भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हुआ सुपर सोनिक विमान तेजस कश्मीर में सामरिक लिहाज से हवाई सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल जम्मू कश्मीर की सीमा पर सुरक्षा के लिहाज से जितनी अहम जमीनी सुरक्षा है उतनी ही हवाई मार्ग से सुरक्षा भी। ऐसे में तेजस के भारतीय वायुसेना के बेडे़ में शामिल होने से कश्मीर में सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद अहम कदम कहा जा सकता है। जानें तेजस से जुड़ी बड़ी बातें।
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Tejas
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दरअसल कश्मीर की भारत पाक सीमाओं और पाक से लगने वाली नियंत्रण रेखा हमेशा से ही भारत की सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण रही है। इन सीमाओं पर न सिर्फ अनेकों बार पाक से तनाव की स्थिति रही है बल्कि सामरिक चुनौतियों के हालात भी पैदा हो चुके है।
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इंडियन एयरफोर्स
1965 से लेकर 1999 के कारगिल युद्घ तक हर समर में पाक से लोहा लेने के लिए भारतीय सेना के साथ एयरफोर्स की बड़ी भूमिका रही है।
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Indian Airforce
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ऐसे में सुखोई के साथ साथ तेजस का भी वायुसेना के बेड़े में शामिल होना सामरिक चुनौतियों के लिहाज से बेहद अहम है। तेजस एक सिंगल सीटर लड़ाकू विमान है जो कि 1350 किमी की रफ्तार से उड़ान भर सकता है ऐसे में कहा ये जा सकता है कि कश्मीर से लगने वाली सभी सीमाओं पर किसी भी समय तेजस की मदद से 20 मिनट से भी कम समय में स्थिति संभाली जा सकती है।
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Tejas
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साथ ही पहाड़ों वाले रणक्षेत्र कश्मीर में तेजस के हाइटेक राडार से किसी भी दुश्मन जहाज की लोकेशन को ट्रेस करना बेहद आसान होने वाला है।
तेजस को 16500 फीट की ऊंचाई पर उड़ाया जा सकता है जिससे ये किसी भी आपातकालीन स्थिति में दुश्मन पर अपने घातक बमों से पलटवार करने में पूरी तरह से सक्षम है।