जम्मू-कश्मीर में हुए अब तक के सबसे बड़े आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए और 40 से ज्यादा घायल हुए हैं। जम्मू- श्रीनगर नेशनल हाईवे पर अपराह्न सवा तीन बजे हमलावर ने विस्फोटक भरी कार से सीआरपीएफ काफिले की बस को टक्कर मार दी। धमाका इतना भयंकर था कि बस के परखच्चे उड़ गए। इसके बाद घात लगाए आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग भी की। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्कानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी।
आगे की स्लाइड्स में देखिए देश के उन वीर सपूतों की कहानी जो इस हमले में हुए शहीद...
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शहीद पंकज त्रिपाठी
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इन शहीदों में महराजगंज के पंकज त्रिपाठी भी शामिल हैं। उनके पिता ओमप्रकाश ने जम्मू सीआरपीएफ मुख्यालय से आए फोन के हवाले से यह जानकारी दी है। परिवार के लोग जम्मू रवाना हो गए हैं। छुट्टी पर आए पंकज तीन दिन पहले ही ड्यूटी पर पुलवामा लौटे थे।
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शहीद जवान तिलक राज
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शिमला : पुलवामा में आतंकियों ने सेना की जिस बस को निशाना बनाया, उसमें कांगड़ा जिले में जवाली के देवा गांव का जवान तिलक राज पुत्र लायक राम भी सवार था। प्रदेश सरकार ने मंत्री किशन कपूर और स्थानीय विधायक अर्जुन को शिमला से जवान के घर रवाना कर दिया है। सरकार और प्रशासन लगातार जवान के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। उधर आतंकी हमले में 40 जवानों की शहादत पर हिमाचल के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने शोक जताया है।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने जहां आतंकी घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है, वहीं शहीदों की शहादत को नमन किया है। बजट सत्र के बाद राजभवन में राज्यपाल की ओर से विधायकों को दिया जाने वाला भोज भी रद्द कर दिया है। वहीं, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि वह शहीद एवं घायल हुए सैनिकों के दुखद समाचार से आहत हैं। आतंकी घटना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि शहादत को नमन करता हूं और दुख की इस घड़ी में देश शहीदों के परिवार के साथ है।
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शहीद अजीत कुमार
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उन्नाव : आतंकी हमले में उन्नाव के लोक नगर का वीर सपूत अजीत कुमार (38) शहीद हो गया। गुरुवार देर रात छोटे भाई रंजीत के पास फोन आया तो परिवार में कोहराम मच गया। अजीत चार दिन पहले ही एक महीने की छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर गए थे। सूचना पर डीएम, सिटी मजिस्ट्रेट देर रात शहीद के घर पहुंचे और परिवार को ढाढस बंधाया। शहर के लोक नगर निवासी अजीत कुमार (38) पुत्र प्यारे लाल सीआरपीएफ की 115वीं बटालियन में तैनात थे। गुरुवार शाम वह सीआरपीएफ के काफिले के साथ जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहे थे। तभी पुलवामा अवंतीपोरा में गोरीपोरा में एक आतंकी ने विस्फोटक से भरी कार को जवानों की बस से भिड़ा दिया।
अजीत के शहीद होने की खबर से परिजनों में कोहराम मच गया। शहादत की खबर फैलते ही क्षेत्र शोक में डूब गया। अजीत के छोटे भाई रंजीत ने बताया कि आतंकी हमले की खबर वह टीवी पर देख रहे थे। तभी जम्मू से आए फोन से उन्हें भाई के शहीद होने की खबर मिली। आतंकी हमले में उन्नाव के जवान की शहादत की सूचना मिलते ही डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय, सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार सिंह शहीद अजीत के घर पहुंचे।
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जवान प्रदीप सिंह यादव
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कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में यूपी के कन्नौज जिले का लाल शहीद हो गया। तिर्वा के सुखसेनपुर निवासी जवान प्रदीप सिंह यादव भी उस बटालियन में शामिल थे, जिसे आंतकियों ने निशाना बनाया। रात में यह खबर आई तो परिजनों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
