19 अक्तूबर दिन बुधवार को करवा चौथ है। इस बार 100 साल बाद चार शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं, जिसका सुहागनों को फल मिलेगा। देखिए कैसे?
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करवा चौथ
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाने वाला करवा चौथ का व्रत इस बार रोहिणी नक्षत्र में आ रहा है। सेक्टर-30 के महाकाली मंदिर स्थित भृगु केंद्र के प्रमुख वीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार, करवा चौथ पर चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में उदय होगा और अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेगा वहीं बुध अपनी कन्या राशि में रहेगा। इसी दिन गणेश चतुर्थी और कृष्णजी की रोहिणी नक्षत्र भी है। बुधवार गणेशजी और कृष्णजी दोनों का दिन है।
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करवा चौथ
नारायण मिश्र के अनुसार, ये अद्भुत संयोग करवा चौथ के व्रत को और भी शुभ फलदायी बना रहा है। इसे करक करवा चौथ भी कहते हैं। अद्भुत संयोग तो कई बार बनते है लेकिन इसी दिन गणेश चतुर्थी और कृष्ण जी का रोहिणी नक्षत्र भी है। यह अद्भुत संयोग करवाचौथ व्रत पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख प्रदान करेगा। करवा चौथ का व्रत अखण्ड सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं करेंगी।
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करवा चौथ
नारायण मिश्र के अनुसार, इस दिन सुबह से चतुर्थी रहेगी। चंद्रोदय रात 8.55 पर रोहिणी नक्षत्र में होगा। शास्त्रों के अनुसार ज्योतिषशास्त्र रोहिणी नक्षत्र में चंद्रोदय होने से पति-पत्नी में प्रेम बढ़ेगा और घर में सुख-समृद्धि बढ़ेगी। इस दिन किए गए शुभ कामों का पूरा फल मिलेगा। इस बार करवा चौथ पर ग्रह दशा, नक्षत्र, वार तीनों के अद्भुत संयोग से महासंयोग बन रहा है। इस दिन व्रत करने से महिलाओं को 100 व्रतों का वरदान मिलेगा।
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करवा चौथ
करवा चौथ पर्व की पूजन सामग्रीः कुमकुम, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेंहदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन, चावल, सिन्दूर, मेंहदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूँ, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलवा, दक्षिणा के लिए पैसे।
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करवा चौथ
नारायण मिश्र ने बताया कि सम्पूर्ण सामग्री को एक दिन पहले ही एकत्रित कर लें। व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहन लें तथा शृंगार भी कर लें। इस अवसर पर करवा की पूजा-आराधना कर उसके साथ शिव-पार्वती की पूजा का विधान है क्योंकि माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके शिवजी को प्राप्त कर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था इसलिए शिव-पार्वती की पूजा की जाती है।
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करवा चौथ
करवा चौथ पूजन विधिः प्रात: काल में नित्यकर्म से निवृ्त होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें। व्रत के दिन निर्जला रहे यानि जलपान ना करें। व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें। प्रातः पूजा के समय इस मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ किया जाता है- 'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।'
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करवा चौथ
घर के मंदिर की दीवार पर गेरू से फलक बनाकर चावलों को पीसे। फिर इस घोल से करवा चित्रित करें। इस रीती को करवा धरना कहा जाता है। शाम के समय, माँ पार्वती की प्रतिमा की गोद में श्रीगणेश को विराजमान कर उन्हें लकड़ी के आसार पर बिठाए। माँ पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से श्रृंगार करें। भगवान शिव और माँ पार्वती की आराधना करें और कोरे करवे में पानी भरकर पूजा करें।
शाम को व्रत की कथा सुने और सांय काल में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही पति के हाथ से अन्न एवं जल ग्रहण करें। उसके बाद पति, सास-ससुर सब का आशीर्वाद लेकर व्रत को समाप्त करें।