प्रवासी मजदूरों की भीड़
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एक साथ आए थे एक साथ जा रहे हैं
सोचा था खुशी-खुशी घर जाएंगे, नहीं जानते थे कि यूं डर के साथ जाना होगा। हम लोग एक साथ आए थे एक साथ जा रहे। जम्मू स्टेशन पर मंगलवार की रात मौजूद प्रवासियों की भीड़ के बीच, जिससे भी पूछो बस यही जवाब मिल रहा था। अमर उजाला की टीम ने मजदूरों से एक-एक कर पूछना शुरू किया। हर किसी की आंख में कहीं न कहीं एक डर था, जो उन्हें बोलने नहीं दे रहा था। खैर, बहुत कुरदने पर उन्होंने टुकड़ों में बोलना शुरू किया। अपने डर को उन्होंने कभी बदले मौसम तो कभी त्योहार का बहाना दिया। पर गांदरबल में हुए आतंकी हमले का खौफ कहीं न कहीं उन्हें परेशान किए था।
एक लाइन से हर किसी ने बताया कि वो श्रीनगर से आ रहे। शबीर की उम्र यही कोई 18 से 20 साल के आसपास होगी। बोला वहां ईंट बनाते हैं। क्यों जा रहे, इस सवाल पर खामोश, बगल में बैठा साथी बोला, माहौल कुछ बदला है, देखते हैं कि फिर कब आना होगा।