें या तैराकी सीखें
अगर आपको तैराकी आती है तो इसका अभ्यास करें और अगर तैराकी नहीं आती है तो योग या प्राणायाम करें। अल्जाइमर की बीमारी में योग और प्राणायाम बहुत मदद करता है।
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