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1971 विजय दिवस: जानें कैसे एक भारतीय जांबाज से हारी थी कश्मीर कब्जा करने आई पाक की सेना

Sun, 16 Dec 2018 02:39 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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1971 WAR - फोटो : self
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में 95000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। इसी के साथ बांग्लादेश बना। इस युद्ध में सेकेण्ड लेफ्टिनेन्ट अरुण खेत्रपाल ने उच्चतम वीरता और साहस का परिचय दिया था।
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1971 का भारत पाक युद्ध
दरअसल पाकिस्तान की योजना कश्मीर पर कब्जा करने की थी। इसके लिए उसने बड़ी संख्या में सियालकोट सेक्टर में अपनी फौज को तैनात कर दिया और शकरगढ़ सेक्टर में बसंतर नदी (सांबा) से टैंकों के जरिये हमला बोल कर जम्मू-कश्मीर को पंजाब से अलग-थलग करना चाहता था। 
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भारत-पाकिस्तान 1971 युद्ध विशेष
15 दिसंबर को अरुण खेत्रपाल एक आर्म्ड स्क्वार्डन की कमान संभाल रहे थे। इसी दौरान एक-दूसरे स्क्वार्डन को दुश्मन की सेना का सामना करने के लिए मदद की जरूरत पड़ी और उन्हें मदद के लिए ब्रिगेड मुख्यालय जरपाल पहुंचने का संदेश मिला। 

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1971 का भारत पाक युद्ध
रास्ते में लैंडमाइंस बिछी थी, जिनको हटाने के लिए कुछ और दिन लगने थे। दुश्मन की तरफ से गोलाबारी भी जारी थी। इन सब बाधाओं की परवाह किए बगैर वे पूना हॉर्स की स्क्वार्डन लेकर 16 दिसंबर की सुबह जरपाल पहुंच गए। 
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भारत-पाकिस्तान - फोटो : SELF
दुश्मन के कुछ टैंकों को तबाह करते हुए उन्हें खदेड़ने में कामयाब रहे। वे सेंचुरियन टैंक पर सवार थे। दो अन्य अफसर भी दस्ते में थे, जो अलग-अलग टैंकों पर थे। कुछ घंटों के बाद दुश्मन ने बड़ी संख्या में पैटन टैंक के डिवीजन के रूप मेें दूसरा जोरदार हमला किया।
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भारत-पाकिस्तान 1971 युद्ध विशेष
इस हमले का सामना खेत्रपाल ने बड़ी चतुरता और वीरता से अपने थोड़े से टैंकों के साथ पूरे दिन किया। वह दुश्मन के टैंकों को भगा-भगा कर छकाते रहे और एक-एक कर तबाह करते रहे। इस दौरान उन्होंने दुश्मन के दस टैंक बर्बाद कर दिए। 
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