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इस साल अब तक पाकिस्तान ने की 2423 नापाक हरकतें, सीमा से सटे इलाकों के लोगों का हाल जानकर रो पड़ेंगे

Tue, 21 Jul 2020 02:37 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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पाकिस्तान ने किया संघर्षविराम का उल्लंघन - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान की ओर से लगातार संघर्षविराम का उल्लंघन किया जा रहा है। पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगी भारतीय चौकियों और नागरिक ठिकानों को लगातार निशाना बना रही है। इस साल अब तक सीमापार से 2,432 से अधिक बार बिना किसी उकसावे के संघर्षविराम का उल्लंघन किया गया है, इसमें 14 नागरिक मारे गए जबकि 88 घायल हुए हैं।

 
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पाकिस्तान ने किया संघर्षविराम का उल्लंघन - फोटो : अमर उजाला
बीते दिनों पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर स्थित करमाड़ा सेक्टर में पाकिस्तान ने रिहायशी इलाकों में गोले बरसाए थे। इसमें गांव सेयाल निवासी मोहम्मद रफीक, उनकी बीवी रफिया और उनके पुत्र इरफान की मौत हो गई थी। पाकिस्तानी गोले से उनके शरीर के चिथड़े उड़ गए थे।
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पाकिस्तान ने किया संघर्षविराम का उल्लंघन - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला के साथ बातचीत में करमाड़ा के 78 वर्षीय चौधरी मोहम्मद फजल ने कहा कि सत्तर वर्ष से हम लोग इसी तरह के दृश्य देेखते आ रहे हैं। शुक्रवार को एक परिवार के तीन लोग पाकिस्तानी गोलाबारी में मारे गए, इससे पहले एक बार सात लाशों को एक साथ हम ढो चुके हैं। हमने कभी हिम्मत नहीं हारी है, और न ही हारने वाले हैं। हम इसी तरह अपनों की लाशें ढोते रहेंगे।

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पाकिस्तान ने किया संघर्षविराम का उल्लंघन - फोटो : अमर उजाला
फजल ने कहा कि पाकिस्तानी गोलाबारी से हमारे इस इलाके में अब तक कम से कम तीस लोग जान गंवा चुके हैं। दर्जनों लोग दिव्यांग होकर घरों में हैं। इसके बावजूद हमने कभी दुश्मन के आगे हार नहीं मानी है। न ही आगे कभी हार मानेंगे। हमें एक बात का अफसोस होता है कि जब नियंत्रण रेखा के लोगों के विकास और उत्थान की बात होती है तो वह हमारे लिए न होकर जम्मू, राजोरी, कश्मीर जैसे इलाके के लोगों के उत्थान की बात होती है।
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पाकिस्तानी गोलाबारी में क्षतिग्रस्त मकान - फोटो : अमर उजाला
कहा कि सरहद पर अपना खून हम बहाएं, हमारे बच्चे बहाएं और उसका फल और लोग पाएं। इससे बड़ा दुख हमारे लिए और क्या हो सकता है। पाकिस्तान तो हमारा दुश्मन है, लेकिन जो हमारे अपने हैं, जो हुकूमत में बैठे हैं, उन्हें भी हमारी चिंता नहीं होती है। आज सात दशक बाद भी हमारे गांव तक पक्की सड़क नहीं है। 
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रोते-बिलखते मृतक के परिजन - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि गोलाबारी में किसी के घायल हो जाने पर उसे कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। हमारी केंद्र सरकार के मांग है कि सरहद के इन बिना हथियार के रखवालों की तरफ ध्यान दें। इन्हें हर सुविधा दें ताकि ये और जोश से दुश्मन के मंसूबों को नाकाम बनाते रहें।

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