तीन दिन पहले छिबरामऊ के शाहजहांपुर निवासी सेना में हवालदार रहे सूर्यप्रताप सिंह की कश्मीर के उरी में हुई मौत की खबर का गम जिला भूल नहीं पाया था कि गुरुवार को पुलवामा में हुई आतंकी घटना में जिले के लाल की शहादत ने सभी को झकझोर दिया।
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शहीद श्याम बाबू
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पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद कानपुर देहात का श्याम बाबू 10 फरवरी को ही ड्यूटी पर गया था। शाम को उसके शहीद होने की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। डेरापुर थाना क्षेत्र के नोनारी गांव के मजरा रैगवां निवासी किसान राम प्रसाद के दो बेटों में श्यामबाबू बड़े थे। छोटा बेटा कमलेश प्राइवेट नौकरी करता है। पिता ने बताया कि श्याम बाबू की शादी करीब छह साल पहले रूबी से हुई थी।
उसके चार साल का बेटा और छह महीने की एक बेटी है। मकान बनाने का काम चल रहा था, इसके चलते कुछ दिनों से श्याम बाबू छुट्टी पर था। 29 जनवरी को ड्यूटी पर गए थे और 1 फरवरी को लौट आए थे। 10 फरवरी को फिर ड्यूटी पर चले गए थे। गुरुवार को सीआरपीएफ जवानों पर पुलवामा में हमले की खबर के बाद परिवार चिंतित हो गया था। मीडिया अन्य माध्यमों से श्यामबाबू के शहीद होने की सूचना परिजनों को मिल रही थी। शाम करीब करीब साढ़े छह बजे डेरापुर थाने के सिपाही ने घर जाकर सूचना दी। इसके बाद घर में कोहराम मच गया। घर के बाहर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।
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शहीद रमेश यादव
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को आतंकी हमले में शहीद होने वालों में जिले के चौबेपुर क्षेत्र के तोफापुर के लाल रमेश यादव (26) भी हैं। सीआरपीएफ के जवान रमेश देश की सीमा की सुरक्षा के लिए रमेश 12 फरवरी को घर से रवाना हुए थे। गुरुवार की शाम फोन आया कि रमेश शहीद हो गए हैं तो बूढ़े पिता किसान श्याम नारायण गश खाकर जमीन पर गिर पड़े जबकि पत्नी रेनू अचेत हो गई।
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शहीद अवधेश यादव उर्फ दीपू
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पुलवामा में हुए आतंकी हमले में वाराणसी में चंदौली के पड़ाव क्षेत्र के बहादुरपुर गांव का अवधेश यादव उर्फ दीपू शहीद हो गया। मंगलवार को तीन दिन पहले ही घर से ड्यूटी पर लौट था। हालांकि अभी घर वालों की उसके शहीद होने की सूचना नहीं दी गई है। वहीं घटना की जनकारी होने के बाद पास पड़ोस और ग्रामीणों का घर पर जमावड़ा हो गया।
बहादुरपुर गांव के हरिकेश यादव के चार बेटे-बेटियों में अवधेश सबसे बड़ा था। वर्ष 2006 में वह सीआरपीएफ की 145वीं बटालियन में भर्ती हुआ था। परिवार में पिता के अलावा मां मालती देवी हैं, जो कैंसर से पीड़ित है। दो बहनों की शादी हो चुकी है। छोटा भाई बृजेश यादव पढ़ाई कर रहा है। अवधेश की शादी तीन साल पहले सैयदराजा के पूरवा गांव निवासी जनार्दन यादव की बेटी शिल्पी के साथ हुई थी। शिल्पी का तीन साल का एक बेटा भी है।
हमले में शहीद हुए सभी सैनिकों की जानकारी अमर उजाला आपके लिए जल्द ही उपलब्ध कराएगा।
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में इटावा के रहने वाले सीआरपीएफ के हेड कॉन्स्टेबल रामवकील माथुर शहीद हो गए।शहादत की खबर सुनकर घर में कोहराम मच गया। हेड कॉन्स्टेबल रामवकील माथुर के शहीद होने की खबर जब घर पहुंची तो पूरे जिला गम में डूब गया। इटावा के अशोक नगर इलाके में अपने मायके में रह रहीं गीता और उसके तीन बेटे और गीता के मां बाप को जब यह पता चला कि उनके दामाद रामवकील माथुर की पुलवामा जम्मू कश्मीर में एक आतंकी हमले में शहीद हो गये। लोगों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। बड़े बेटे राहुल की उम्र 12 वर्ष है।जो केंद्रीय विद्यालय में कक्षा 8 का छात्र है और उससे 2 साल छोटा साहुल जो कक्षा 7 में पढ़ता है।
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शहीद वीरेंद्र सिंह
