अफगानिस्तान संकट के बीच भारत समेत दुनिया की नजर तालिबान के अब्दुल गनी बरादर और जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर के रिश्तों पर है। दोनों एक दूसरे के मददगार हैं। दोनों ही देवबंदी हैं। मसूद अजहर की रिहाई में बरादर और बरादर की फरारी में मसूद का हाथ रहा है। मसूद अजहर बरादर का आतंकी बिरादर है। मसूद अजहर की रिहाई के लिए भारतीय जहाज आईसी-814 को हाईजैक किया गया था। जिसमें बरादर का हाथ माना जाता है।
इन दोनों का जन्म 1968 में हुआ। साल 2009 के बाद बरादर को अमेरिकी एजेंसियों के डर से फरार होना पड़ा। इस दौरान मसूद अजहर ने उसे पाकिस्तान में शरण दिलाई थी। सूत्रों का यह भी कहना है कि आतंकी हमलों में आईईडी धमाकों को बढ़ाने में भी बरादर का ही दिमाग था। मसूद अजहर भारत का सबसे बड़ा दुश्मन है। बरादर के मजबूत होने से मसूद को भी ताकत मिलेगी। कश्मीर में तालिबान के खतरे पर हाल ही में कश्मीर जोन के आईजी विजय कुमार कह चुके हैं कि हम सभी चुनौतियों से पेशेवर तरीके से निपटेंगे और हम पूरी तरह सतर्क हैं। अब आपको बताते हैं उस अधिकारी के बारे में जिसे आज भी मसूद अहजर को छोड़े जाने का मलाल है...