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पढ़ें उनकी कहानी जिनके दम पर -50 डिग्री में सियाचिन में शान से लहरा रहा है तिरंगा

Sun, 16 Apr 2017 10:21 AM IST
amarujala.com- Presented by: श्रेयांश त्रिपाठी
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siachin - फोटो : File Photo
सियाचिन की धरा पर शहादत की कई कहानियां लिखी हुई हैं। 13 अप्रैल को सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत के 33 बरस पूरे हुए हैं। तीन दशक यहां सफेद चादर, नीले आसमान और मुश्किल हालातों के बीच तिरंगा शान से लहरा रहा है। सियाचिन में सेना के कई जवान बेहद मुश्किल हालातों में बिना किसी परवाह मुस्तैद हैं। देखें तस्वीरें। 

 
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Siachin - फोटो : File Photo
सियाचिन में तैनात जवानों के लिए दुश्मन से ज्यादा खतरा मौसम से होता है। सर्दियों में तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस तक नीचे तक पहुंच जाता है। ऐसे हालात में भी जवान देश की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा से खड़े रहते हैं। 
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Siachin - फोटो : File Photo
कई बार आधार शिविर से सबसे दूर की पोस्ट इंद्रा काल तक जवानों को पैदल 20 से 22 दिन तक सफर करना पड़ता है। आक्सीजन की कमी होने से कई बार सोते हुए जान जाने का खतरा होता है।

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siachin - फोटो : File Photo
सियाचिन में सैनिकों की तैनाती सिर्फ तीन महीने के लिए की जाती है। इस दौरान फौजियों को नहाने और दाढ़ी बनाने की अनुमति भी नहीं होती। सियाचिन के सैनिकों को इस दौरान एक सीमित दायरे में ही घूमने की अनुमति दी जाती है। 
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Siachin - फोटो : File Photo
इस अवधि में कई बार जवानों पर बर्फ में तेज रोशनी से आंख खराब होने का खतरा भी बना रहता है।
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siachin - फोटो : File Photo
सियाचिन के रणक्षेत्र में तैनात जवानों पर जब भी कोई संकट आया तब पूरा देश इनके साथ खड़ा रहा। 
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avalanche - फोटो : DEMO PHOTO
वर्ष 2016 में जब हिमस्खलन में सेना के कुछ जवान दब गए थे। बर्फ में दबे लांस नायक हनुमनथप्पा को रेस्क्यू कर अस्पताल में दाखिल किया गया तो उनके लिए सारे देश के लोगों ने दुआएं मांगी। 
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ट्विटर - फोटो : demo pic
सोशल मीडिया पर भी इस जांबाज के साथ लोग खड़े हुए। तक कई दिन तक सोशल मीडिया पर उनके नाम का हैशटैग ट्रेंड करता रहा।  
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