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उत्तराखंड उधमसिंह नगर जिले के खटीमा के मोहम्मदपुर भुढ़िया गांव के रहने वाले शहीद वीरेंद्र सिंह हैं। इनके दो छोटे बच्चे है। गुरुवार रात करीब नौ बजे सेना के एक अधिकारी ने उकनी पत्नी को फोन पर शहादत की जानकारी दी है। इसके बाद से घर में कोहराम मचा गया। शहीद वीरेंद्र सिंह राणा के पिता दीवान सिंह है। शहीद वीरेंद्र सिंह के दो बड़े भाई ( जय राम सिंह व राजेश राणा) हैं। जयराम सिंह बीएसएफ के रिटायर्ड सूबेदार हैं, जबकि राजेश राणा घर में खेती बाड़ी का काम देखते हैं। शहीद वीरेंद्र सिंह के बहनोई रामकिशन ने बताया कि वीरेंद्र के दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी 5 साल की, जबकि ढाई साल का बेटा है। उन्होंने बताया कि वीरेंद्र दो दिन पहले ही 20 दिन की छुट्टी बिताने के बाद जम्मू के लिए रवाना हुआ था। वीरेंद्र सिंह सीआरपीएफ की 45वीं बटालियन में जम्मू-कश्मीर में तैनात थे।
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amit kumar meerut
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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आंतकी हमले में अमित कुमार पुत्र सोहनलाल निवासी शामली जनपद के शहीद होने की पुष्टि हो गई है। शुक्रवार सुबह करीब 6:15 बजे परिजनों के पास सीआरपीएफ से फोन गया है। बताया गया कि अमित का परिवार शामली शहर के रेल पार रहता है। वह 2017 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। 12 फरवरी को ही 20 दिन की छुट्टी के बाद वापस गया था। परिवार में चार भाई और एक बहन हैं। करीब 21 वर्षीय अमित अविवाहित है।
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pradeep
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले में प्रदीप दो दिन पहले ही तयेरे भाई की शादी के बाद लौटा था। सुबह 11 बजे भी परिजनों से प्रदीप की फोन पर बात हुई थी, लेकिन शाम को ही उसकी शहादत की खबर आ गई। प्रदीप के पिता जगदीश का कहना है कि उसे गर्व है कि उसका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है, लेकिन वह चाहते हैं कि मोदी सरकार उसकी शहादत का ऐसा बदला ले।परिजनों के अनुसार प्रदीप वर्ष 2003 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। वर्तमान में उसकी पोस्टिंग श्रीनगर में थी। उसकी पत्नी कामिनी और दो बेटे सिद्धार्थ और दुष्यंत गाजियाबाद में रहते हैं। बाकी परिजन गांव में। परिजनों ने बताया कि आठ फरवरी को ही वो अपने ताऊ के लड़के अमित की शादी में छुट्टी लेकर आया था। गाजियाबाद के गोविंदपुरम निवासी उसकी पत्नी और बच्चे भी आए थे। सब बड़े खुश थे। 12 फरवरी को ही वो वापस ड्यूटी पर गया था। चचेरे भाई उमेश कुमार के अनुसार के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे ही प्रदीप का फोन उनके पास आया था।
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अश्वनी कुमार काछी
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के 42 जवानों में मध्यप्रदेश के जबलपुर का लाल अश्वनी कुमार काछी भी शामिल है। शहीद अश्वनी जिला मुख्यालय से 44 किमी दूर सिहोरा स्थित खुड़ावल गांव के रहने वाले थे। 2017 में उनकी पहली पोस्टिंग श्रीनगर में हुई थी। अश्वनी कुमार सीआरपीएफ की 35वीं बटालियन में तैनात थे। उनकी शहादत के बाद से गांव में मातम पसरा हुआ है।
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कौशल कुमार रावत
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आगरा के ताजगंज इलाके के कहरई गांव के जवान कौशल कुमार रावत पुलवामा हमले में शहीद हुए हैं। मां धन्नो देवी, भाई कमल किशोर और पूरा परिवार बेहाल हो गया। कौशल कुमार रावत का बेटा गुनगांव से पढ़ाई कर रहा है। चार दिन पूर्व ही ड्यूटी जॉइन करने कश्मीर गए थे।
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महेश कुमार भी शहीद
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रयागराज के तुड़ीहर बदल गांव निवासी महेश कुमार 118 बटालियन में तैनात थे। इस हमले में महेश भी शहीद हुए हैं। महेश के दो बच्चे साहिल पांच साल व समर छह साल का है। पिता राजकुमार यादव ऑटो चालक हैं। पांच दिन पहले ही वह यहां आए थे। बीते मंगलवार को ही वह जम्मू-कश्मीर के लिए यहां से रवाना हुए।
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martyred vijay
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देवरिया के भटनी थाना इलाके के छपिया जयदेव निवासी विजय मौर्या सीआरपीएफ के 92 बटालियन में तैनात थे। गुरुवार देर रात जब शहादत की खबर आई तो पूरे गांव में मातम छा गया।
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जैमल सिंह सीआरपीएफ
