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एयर पॉल्यूशन: दिवाली से पहले ही बढ़ने लगा प्रदूषण का खतरा, जानिए PM 2.5 और PM 10 में क्या अंतर है

Fri, 23 Oct 2026 02:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

AIR Pollution Delhi: PM2.5 और PM10 हवा में मौजूद प्रदूषण के कण होते हैं, जिनका अंतर उनके आकार में है। PM2.5 ज्यादा बारीक होने के कारण फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच सकता है, PM10 भी आंखों और श्वसन तंत्र में जलन पैदा कर सकता है। 
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वायु प्रदूषण के खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर से वायु प्रदूषण की चपेट में आता दिख रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिवाली से पहले ही दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खराब होने लगा है। शुक्रवार को एक्यूआई 177 रहा, जिसे अस्वस्थ कैटेगरी का माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह की एक्यूआई अस्थमा, हृदय या फेफड़ों की समस्याओं वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि एक्यूआई बढ़ने पर शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

गौरतलब है कि अक्तूबर से लेकर फरवरी के महीनों में राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के ज्यादातर हिस्सों में वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर दिवाली के बाद धुएं और कई राज्यों में पराली जलाने को इसका प्रमुख कारण माना जाता रहा है। अभी दिवाली में दो हफ्तों से ज्यादा का समय बाकी है, इससे पहले ही दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है।

हवा की गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राजधानी क्षेत्र में स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए 'ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान' (ग्रैप) के पहले चरण को लागू करने की घोषणा कर दी है। जब भी वायु प्रदूषण की बात होती है, तो PM2.5 और PM10 का जिक्र अक्सर सुनने को मिलता है। पर क्या आप जानते हैं कि PM2.5 और PM10 में क्या अंतर है?
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वायु प्रदूषण के खतरे - फोटो : Adobe Stock

मेरठ की हवा में घुला जहर

दीपावली से पहले मेरठ की हवा लगातार खराब होती जा रही है। ज्योति पर्व से पहले हवा की गुणवत्ता में गिरावट ने चिंता बढ़ा दी है। 16 अक्तूबर को मेरठ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 81 था, जो बृहस्पतिवार को बढ़कर 281 पर पहुंच गया। छह दिन में एक्यूआई में 200 अंकों की वृद्धि हुई है। 


पीएम 2.5  और पीएम 10 के खतरे

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पीएम 2.5 और पीएम 10 दोनों ही हवा में मौजूद छोटे-छोटे कण होते हैं, जो धूल-धुएं, वाहनों के उत्सर्जन, निर्माण कार्य और ईंधन जलने जैसी प्रक्रियाओं से निकलते हो सकते हैं। इन कणों का आकार जितना छोटा होता है, उनके सांस के जरिए शरीर के अंदर गहराई तक पहुंचने की आशंका उतनी अधिक हो सकती है। यही वजह है कि पीएम 2.5 को स्वास्थ्य के लिहाज से विशेष चिंता का विषय माना जाता है। हालांकि, PM 10 थोड़े बड़े आकार के होते हैं फिर भी इससे सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। 

पीएम 2.5 
  • ये बेहद बारीक कण होते हैं। इसका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं। इतना ही नहीं कुछ कण खून के संचार में पहुंच कर शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी जा सकते हैं। यही कारण है कि इससे हृदय और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है। 

पीएम 10
  • ये पीएम 2.5 से अपेक्षाकृत बड़े कण होते हैं, जिनका 10 माइक्रोमीटर तक हो सकता है। ये मुख्यरूप से धूल, परागकण और सड़क या निर्माण कार्य से उड़ने वाले कण होते हैं। इनसे नाक, गले और श्वसन तंत्र में जलन का खतरा देखा जाता रहा है। कुछ कण फेफड़ों तक भी पहुंच सकते हैं।


स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, जबकि बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में प्रदूषण के दुष्प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। इसी तरह से गर्भवती महिलाओं और हृदय या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को भी प्रदूषण के दौरान विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
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वायु प्रदूषण का खतरा - फोटो : Freepik.com
कौन से कण ज्यादा खतरनाक हैं? 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पीएम 2.5 और पीएम 10 दोनों ही सेहत के लिए नुकसानदायक माने जाते हैं, पर कुछ मामलों में पीएम 2.5 को ज्यादा खतरनाक पाया गया है।
 
  • पीएम 2.5 का आकार छोटा होता है जिसके कारण ये श्वसन तंत्र के भीतर गहराई तक पहुंच जाता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से अस्थमा, फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। इन कणों का असर केवल सांस की बीमारी तक सीमित नहीं है।
  • पीएम 10 के संपर्क से आंखों में जलन, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी है, उनमें लक्षण ज्यादा बढ़ सकते हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, जबकि बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में प्रदूषण के दुष्प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। इसी तरह से गर्भवती महिलाओं और हृदय या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को भी प्रदूषण के दौरान विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
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प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क - फोटो : Adobe Stock
पीएम2.5 और पीएम 10 से बचने के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, प्रदूषण सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है, इससे बचाव को लेकर लगातार सावधानी बरतते रहनी चाहिए। 
  • बाहर निकलने से पहले स्थानीय एक्यूाई और प्रदूषण का स्तर देखें।
  • प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर की शारीरिक गतिविधियां कम करें।
  • जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला एन 95 मास्क पहनें।
  • घर में तंबाकू के धुएं, कचरा जलाने और अनावश्यक धुएं से बचें।
  • घर में प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो तो परिस्थितियों के अनुसार एयर प्यूरीफायर मददगार हो सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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