जम्मू कश्मीर के उधमपुर जिले के क्रिमची गांव में सूबेदार करतार सिंह के घर 19 अगस्त 1936 को जन्मे मेजर नारायण सिंह(वीर चक्र) ने भारत-पाकिस्तान(1971) की लड़ाई में न सिर्फ अपने पराक्रम का परिचय दिया, बल्कि दुश्मन को धूल चटाते हुए ऐसा दर्द दिया, जिसे वह आज भी लोहा मानता है।
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1971 का भारत पाक युद्ध
मशहूर पाकिस्तानी जनरल मुकीम खान ने अपनी पुस्तक ‘पाकिस्तान क्राइसिस आफ लीडरशिप’ में इस वीर शहीद के बारे में कुछ यूं लिखा है, हमारे ऊपर इस युद्ध में सबसे कड़ा और निर्णायक आक्रमण मेजर नारायण सिंह की कमान में 4 जाट द्वारा किया गया था।
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Rahil Sharif
- फोटो : File Photo
उसने हमारी 6 एफएफ की चौकियों पर बहादुरी और हिम्मत से थोड़े से सैनिकों के साथ अंदर घुस कर घातक वार किया और अंत में लड़ता हुआ शहीद हो गया। जनरल मुकीम खान ने पुस्तक में फाजिल्का की लड़ाई का जिक्र करते हुए लिखा है कि शहीद मेजर नारायण सिंह ने निशाने हैदर मेजर शब्बीर शरीफ (पाकिस्तान के हाल में सेवानिवृत्त जनरल राहील शरीफ के बड़े भाई) जो उस समय 6 एफएफ की कमान संभाले थे, उन्हें पांच दिसंबर 1971 में गुत्थम गुत्था की लड़ाई में मार गिराया था।
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war
इस दौरान वह खुद भी शहीद हो गए थे। यह लड़ाई फाजिल्का की वेरीवाल नदी के किनारे लड़ी गई। इसलिए यह वार आफ वेरिवाला के नाम से भी जानी जाती है। इसे वार आफ मेजरस भी कहा जाता है, क्योंकि यह दो मेजरों के बीच लड़ी गई थी।
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fazilka
- फोटो : अमर उजाला
फाजिल्का(पंजाब) में डुग्गर प्रदेश के वीर सपूत के नाम से एक भव्य स्मारक है, जहां हर वर्ष बैसाखी और विजय दिवस पर मेला लगता है। एक प्रण पट्टिका भी लगी है, जिस पर लिखा है, ‘ऐसी माएं धन्य हैं, जिन्होंने ऐसे सपूतों को जन्म दिया।
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बांग्लादेश युद्ध
हम फाजिल्का वासी नमन करते हैं, उन शहीदों को जिनके बलिदानों के कारण आज हमारी और हमारे शहर की पहचान है। असफवाला शहीद समाधि मंदिर है उस प्यार का और शहादत का, जिसके सामने हर फाजिल्का वासी का सिर नतमस्तक हो जाता है। यह शहीद स्मारक हमारे लिए और आने वाली नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है, जो हमें हमेशा अपने देश और अपनी मिट्टी के लिए मर मिटने के लिए प्रेरित करता रहेगा।’ जय जवान। फाजिल्का में एक चौक का नाम भी इस वीर सपूत के नाम पर रखा गया है।
शहीद मेजर नारायण सिंह 1963 में सेना की जाट रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट बने। उन्होंने 1965 के युद्ध में भाग लिया। 1971 की लड़ाई में उन्हें फाजिल्का में 4 जाट की व्रेवो कम्पनी की कमान सौंपी गई। फाजिल्का को दुश्मन से बचाने के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति तक दे दी। इस वीर सपूत की अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद उधमपुर की ओर से टाऊन हाल स्थित चौक पर प्रतिमा लगाई गई है।