पुलवामा में हुए आतंकी हमले में पंजाब का एक और 'शेर' शहीद हो गया। हमले में सीआरपीएफ की जो बस उड़ाई गई, उसे यही बहादुर जवान चल रहा था। शहादत की खबर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। शहीद की पहचान पंजाब के मोगा जिले के कस्बा कोटइसेखां निवासी जवान जैमल सिंह के रूप में हुई। जैमल ड्राइवर थे और जब यूनिट एक से दूसरी जगह शिफ्ट की जा रही थी, तब सीआरपीएफ की बस को वही चला रहे थे। जैसे ही काफिला पुलवामा पहुंची, एक एसयूवी गाड़ी बस से आकर भिड़ गई। टक्कर लगते ही धमाका हो गया और बस के परखच्चे उड़ गए। जैमल सिंह की शहादत की खबर गांव पहुंच चुकी है।
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जवान मनिंदर सिंह
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पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 27 साल का जवान मनिंदर सिंह शहीद हो गया। जैसे ही शहादत की खबर घर पहुंची, पिता और भाई बदहवास हो गए। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद मनिंदर पंजाब के गुरदासपुर के दीनानगर का रहने वाला था। उसकी अभी शादी भी नहीं हुइ्र थी। उसके पिता पंजाब रोडवेज से रिटायर्ड कर्मचारी है। वहीं उसका एक भाई है और वह भी सीआरपीएफ का जवान है। इन दिनों वह आसाम में तैनात है। मनिंदर सिंह की मां की मौत पहले ही हो चुकी है।
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rathod nitin
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14 फरवरी की सुबह तकरीबन 10 बजे सी.आर.पी.एफ के जवान नितिन राठौड़ जब अपनी पत्नी से बात कर रहे थे, तब उनकी पत्नी वंदना को ज़रा भी इल्म ना था कि अपने पति से वह आखिरी बार बात कर रही हैं। क्योंकि इस बातचीत के कुछ ही घंटों बाद 35 साल के सीआरपीएफ कांस्टेबल राठौड़ पुलवामा में आतंकवादी संगठन जैश-ए- मोहम्मद द्वारा किये गए आत्मघाती हमले में शहीद हो गए।
राठौड़ के परिवार में उनके माता- पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं. महाराष्ट्र के बुलढाणा शहर के चोर पांगरा गाँव के रहने वाले राठौड़ 2005 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। वह सीआरपीएफ की 'जी' कंपनी की 03 बटालियन में थे। बहुत ही जल्द उनकी नौकरी में तरक्की होने वाली थी।
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हेमराज मीणा
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में कोटा जिले का भी एक जवान शहीद हुआ है। सांगोद क्षेत्र के विनोद कलां गांव के हेमराज मीणा (43) पुत्र हरदयाल मीणा सीआरपीएफ की 61वीं बटालियन में थे। वे करीब 18 साल से फौज में रहकर देश की सेवा कर रहे थे। हेमराज के बड़े भाई रामबिलास ने बताया कि हेमराज नागपुर (महाराष्ट्र) में ट्रेनिंग पर गए हुए थे। वहां से लौटते वक्त इसी सोमवार रात को कुछ देर के लिए गांव आए थे और मंगलवार सुबह साढ़े 6 बजे गांव से रवाना होकर बुधवार को ही जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। दोपहर बाद जैसे ही हमले की खबरें आई तो बेटियों की फौज के अफसरों से बात हो गई थी, इसके बाद मेरी भी कमांडर से बात हुई, तब जाकर उनकी शहादत की पुष्टि हुई।
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नसीर अहमद
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लेथपोरा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के शहीद जवान मोहम्मद नसीर अहमद के बड़े भाई सिराजुद्दीन निवासी दोदासनबाला, तहसील थन्ना मंडी के घर शुक्रवार को दिनभर लोगों की भीड़ रही। मोहम्मद नसीर की शहादत से पूरे गांव में मातम तो है, लेकिन शहादत पर गर्व है।
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martyred sukhjinder singh
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पुलवामा आतंकी हमले में शहीद होने वाले जवानों में तरनतारन के गाव गंडीविंड धत्तल के सुखजिंदर सिंह भी शामिल हैं। सुखजिंदर सिंह की शहादत की खबर रात को जब गांव पहुंची तो परिवार को पहले यकीन ही नहीं हुआ। शहीद के भाई गुरजंट सिंह जंटा ने परिवार को जब जानकारी दी तो पूरा परिवार सन्न रह गया। आतंकवादियों ने जिस तरह कायरतापूर्वक हमला किया है उससे यह परिवार बहुत गुस्से में है। सुखजिंदर के परिजनों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ अब आर-पार की लड़ाई होनी चाहिए, तभी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आएगा।