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मन की बात: पीएम मोदी ने किया श्रीनगर के तारिक अहमद का जिक्र, पढ़िए पानी पर तैरती एंबुलेंस की कहानी

Sun, 27 Jun 2021 12:03 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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शिकारा एंबुलेंस - फोटो : ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में एक बार फिर जम्मू जिले के अरनिया की सीमावर्ती पंचायत तरेवा की मुखिया बलबीर कौर, श्रीनगर की डल झील में तैरती बोट एंबुलेंस बनाने वाले तारिक पतलू और बांदीपोरा के वेयान गांव का सौ फीसदी टीकाकरण के लिए नाम लेकर सराहना की। इसके बाद ये फिर सुर्खियों में है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में दूसरी बार सरपंच बलबीर कौर का लिया। बलबीर ने गत वर्ष कोविड-19 के दौर में सरपंच बलबीर कौर ने पुलिस के सहयोग से अरनिया में 50 बिस्तर का कोविड केंद्र तैयार कराया था। इसकी मन की बात में प्रधानमंत्री ने प्रशंसा की थी। इस बार भी क्षेत्र में 25 बिस्तर का कोविड केंद्र तैयार किया गया। प्रधानमंत्री ने लोगों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करते हुए बांदीपोरा के वेयान गांव का जिक्र किया। उन्होंने प्रशासन के साथ उनकी सराहना की जिनके प्रयासों से इस गांव में 18 साल से ऊपर के सभी लोगों का सौ फीसदी टीकाकरण किया जा सका। 

श्रीनगर के तारिक के काम को भी सराहा
पीएम ने मन की बात में जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के तारिक अहमद पतलू के काम को सराहा है। तारिक ने कोरोना को हराने और डल झील इलाके के लोगों की मदद के लिए एक एंबुलेंस बनाई है। इस शिकारा एंबुलेंस में पीपीई किट, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की सुविधा है। तारिक ने कहा कि मुझे अपने काम पर गर्व है। करीब दो महीने की मेहनत और 12 लाख रुपये की लागत के बाद वह इस शिकारा एंबुलेंस को तैयार कर पाए।
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शिकारा एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि श्रीनगर की डल झील इलाके में एक अच्छी ख़ासी आबादी भी है जो यहां रहती है। लेकिन लोगों को परेशानी का सामना तब करना पड़ता है जब कोई बीमार होता है। ऐसे में झील निवासियों को बड़ी मुश्किल से अपने मरीज़ को शिकारे के सहारे किनारे तक लाना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए तारिक अहमद पतलू ने बीते साल अपने परिवार और दोस्तों की सहायता से डल झील में शिकारा एंबुलेंस सेवा शुरू करने का फैसला किया था। करीब दो महीने की मेहनत और 12 लाख रुपये की लागत के बाद वह इस शिकारा एंबुलेंस को तैयार कर पाए। उन्होंने बताया कि इससे पहले वर्ष 1865 में झेलम नदी में मरीजों को लाने और ले जाने के लिए एक बोट हुआ करती थी। 

 
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शिकारा एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
साल 2020 में कोरोना ने कश्मीर में कहर बरपाया था। महामारी की चपेट में तारिक अहमद पतलू भी आ गए थे। कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत वह पहले अपने हाउसबोट में आइसोलेशन में चले गए लेकिन हालत बिगड़ी तो अस्पताल का रुख करना पड़ा। 

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शिकारा एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
जब वह अस्पताल से वापस लौटे तो डल झील के किनारे शिकारे वालों ने उन्हें उनकी हाउसबोट तक ले जाने से इनकार किया। बड़ी मुश्किल से परिवार के सदस्यों ने उन्हें घर तक पहुंचाया।
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शिकारा एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद उन्होंने शिकारा एंबुलेंस बनाने का निश्चय किया। जोकि वर्तमान में लोगों को काफी मदद पहुंचा रही है।
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