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Sidhra Encounter: सटीक रणनीति से घेरा, फिर गोलियों की बौछार और राकेट लांचर से ढेर, तस्वीरों से जानें कहानी

Thu, 29 Dec 2022 02:35 AM IST
विमल शर्मा अजय मीनिया, जम्मू
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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला
शहर के सिद्दड़ा में मुठभेड़ के दौरान चार आतंकियों को ढेर कर पुलिस और सेना ने अब तक के सबसे सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया है। पूरी सूझबूझ और सटीक रणनीति से बिना किसी नुकसान के 4 आतंकियों को मारा गिराना बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा सकता है। ऐसा पहली बार है, जब इस तरह की मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। सूत्रों के अनुसार खुफिया एजेंसियों के पास आतंकियों की घुसपैठ से लेकर कश्मीर जाने तक की पुख्ता सूचना थी।
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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

इसके चलते मंगलवार की रात को ही सांबा से लेकर पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप और सेना ने मिलकर मोर्चा संभाल लिया था। जगह-जगह नाकेबंदी कर दी गई थी। पुलिस ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में माहिर अफसरों को मौके पर बुला लिया था। सेना की क्यूआरटी के जवान भी मौजूद थे। जैसे ही सिद्दड़ा पुल पर तैनात सेना की जैकलाई और जेके पुलिस के जवानों को उक्त ट्रक नजर आया तो उन्हें ज्ञात हो गया था कि इस ट्रक में आतंकियों की मौजूदगी है।

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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

इसे देखते हुए मौके पर मौजूद करीब 70 सुरक्षाबलों ने पोजीशन ले ली। जैसे ही ट्रक की तलाशी ली तो आगे से ठीक वैसा ही हुआ जैसा उम्मीद की गई थी। तलाशी लेते ही आतंकियों ने ट्रक के अंदर से गोली चला दी, लेकिन सुरक्षाबलों ने पहले से ही पोजीशन ले ली थी, जिससे आतंकियों के  खिलाफ ऐसी जवाबी कार्रवाई की गई कि उन्हें ट्रक में बनाए गए ठिकाने से बाहर आने का मौका ही नहीं लग पाया। 2 घंटों के भीतर आतंकियों पर करीब 4 हजार गोलियां दाग दी गईं। ट्रक के दोनों तरफ की बॉडी के बीच गोलियों के दिखने वाले निशान इस बात का सबूत हैं। 

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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

गोलीबारी बंद होने पर दागे रॉकेट लांचर

सुबह 7.24 मिनट पर गोलीबारी दोनों तरफ से शुरू हुई थी। करीब दो घंटे के बाद ट्रक से गोलियां चलना बंद हो गईं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने फिर भी जोखिम नहीं लिया और ट्रक के ऊपर रॉकेट लांचर से गोले दागे। ट्रक में भूसा भरा हुआ था। मुठभेड़ के दौरान ट्रक पर सुरक्षाबलों ने गोलियों की बौछार और रॉकेट लांचर के गोलों से आग भी लग गई। रॉकेट लांचर और आग लगने से आतंकियों के शव भी ट्रक के बीच में जल गए थे। जब इनके शवों को ट्रक से बाहर निकाला गया तो इनके शव आधे से ज्यादा जल चुके थे। 

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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

ड्रोन से ट्रक पर नजर रखकर किया हमला

सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के वक्त पूरे ट्रक को ड्रोन की जद में ले लिया। ड्रोन की मदद से ट्रक पर पूरी नजर रखी जा रही थी कि आतंकी किस पोजिशन में हैं। इसी से देखकर सुरक्षाबलों ने आतंकियों पर गोलियां बरसाईं और अंत में रॉकेट लांचर दागकर उन्हें ढेर कर दिया। 

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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

ऑपरेशन खत्म होते ही लगे जयघोष

आतंकियों से सुबह 7.25 मिनट पर मुठभेड़ शुरू हो गई थी। करीब दो घंटे के बाद मुठभेड़ खत्म हो गई। 12.30 बजे तक आपरेशन को जारी रखा गया, ताकि पूरे ट्रक को अच्छी तरह से खंगाला जाए और देख लिया जाए कि आतंकियों ने अपने साथ कोई आईईडी तो नहीं लगाई है। 12.30 बजे ऑपरेशन को खत्म दिया गया। जैसे ही आतंकियों के शव बाहर निकाले गए तो ऑपरेशन की सफलता को देख जवानों ने जोश में भारत माता के जयघोष लगाए। 

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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

दूसरी बार मिली एम 4 कार्बाइन राइफल, कमांडर करते हैं इसका इस्तेमाल

आतंकियों के पास से एक एम 4 अमेरिकन कार्बाइन राइफल भी मिली है। पिछले 4 साल में ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब आतंकियों के पास से यह राइफल मिली हो। दरअसल, यह राइफल आतंकी संगठन सिर्फ अपने आतंकी कमांडरों को देते हैं। कमांडर भी छोटे मोटे स्तर का नहीं होता। बड़े स्तर के कमांडर के पास यह राइफल होती है। ऐसे में संभव है कि मारे गए चार आतंकियों में आतंकी संगठनों का एक बड़ा कमांडर भी मारा गया है। वर्ष 2018 में झज्जर कोटली में तीन आतंकियों को मार गिराया गया था। इनके पास से तब अमेरिका की एम 4 कार्बाइन राइफल मिली थी। अब फिर से जम्मू में आतंकियों के पास यह राइफल मिली है। 

 

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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

आशिक नेंगरू के नाम की भी अफवाह

बता दें कि मारे गए आतंकियों में कुख्यात आतंकी आशिक नेंगरू के शामिल होने की भी चर्चा है, लेकिन इसकी फिलहाल किसी ने पुष्टि नहीं की है। एडीजीपी मुकेश सिंह का कहना है कि मारे गए आतंकियों की पहचान नहीं हो पाई है। 
 

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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

तीन हफ्ते में दूसरी बार धमाकों की आवाज से गूंजा सिद्दड़ा

सिद्दड़ा और इसके आसपास के इलाकों में बुधवार की सुबह गोलियों की तड़तड़ाहट और धमाकों की घंटों आवाज गूंजती रही। पिछले 21 दिन में यह दूसरा मौका था जब ऐसा हुआ। इसके पहले 7 दिसंबर को इसी जगह पर ग्रेनेड हमला हुआ था। वहीं बुधवार को जब मुठभेड़ शुरू हुई तो पुलिस ने दोनों तरफ की आवाजाही बंद कर दी। स्थानीय लोगों को पुल के दोनों तरफ जाने के लिए यह कहते हुए मना कर दिया कि वीआईपी मूवमेंट चल रही है। इसके चलते सड़क बंद की गई है। मुठभेड़ से ठीक पहले कुछ लोग सिद्दड़ा पुल पर सैर कर रहे थे। इनमें से एक तारिक अहमद ने बताया कि मुठभेड़ शुरू होने के बाद उसे ज्ञात हो गया था कि कुछ गड़बड़ है। तब वह सिद्दड़ा की तरफ जा रहा था। उसे सुरक्षाबलों ने जल्दी वहां से निकलने के लिए कहा। 

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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

7 घंटे तक बंद रहा हाइवे

वहीं बुधवार को जब सुबह मुठभेड़ हुई तो इसके बाद पुलिस ने कुंजवानी सिद्दड़ा रोड को पूरी तरह से बंद कर दिया। नरवाल, बाग ए बाहु मोड़, मानसर मोड़, पंजतीर्थी चौक, नगरोटा टीसीपी आदि को बंद कर दिया। सुबह 7.25 मिनट पर नगरोटा से लेकर नरवाल तक के रोड को बंद कर दिया। इससे जम्मू और बाहरी राज्यों से कश्मीर आने जाने वाले वाहनों को वाया अंबफला से होकर जाना पड़ा। दोपहर 1 बजे के बाद वाहनों की आवाजाही बहाल की गई। इसका असर शहर में भी देखने को मिला। 
 

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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला

ट्रक की नंबर प्लेट फर्जी, चेसिज और इंजन नंबर तक मिटा दिया था

मुठभेड़ में मारे गए आतंकी पूरी प्लानिंग के साथ कश्मीर जा रहे थे। उन्होंने ट्रक का इस तरह से इस्तेमाल किया कि इसका इस्तेमाल करने के बाद या फिर पकड़े जाने पर इसका पता न चल सके। इसलिए आतंकियों ने ट्रक पर फर्जी नंबर प्लेट लगा रखी थी। यहां तक कि ट्रक का चेसी नंबर और इंजन नंबर भी पूरी तरह से मिटा दिया था। आतंकियों ने ट्रक की मूल नंबर प्लेट हटाकर उसकी जगह एक अन्य नंबर प्लेट लगा दी। जिस पर पेंट से लिखकर जेके 18-1226 नंबर लगा दिया। यह नंबर कश्मीर के कुलगाम के रहने वाले मोहम्मद खान के नाम पर पंजीकृत था।

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Jammu Sidhra Encounter - फोटो : संजय कुमार

सूत्रों का कहना है कि जिस ट्रक का आतंकियों ने इस्तेमाल किया है। इसे पंजाब से खरीदा गया है, क्योंकि ट्रक के दोनों तरफ काफी कुछ पंजाबी में लिखा हुआ था, जबकि इसमें जो भूसा भरा गया था वो गेहूं का बचा हुआ वेस्टेज है। जो इस समय पंजाब में मिलता है। संभव है कि पंजाब में भूसा भरा गया और वहीं पर आतंकियों का ठिकाना भी बनाया गया हो। यह भी संभव है कि ट्रक की नंबर प्लेट सांबा और कठुआ के आसपास आकर बदली गई हो। 

एडीजीपी मुकेश सिंह ने कहा है कि ट्रक का नंबर फर्जी था, क्योंकि चेसिज नंबर और इंजन नंबर मिटा दिया गया था और ट्रक भी काफी हद तक जल चुका था, इसलिए इसका मूल नंबर नहीं पता चला है। इसकी जांच करने के लिए एफएसएल की मदद ली गई है। एफएसएल को बोला गया है कि ट्रक का मूल नंबर पता करा कर दें कि यह किसके नाम पर है। 

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Jammu Sidhra Encounter - फोटो : संजय कुमार

एनआईए की टीम भी जांच में जुटी

मुठभेड़ मामले की जांच एनआईए ने भी शुरू कर दी है। मुठभेड़ स्थल पर एनआईए की टीम भी पहुंची और जांच के लिए जरूरी सबूत जुटाए। एनआईए के अलावा रॉ, आईबी, एमआई, सीआईडी, एसआईए की टीमों ने भी जांच के लिए जरूरी सबूत जुटाए।
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